<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839</id><updated>2011-09-26T16:55:14.240-07:00</updated><title type='text'>मेरे विचार</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>111</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8311401587252365013</id><published>2010-12-27T06:50:00.000-08:00</published><updated>2011-01-02T08:31:36.251-08:00</updated><title type='text'>डॉक्टर बिनायक सेन को मैं देशद्रोही नहीं मानता - -  न्यायालय उन्हें ससम्मान रिहा कर सुरक्षा उपलब्ध कराए</title><content type='html'>&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #20124d;"&gt; &amp;nbsp;जब से डा. बिनायक सेन के नाम &amp;nbsp;सुर्खिओं में आने लगा तब से मुझे उन पर रूची होने के कारण समाचारों को विशेष रूप से चिन्तन मनन करता रहा हूँ&amp;nbsp; &amp;nbsp;, नक्शली &amp;nbsp;के आरोप में ग्रिफ्तार होना और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा होने&amp;nbsp; की सारी चर्चाओ पर मेरी नजर लगी रहती थी ,इस मुहिम में मुझे कई स्थानों से ई मेल प्राप्त हुआ&amp;nbsp; ,आज कल दुनियॉं इतनी छोटी हो चुकी है कि पलक झपकते ही खबरों का साम्राज्य ऑंखों के सामने आ ही जाती है । मैं कई बार छत्तीसगढ राज्य के रायपुर और बिलासपुर आता जाता रहा हूँ&amp;nbsp;परन्तु कभी ऐसा मौका नहीं मिला जिससे &amp;nbsp;बिनायक जी से मुलाकात का मौका मिलता ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: purple;"&gt;जीवन में अपने लिए संघर्ष&amp;nbsp; करना और दूसरों के लिए संघर्ष&amp;nbsp; करने में अन्तर हैं ,जब विचार भिन्नता के कारण शोषक&amp;nbsp; &amp;nbsp;यह सोचने लगे कि अपने लिए &amp;nbsp;खतरा है तो उसे रास्ते से हटाने का कई षड़यंत्र &amp;nbsp;रचा जाता हैं ,मुझे लगता है कि छत्तीसगढ के शासक&amp;nbsp; को डा .सेन से खतरा दिखा होगा , त&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: purple;"&gt;भी&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: purple;"&gt;&amp;nbsp;डा. सेन को षड़यंत्र&amp;nbsp; का &amp;nbsp;शिकार&amp;nbsp; बनाया गया ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;मैं हिंसा में विस्वास नहीं करता, परन्तु जिस कारण से हिंसा होता है ,उस कारण पर मुझे अधिक रूचि रहती&amp;nbsp; हैं यदि कारण को समाप्त कर दिया जाए तो हिंसा क्यों होगा ।&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;आजादी के बाद &amp;nbsp;से ही इस देश&amp;nbsp; में जो लूट खसौट शुरू&amp;nbsp; होकर वह आज जानलेवा साबित हो रहा हैं&amp;nbsp;। अंग्रेजों से अधिक शोषण&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;इस देश&amp;nbsp; में देशी शोषक&amp;nbsp; कर रहा है ,मुठ्ठीभर लोगों ने देश&amp;nbsp; की &amp;nbsp;अधिकांश&amp;nbsp; सम्पत्ति हड़प&amp;nbsp; कर &amp;nbsp;आराम की जीवन जीकर साधारण लोगों को दिखावे की खेल से उनके जले में नमक छिडकाने का काम कर रहा हैं ,हद तो अब मुकेश&amp;nbsp; अम्बानी ने कर दी मात्र बीबी बच्चों के रहने के लिए 27 मंजीला मकान, अभी एक माह में 70 लाख रूपए केवल बिजली का बिल आया है&lt;/span&gt;।&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;सरकार बिजली उत्पादन के लिए देश&amp;nbsp; के किसानों का जमीन अधिग्रहण कर रही है और किसान अपनी पूर्वजों की जमीन बचाने के लिए संघर्षरत&amp;nbsp; है, यदि इस संघर्ष&amp;nbsp; में किसी ने हथियार उठा लिया तो वे आतंकवादी और नक्शली&amp;nbsp; कहलाता है ,संघर्ष&amp;nbsp; में साथ देने वाले देशद्रोही&amp;nbsp; हो जाता है ।&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;भारत में आज अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों और निहत्थे लोगों को,कानून के नाम पर हत्या कर दिया जाता है &lt;/span&gt;1&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #cc0000;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #cc0000;"&gt;पुलिस और सैनिकों द्वारा जब जनता पर गोलियॉं दागी जाती है, लोग मारे जाते है ,तो कितनों पर देशद्रोही का अपराध दर्ज किया जाता है ? प्रजातंत्र में जनता ही शासन और जनता ही मालिक होता हैं ,यदि मालिक पर गोली दागी जाती है तो क्या वह देशद्रोह नहीं हैं ? प्रजा&amp;nbsp; पर गोली चलाने का अर्थ देश&amp;nbsp; पर हमला करने के समान अपराध है&lt;/span&gt;। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;तालियॉं दोनों हाथों से बजती है ,जब सरकार अन्याय के खिलाफ लड़ने&amp;nbsp; वालों को गोलियों का शिकार&amp;nbsp; बनाती है, तो गोलियों का जवाब गोलियों से देना आवश्यक&amp;nbsp; है । अंग्रेजों ने भारतीय जनता को जीवन सुरक्षा केलिए हथियार उठाना कानूनन अपराध माना था वह भी गुलामी के दिनों में ऐसा किया गया ,आज देश&amp;nbsp; आजाद है ,तो अंग्रेजों का काला कानून बदलना ही चाहिए ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;मै मानता हूँ&amp;nbsp; कि यदि &amp;nbsp;मुझे &amp;nbsp;कोई जान से मार डालने का हिम्मत करें तो मै आत्मरक्षा के लिए कुछ भी करूँ&amp;nbsp; यहॉं तक की हाथियार का भी इस्तेमाल कर सकता हूँ&amp;nbsp;,इस हेतु मुझे कोई कानून से आदेश&amp;nbsp; लेने की आवश्कता&amp;nbsp; नहीं होनी चाहिए, यही मौलिक अधिकार है ,यही प्राकृतिक अधिकार हैं&amp;nbsp;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;नक्शलबाड़ी&amp;nbsp; से जमिंदारों के खिलाफ जो हिंसक आन्दोलन आगे चलकर राष्ट्रीय&amp;nbsp; आन्दोलन का रूप ले रहा है ,चाहे मैं&amp;nbsp; पक्ष में रहूँ&amp;nbsp; या विपक्ष में , इस&amp;nbsp; देश&amp;nbsp;में यह&amp;nbsp; भयावह रूप लेकर रहेगा,इमानदारी पूर्वक देश सेवा में&amp;nbsp;लगे लोग खतरनाक गृहयुद्ध से देश को बचा सकते&amp;nbsp; हैं ,नक्शलबाड़ी&amp;nbsp;&amp;nbsp;का आन्दोलन एका एक नहीं भड़का&amp;nbsp;, उसके पीछे शोषण&amp;nbsp; का घिनौना रूप उत्तरदाई है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: cyan;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: magenta;"&gt;आज नक्शली&amp;nbsp; का रूप कुरूप हो चुका है ,उनके नेता भी सुविधाभोगी हो चुके हैं, परन्तु कुछ नक्शली&amp;nbsp; आज भी एक सिद्धान्त पर जीते हुए आन्दोलन को जीवित रखे हुए है ,वे आज बौखलाहट का शिकार&amp;nbsp; होकर कुछ भी करने में उतारू है, मुझे लगता है कि जब वे आम जनता को यह समझाने मे असफल हो रहे &amp;nbsp;है कि जो भी संघर्ष&amp;nbsp; किया जा रहा वह उनके हित में ही हैं, इस कारण जनता उनके साथ न देकर मुखबिरी करने और असहयोग करने के कारण भय से ग्रसित होकर शंका&amp;nbsp; के आधार पर हत्या जैसे कारनाम को अन्जाम दे रही है ,हालाकि यह किसी भी रूप में सहमत योग्य नहीं हैं ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: orange;"&gt;घोर शोषण&amp;nbsp; तंत्र जब तक खत्म नहीं हो जाता हैं ,तब तक किसी न किसी रूप में या नाम से हिंसक बारदाते होती रहेंगी ,इस संघर्ष को&amp;nbsp; कुछ लोग पवित्र कार्य के रूप में महिमा मंडित भी करते है। इस संघर्ष&amp;nbsp; को कुरूक्षेत्र के साथ जोड़कर न्याय और अन्याय की धर्मयुद्ध के रूप में भी कुछ लोग भाग ले रहे हैं , चाहे कुछ भी हो पर शोषण&amp;nbsp; तंत्र से&amp;nbsp;उपजी यह लड़ाई&amp;nbsp; थमने का नाम नहीं ले रहा हैं ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;डा.सेन जैसे अनेक सेन इस संघर्ष&amp;nbsp; में भाग लेने आगे आते रहेंगे और अनेक शहीद&amp;nbsp; भी होंगे&amp;nbsp; ,कुछ लोगों का नाम इतिहास में आ भी नहीं पाएगा कुछ अमर भी हो जाऐंगे ,एक समय आर एस एस को कुछ लोग अच्छी नजर से नहीं देख पाते थे,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;आपातकाल में राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के अधिकंश&amp;nbsp; नेताओं और जयप्रकाश&amp;nbsp;नारायण &amp;nbsp;जैसे राष्ट्रवादी&amp;nbsp; और संघर्शशील&amp;nbsp; लोगों को जेल में भर दिया गया था, परन्तु आगे चल कर लोगों ने इन्हें भारी बहुमतों से देश&amp;nbsp; का बागडोर सोप दिया &amp;nbsp;, मुझे लगता है कि देश&amp;nbsp; के लोग यदि आगे चल कर डा.सेन जैसे लोगों के साथ मिलते हुए एक नई विकल्प की कल्पना कर रहे हैं तो अतिशयोक्ति न होगा । इस लेख के आलोक में यह भी लिखना चाहता हूँ&amp;nbsp; कि दुनियॉं की सबसे अच्छी व्यावस्था प्रजातंत्र ही हैं ,पर आज प्रजातंत्र के नाम पर जो लूटतंत्र चल रही है वह सहन योग्य भी नहीं है । तंत्र बदलना आवश्यक&amp;nbsp; हैं ......डा.बिनायक सेन को मैं देशद्रोही नहीं मानता ,न्यायालय को ससम्मान डा.सेन को रिहा कर सुरक्षा प्रदान करना चाहिए&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #cc0000;"&gt;मत भिन्नता के कारण किसी संघर्शशील&amp;nbsp; व्यक्ति को देशद्रोह जैसे अपराध में दंडितकर विचारों का हनन वर्तमान समय में असहनिय है ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8311401587252365013?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8311401587252365013/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/12/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8311401587252365013'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8311401587252365013'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='डॉक्टर बिनायक सेन को मैं देशद्रोही नहीं मानता - -  न्यायालय उन्हें ससम्मान रिहा कर सुरक्षा उपलब्ध कराए'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3469217519436345729</id><published>2010-11-25T03:17:00.000-08:00</published><updated>2010-11-25T03:20:51.741-08:00</updated><title type='text'>क्या इस देश में मर्दों की कमी हो गई है?</title><content type='html'>&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;क्या इस देश में मर्दों की कमी हो गई है? इस सवाल करने के पीछे मेरा एक विशेष&amp;nbsp; उददे्श्य भी है । उदेद्श्य पर सीधा&amp;nbsp; न आकर मैं एक&amp;nbsp; डाक्टर मित्र के बारे में लिखना चाहता हूँ , पेशे में डाक्टर होने के बाद भी सामाजिक और राजनैतिक घटनाओं पर उनके नज़र पैनी रहती हैं ,एक&amp;nbsp; दिन वे मुझसे कहने लगे कि -एस . के &amp;nbsp;! तुम जानते हो कि&amp;nbsp;इस देश में हेपिटाइसिस बी के बाद सी डी ई भी बच्चों को लगाना शुरू&amp;nbsp; हो गया है ? &amp;nbsp;और&amp;nbsp;&amp;nbsp;इस काम के लिए विदेशी दवाई कंपनीयॉं अंतर्राष्ट्रीय क्लबों का सहारा ले रहा है। आजकल लॉयन और रोटरी क्लब जैसे अनेक क्लब भी दवाई कम्पनीयों के विक्रय प्रतिनिधि&amp;nbsp; के रूप&amp;nbsp; में कार्य करते हुए&amp;nbsp; दवाई बेचने में लगी हुई हैं, यह सबको दिखाई दे रही है। कहने को तो वे इसे &amp;nbsp;सेवा का नाम दे देती है पर वास्वतिकता इसके ठीक विपरीत है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: purple;"&gt;मेरे मित्र ने आगे कहने लगे कि राय ! `इस देश में &amp;nbsp;विदेश से जो भी दवाई आती है उसका विशेष&amp;nbsp; जॉच पडताल न करते हुए प्रोयोग में&amp;nbsp; लाया जाता है , मैंने बच्चों को हेपेटाइसिस की दवाई &amp;nbsp;लगाने के पश्चात भी पीलिया जैसे खतरनाक बिमारी से बच्चों को मरते हु, देखा है। यदि दवाई में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती तो बच्चे मरते ही क्यों ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #274e13;"&gt;डाक्टर ने एक&amp;nbsp; ओर रहस्य बताया, जिसे सुन कर किसी को विश्वास ही नहीं होगा उन्होंने कहा कि अमेरिका हमारा न कभी दोस्त था और न है, आगे भी दोस्त होने की संभावना&amp;nbsp; नहीं है। जनसंख्या पर हाय तौबा मचाने वाला अमेरिका हमारे देश के आने वाली पीढी को पंगू बनाने की षड़यंत्र&amp;nbsp; पर कानूनी मुहर लगा दिया और बच्चों को जो दवाईयॉं दी जाती है उससे बच्चे दब्बू और डरपोक बन कर अन्याय के खिलाफ लड़ने&amp;nbsp; लायक ही नहीं रहेगा, एक&amp;nbsp; पीढी तो ऐसी&amp;nbsp; &amp;nbsp;तैयार हो चुकी है जो कहने को तो मर्द है &amp;nbsp;परन्तु इन मर्दो में मर्दांगी &amp;nbsp;नहीं है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: lime;"&gt;अन्याय के खिलाफ लड़ने&amp;nbsp; में सबसे आगे रहने वाले भारत के सपुत आज ढूढने पर भी दिखाई नहीं देता ,भारत में खुलेआम जो अन्याय का &amp;nbsp;खेल चल रहा है ,जिसमें कार्यपालिका ,व्यावस्थापिका ,न्यायपालिका ,की भागिदरी उल्लेखनिय है। तीनों अंग आज पंगु हो चुकी &amp;nbsp;है ,अन्याय और भष्ट्राचार&amp;nbsp; चरम सीमा पर है। देशी हो या विदेशी जो जहॉं से हो सके देश को लुटने में लगी हुई है , फिर भी देश मौन ,शान्त !!&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;सभी स्थितियों को देखते हुए&amp;nbsp;, डाक्टर के बातों पर अत्यन्त दू:ख के साथ &amp;nbsp;विस्वास करना पड़&amp;nbsp; रहा है ,क्या यह मानने योग्य बात हो सकती है कि इस देश में अब मर्दो की कमी हो गई है ? &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3469217519436345729?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3469217519436345729/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/11/blog-post.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3469217519436345729'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3469217519436345729'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='क्या इस देश में मर्दों की कमी हो गई है?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7706285776269827820</id><published>2010-09-21T18:34:00.000-07:00</published><updated>2010-09-21T18:34:43.611-07:00</updated><title type='text'>कुरूक्षेत्र का अधूरा कार्य करना अभी बाकी है</title><content type='html'>&lt;span class="Apple-style-span" style="color: purple;"&gt;बडे बॉंधों का विरोध करो ,पर्यावरण बचाने की बातें या भष्ट्राचारों का &amp;nbsp;नाश सम्बन्धी कई कदम ,ये सभी आज फालतू या विकास विरोधी समझा जाता है। बडे बाधों के कारण भूकम्प और बाढ , पर्यावरण के कारण अतिबृष्टि&amp;nbsp; - अनाबृष्टि&amp;nbsp;और मानव निर्मित अन्य बिमारीयों से मनुष्यों&amp;nbsp; का अकाल मृत्यु ,यदि अभी इस विषयों&amp;nbsp; पर चर्चा&amp;nbsp; नहीं होता&amp;nbsp; तो अधिकांश लोग शायद दिल्ली और उत्तराखण्ड के भयानक बाढ के सम्बन्ध में सोचना भी उचित न समझते । इस देश में आग लगने पर कुंए खोदने की बातें याद आती है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #660000;"&gt;नर्मदा बचाओ आन्दोलन को देश के गद्दार नेताओ ,शासन प्रशासन ने हल्के रूप से लिया जिसके चलते भयानक बाढ और भुकंप से लोगों को बर्वाद करते हुए आज भी प्रभावित लोग नारकिय जीवन जीने को बाध्य है। नदी नालों को बाध कर अचानक अधिक पानी भर जाने के कारण अधिकाधिक पानी छोड़ने&amp;nbsp; की मजबूरी के चलते निचले हिस्सों में देश के किसी न किसी स्थान में हर वर्ष&amp;nbsp; भयानक बाढ से लोग बर्बाद&amp;nbsp;हो जाते है । हजारों एकड़ भूमि &amp;nbsp;नष्ट&amp;nbsp; होने के साथ ही साथ अमूल्य जीवन की बलि देना आम होता जा रहा है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #cc0000;"&gt;देश के स्वार्थी , विवकेहीन नेताओं , प्रशासन और व्यापारीयों का गठबंधन ने देश में जो नंगा नाच शुरू&amp;nbsp; कर दिया है उसका जिता जगता उदाहारण देश के राजधानी दिल्ली में दुनियॉ के सामने प्रमाणित हो चुकी&amp;nbsp; है। खेल गॉंव और राश्ट्मण्डल खेल, फूट ब्रिज&amp;nbsp; आदी चिल्हा- चिल्हा कर देश के चरित्र को उजागार करके दूंनिया को बता दिया कि हम कितने विकसित और सभ्य है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: #20124d;"&gt;टीव्ही में आज ही श्री कृष्ण&amp;nbsp; सिरियल देख रहा था, इसमें नकूल द्वारा मामा शकूनी को कूरूक्षेत्र में तीर से पैर ,हाथ ,और अन्त में मस्तक को धड़ से अगल करते हुए कहता है कि तम्हारे जैसे मामा को जीने का कोई अधिकार ही नहीं हैं । मै सोच रहा था कि- इस देश के शकूनी जैसे कितने ही गद्दार खूले आम घूम&amp;nbsp; रहे है&lt;/span&gt;-&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;इसी कडी में द्रौपदी ने खूली बालों और कंगी को देखते हुए कहती है कि युद्ध के अन्त में आगे कोई भी दु:शासन नारीयों पर अत्याचार करने का हिम्मत भी नहीं कर पाएगा , काश ऐसा होता -----&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;लगता है कुरूक्षेत्र का अधूरा कार्य करना अभी बाकी है&amp;nbsp;&amp;nbsp;!!!!!&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7706285776269827820?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7706285776269827820/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7706285776269827820'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7706285776269827820'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='कुरूक्षेत्र का अधूरा कार्य करना अभी बाकी है'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-1459884943911830292</id><published>2009-11-10T08:20:00.000-08:00</published><updated>2009-11-10T08:23:44.762-08:00</updated><title type='text'>जनता किस लिए कर देती हैं ? पुछा उच्च न्यायालय ने</title><content type='html'>उच्च न्यायालय ने प्रत्यक्ष देखा भ्रष्टाचार का नंगा नाच ,न्यायालय मजबूर होकर प्रशासन को अपनी औकात बताई ,क्या उसे ऐसा करना चाहिए था ? क्या न्यायालय ने भ्रष्टाचार रोकने में असफल होने के कारण ऐसा किया ?  जब देश में संविधान के अनुसार कुछ भी नहीं चल रहा है दूसरी ओर संशोधन द्वारा संविधान की आत्मा तो कब की मर चुकी है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे याद है जब छत्तीसगढ में प्रथम उच्च न्यायालय का उद्घाटन हुआ था ,बिलासपुर शहर  को तब कबाड़  खाना के अतिरिक्त कुछ कहना प्रतीत नहीं होता ,सड़कों  का हाल तो देखकर रोना आता था ,नाली ,पानी की व्यवस्था ,साफ -सफाई केवल खाना पूर्ति के लिए होता था ,शहर के जागरूक नागरिकों ने तब उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर शासन - प्रशासन के खिलाफ कार्यावाही करने का निवेदन किया था । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर अविलम्ब सुनवाई करते हुए कहा कि- जनता किस बात के लिए कर देती हैं ? यदि नागरिकों को मुलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति न हो सकें ,तो क्या सरकार को कर देना उचित है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंने न्यायालय द्वारा इस तरह की टिप्पणी की कल्पना ही नहीं कर सकता था ,अब प्रश्न यह उठता है कि जब देश में चारों और अराजकता हैं ,शासन प्रशासन जनता द्वारा दिया गया, कर के रूप में प्राप्त राजस्व को सही इस्तेमाल नहीं करके ,इस राजस्व से नेताओं और आफसर को ता-ता,धि न्ना ,करने की आदत पड़  गई हैं ,अत: क्यों न हम कर देना ही बन्द कर दें ? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कर न देना अपने आप में अपराध हैं ,लेकिन जब कर का इस्तेमाल गलत लोग करने लगे हैं तो ऐसा करना कोई अपराध नहीं है ... क्या सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर इस पर बहस का सिलसिला जारी रखना चाहिए ?  जो सक्षम ब्लोगर बन्धु कुछ आर्थिक सहयोग याचिका हेतु देना चाहे तो आगे आकर इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए एक पहल करने में क्या हम सक्षम हैं ?      &lt;br /&gt;यदि हॉं तो कैसे ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं आशा करता हूँ  कि सभी जागरूक ब्लोगर बन्धु एवं पाठकगण इस सामाजिक कठोर निर्णय पर अपना मत और टिप्पणी अवश्य दें ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-1459884943911830292?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/1459884943911830292/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/11/blog-post.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1459884943911830292'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1459884943911830292'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='जनता किस लिए कर देती हैं ? पुछा उच्च न्यायालय ने'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8166725886785557386</id><published>2009-10-29T10:16:00.000-07:00</published><updated>2009-10-29T10:17:04.739-07:00</updated><title type='text'>और कितनी देर ... इन्तेजार कब तक ..?</title><content type='html'>&lt;span style="color: #4c1130;"&gt;जिस देश में 80 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो ,84&amp;nbsp;करोड़ &amp;nbsp;लोग मात्र 20 रूपये में जीवन चलाता हो ,52&amp;nbsp;करोड़ &amp;nbsp;लोग 12 रूपये में ही प्रतिदिन जीवन की&amp;nbsp;गाड़ी&amp;nbsp;चला रहा हो ,उस देश में आदर्श ,न्याय , नैतिकता ,आदी सुनने और देखने को मिलना अपने आप में महान आश्चर्य हैं ,दूसरी और प्रतिदिन एक लाख रूपये की होटल में जनप्रतिनिधि रात गुजारने में खर्च डालते है । देश&amp;nbsp;की&amp;nbsp;राष्ट्रपति&amp;nbsp;&amp;nbsp;474 से भी अधिक कमरों की महलों में रहना ,सुनने में विश्वास नहीं होता .&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #20124d;"&gt;लोक कल्याणकारी योजनाओं में जो भी खर्च किए जाते हैं उसका 90 प्रतिशत लगभग बिचौलिओं के जेब में चला जाता है। गैर बराबरी समाज व्यवस्था कब तक चलेगी ... हालत इतनी&amp;nbsp;बिगड़&amp;nbsp;&amp;nbsp;चूकी हैं कि घर से बाहर निकलने के बाद लौटकर आने की कोई उम्मिद नहीं रहती .......... कौन कहॉ और कैसे लोगों को मौत के घाट उतार दें उसे कोई बता नहीं सकता , कुछ हजार रूपये की&amp;nbsp;सुपाड़ी&amp;nbsp;&amp;nbsp;देकर किसी का भी कत्ल कर देना बहुत आसान हो गया हैं , बच्चों को सुबह पढने के लिए विद्यालय भेजो .....&amp;nbsp;थोड़ी &amp;nbsp;देर में फोन आता हैं ...... रूपये दो नही तो बच्चे की लाश मिलेगी .............. जीवन भर की कमाई को चुपचाप अपहरण कर्ता को देकर बच्चे को वापस लाना होता है। कभी -कभी तो रूपये देने के बाद भी बच्चे नहीं .... लाश भी नहीं ...... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: magenta;"&gt;आतंकवाद ,नक्सलवाद ,आदी से आए दिन&amp;nbsp;सैकड़ों&amp;nbsp;&amp;nbsp;लोग मारे जा रहे हैं ,जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा घेरे में ही कत्लेआम कर दिया जाता है । जो जैसे पाए इस देश को लूटने में ही अपना धर्म समझने लगे हैं , कोई रोक टोक नहीं हैं , न्याय , नियम ,कानूनों से जनता का मोह भंग हो चूका है। ये सब केवल गरीब और कमजोरों को दबाने का काम आता हैं । आज दिन प्रतिदिन हालात&amp;nbsp;बिगड़ना&amp;nbsp;&amp;nbsp;,महंगाई ,कालाबाजारी ,जहर बेचने का धन्धा ,मिलावट खोरी आदी अबाध गति से चल रही हैं ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #274e13;"&gt;अगर गलत परम्पराओं का नाम गिनाने जाउं तो पन्ने भी कम&amp;nbsp;पड़ &amp;nbsp;जाए ..... चंद नर पिशाचों के कारण देश प्रतिदिन गर्त की और अग्रसर हैं ,ऐसे पिशाच मात्र भौतिक संशाधनों पर एकाधिकार जमाने में ही कर्म समझता हैं । इन्हें देश के कानून ,न्याय ,नियमों का काई भय नहीं लगता ,चंद रूपये के लिए अब सब कुछ&amp;nbsp;बिकाऊ&amp;nbsp;&amp;nbsp;हो गया हैं ।&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #4c1130;"&gt;मैं कभी -कभी सोचता&amp;nbsp;हूँ &amp;nbsp;कि आतंकवादी ,नक्सलवादीयों को ये धन पिशाचों को क्या नजर नहीं आता हैं ...?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #4c1130;"&gt;लेकिन इनके कुछ करतूतों से विचार बदल गया है ... खबर तो यहॉं तक हैं कि नक्सली और आतंकवाद को ये धन पिशाच ही पाल पोशकर बढा किया है ,जरूरत के समय वे अपने ही स्वार्थ में इन्हें उपयोग भी करते है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;शहर में रह कर गठबंधन से धंधा भी चलता है ,शासन भी मौन .....&amp;nbsp;क्यूँ&amp;nbsp; ! ...........क्योंकि हिस्सा जो मिलता है । जब चारों ओर से दबाव आ रहा है तो सेना के शरण में पहुँचने&amp;nbsp;&amp;nbsp;की मजबूरी से विदेशी दुश्मनों के लिए&amp;nbsp;खड़े&amp;nbsp;&amp;nbsp;किए गए फौज का उपयोग कर सैकडों बहादूर फौजियों को जानबुझ कर शहीद होने को महबूर करना...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;हम खून की ऑशू बहाकर जी रहे है , पता नहीं ... किसके हाथ ... हमारी भी बारी लिखा हैं ...........&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;कहते है कलम में बहुत ताकत है ..... क्या यह सच हैं&amp;nbsp;--? &amp;nbsp;यदि सच हैं तो हजारों कलमकारों के लिए देश में एक नई दिशा दिलाने में विलम्ब क्यों हो रहा है&amp;nbsp;----? &amp;nbsp;और कितनी देर ... इन्तेजार कब तक ..? &amp;nbsp;क्रमश:..&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8166725886785557386?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8166725886785557386/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8166725886785557386'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8166725886785557386'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html' title='और कितनी देर ... इन्तेजार कब तक ..?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-5440169447749954836</id><published>2009-10-27T12:04:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T20:53:37.347-07:00</updated><title type='text'>इलाहाबाद ब्लोगार सम्मेलन पर एक सशक्त टिप्पनी - हजार पग उद्देश्य  विहीन सक्रियता से ,सौ पग उद्देश्य  के लिए सक्रिय होना अच्छा है ।</title><content type='html'>&lt;span style="color: blue;"&gt;नामवार सिंह जी के मुख्य आतिथ्य में ,राष्ट्रिय&amp;nbsp;&amp;nbsp;ब्लोगर सम्मेलन ,श्री प्रमोद प्रताप सिंह जी जो कि सम्मेलन स्थल इलाहाबाद के ही रहनेवाले होने के पश्चात भी उन्हें न&amp;nbsp;बुलाने&amp;nbsp;&amp;nbsp;की बाते ,सुरेश चिपलुनकर जी के आरोपों का क्रमवार जवाब ..विशेष&amp;nbsp;&amp;nbsp;करके गुजरात के संजय बेगाणी जी और केरल के शास्त्री जी को सम्मेलन में न बुलाने और देश के अन्य ब्लोगारों की उपेक्षा से उपजी एक आक्रोश पर ज्वलन्त बहसों का सिलसिला .........&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;मैं कल और आज अनेक ब्लागों पर भ्रमण किया ,,तथ्यों की तह में जाने का भी प्रयत्न करने के पश्चात एक बात जो मुझे समझमें आया कि ब्लोगरों को भी कुछ लोगों के द्वारा गुटबाजी में बदलने की षडयंत्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;रची&amp;nbsp;&amp;nbsp;जा&amp;nbsp;रही &amp;nbsp;हैं ,एक वर्ग जो इसे हिन्दुत्व वादी गुट में परिवर्तण करना चाहते थे ,जोकि चुक जाने के कारण अन्य एक वर्ग अपनी करनी से सफल हो गए , कौन अच्छा है या कौन बूरा है ,इस पर अभी मैं नहीं जाना&amp;nbsp;&amp;nbsp;चाहता&amp;nbsp;हूँ &amp;nbsp;,परन्तु नामवार सिंह जी अपनी मंशा&amp;nbsp;में &amp;nbsp;कामयाब हो गए यह तो साफ दिख रहा है ... जिस व्यक्ति को जो नहीं जानते थे, इस बहस में उन्हें लोग जानने लग गए है ,कामयाबी का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #274e13;"&gt;यदि तमाम बातों को&amp;nbsp;छोड़कर&amp;nbsp;&amp;nbsp;हम सुरेश जी के आरोप पर जाए कि हिन्दुवादियों का उपेक्षा किया गया है ,इसका अर्थ यह हुआ कि नामवार जी और उनके भक्त हिन्दुवादी नहीं है ,इसका अर्थ और&amp;nbsp;स्पष्ट &amp;nbsp;किया जाए कि वे अहिन्दुवादी विचार धारा के है । यदि अहिन्दुवादी विचारधारा के लोग हिन्दुवादी विचार धारा के लोगों के साथ बैठे तो&amp;nbsp;निश्चित&amp;nbsp;&amp;nbsp;रूप से खिंचातानी शुरू हो जाने के डर से यदि उन्हें न बुलाया गया हो तो उसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #4c1130;"&gt;एक हिन्दु होकर दूसरों की बुराई पर बोलने का कोई हक नहीं है, उसी तरह एक बामपंथी होकर एक दक्षीण पंथी पर कटाक्ष करने का भी उन्हे अधिकार नहीं है ,दोनों मतवादों में जो बूराई है उस पर कबीर दास जी जैसे भक्त ही अपनी&amp;nbsp;&amp;nbsp;मजबूत पक्ष द्वारा समाधान दे सकते है अन्य कदापी नहीं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;एक बात जो मुझे भी अच्छी नहीं लगी वह यह कि&amp;nbsp;राष्ट्रिय &amp;nbsp;सम्मेलन हो रहा हो और देश के अन्य ब्लोगरों को खबर तक नहीं...... इस पर विचार करना आवश्यक हैं ,ताकि इस प्रकार की चूक फिर न हो जाए । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;गुटबाजी से परे हटकर स्वतंत्र लेखन और चिन्तन द्वारा देश सेवा में अपने आप को समर्पित कर देना हमारा लक्ष्य होना चहिए ,लिखने के लिए लिखना ही हमारा&amp;nbsp;उद्देश्य&amp;nbsp;&amp;nbsp;न हो ,आज देश पतन की और लगातार अग्रसर है अत: लेखनी द्वारा ,विचार द्वारा , अन्य माध्यम द्वारा यदि छोटी से छोटी सेवा भी हम कर सकें तो इससे बढकर इस नश्वर जीवन में और&amp;nbsp;क्या &amp;nbsp;उपलब्धी हो सकती हैं&amp;nbsp;? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;हम अपनी जिम्मेदारी को समझे ,कुछ प्रतिक्रियावादी लोग हमेशा लाभ लेने के लिए सदा सक्रिय रहते हैं ,आगे भी इस तरह के लोग रहेंगे ,हमें ही सजग रहना होगा यदि हम ही सजग न रह सकें, तो इस देश को हम कैसे दिशा दिखायेगें ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #274e13;"&gt;हमें किसी की प्रमाण पत्र की आवश्यकता क्यों हैं&amp;nbsp;? हम लिखेंगे और लिखते रहेंगे ,मैंने हिन्दी में जब लिखना शुरू किया तो बहुत अशुद्धियॉं होती थी , ,वर्तनी ,व्यकारण आदी&amp;nbsp;दोष&amp;nbsp;&amp;nbsp;आज भी हैं ,मैंने लिखना बंद नहीं किया, जिन लोगो ने भारत में रहकर भी अंग्रेजीयत पाल रखें है उनसे तो हम लाख&amp;nbsp;गुने&amp;nbsp;&amp;nbsp;अच्छे हैं । एक बहुत अच्छे अहंकार सम्पन्न साहित्यकार से एक कम साहित्यिक जानकार देश सेवक कई गुणा अधिक लाभदायक हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;अन्तिम बातें जो मैं बताना उचित समझता&amp;nbsp;हूँ &amp;nbsp;यह कि हमें हिन्दुवाद ,मुस्लिमवाद ,वामपंथी ,दक्षीण पंथी आदी से परे हटकर आज मानववाद पर ध्यान&amp;nbsp;केन्द्रित&amp;nbsp;&amp;nbsp;करना चाहिए और जो देश रसातल की और जा रही है उसे प्रगति की चरम शिखर पर उठाने का सभी को संकल्प लेकर आगे बढना चाहिए ,हजार पग&amp;nbsp;उद्देश्य&amp;nbsp;&amp;nbsp;विहीन सक्रियता से ,सौ पग&amp;nbsp;उद्देश्य &amp;nbsp;के लिए सक्रिय होना अच्छा है ।&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-5440169447749954836?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/5440169447749954836/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5440169447749954836'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5440169447749954836'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html' title='इलाहाबाद ब्लोगार सम्मेलन पर एक सशक्त टिप्पनी - हजार पग उद्देश्य  विहीन सक्रियता से ,सौ पग उद्देश्य  के लिए सक्रिय होना अच्छा है ।'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8286706898335266322</id><published>2009-10-26T04:03:00.000-07:00</published><updated>2009-10-26T05:33:53.957-07:00</updated><title type='text'>क्रान्ति कोई नफरत और अछुत शब्द नहीं है .....</title><content type='html'>&lt;span style="color: purple;"&gt;वर्तमान&amp;nbsp;परिस्थिति&amp;nbsp;&amp;nbsp;जन्य कारण से आज हम क्रान्ति शब्द से ही डरने लगे है , एक समय था जब क्रान्ति से लोग बहुत प्यार करते थे ,क्रान्तिकारि कहने मात्र से लोगों का मस्तक झुक जाया करता था ,आजादी के समय तो जान जोखिम में डालकर भी&amp;nbsp;क्रांतिकारिओं &amp;nbsp;को&amp;nbsp;मदद&amp;nbsp;के लिए जनता बढ-चढ कर आगे आते रहे है। लोग समझते थे कि क्रान्तिकाररियों का साथ देना एक पवीत्र कार्य हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #4c1130;"&gt;बंकिमचन्द्र द्वारा लिखे गये क्रान्तिकारी साहित्य आनन्द मठ पढने से क्रान्तिकारिओं&amp;nbsp;&amp;nbsp;का चरित्र भी समाज में एक अलग ही&amp;nbsp;प्रतिष्ठा&amp;nbsp;&amp;nbsp;-मान -सम्मान .स्थापित करने में सहयोग साबित हुए ,उच्च नैतिक और चारित्रिक बल से&amp;nbsp;प्रतिष्ठित&amp;nbsp;&amp;nbsp;युवा वर्गों&amp;nbsp;&amp;nbsp;द्वारा परिवर्तणकारी&amp;nbsp;विशेष&amp;nbsp;&amp;nbsp;करके भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने की संकल्प लेकर सर्वस्व न्योछावर कर देने&amp;nbsp;का &amp;nbsp;साहस ही&amp;nbsp;क्रांतिकारिओं &amp;nbsp;का पहचान हुआ करता था ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #351c75;"&gt;एक भी उदाहरण इतिहास में नहीं मिल सकता ,जिससे यह साबित हो सके कि क्रान्तिकारियों ने साधारण जनता पर , नारियों पर , असहायों पर ,जोर जुल्म किया हो , लेकिन आजादी की&amp;nbsp;लड़ाई&amp;nbsp;&amp;nbsp;में एक सक्षम हिस्सेदारी , कर्तब्य आदी का निर्वहन करने के पश्चात भी कुछ स्वार्थी लोगों ने &amp;nbsp;क्रान्तिकारियों को बदनाम करने का&amp;nbsp;षड़यंत्र&amp;nbsp;&amp;nbsp;रचने में कामयाब हो गए ,अहिंसा शब्द को ढाल जैसे प्रयोग करते हुए करोड़ों&amp;nbsp;&amp;nbsp;निर्दोष&amp;nbsp;&amp;nbsp;देशवासीयों का कत्ल हो जाना ,लाखों लडकियों ,महिलाओं पर अत्याचार ,जिस देश के लिए नौजवानों ने खून बहाया उस देश को &amp;nbsp;दो&amp;nbsp;टुकड़ों&amp;nbsp;में बॉट देना आदी कोई सामान्य बात नहीं है , यदि प्रत्यक्ष हिंसक&amp;nbsp;लड़ाई &amp;nbsp;भी होती ,तो भी इतनी बड़ी &amp;nbsp;संख्या में हिंसक घटनाओं का परिणाम करोड़ों का जान माल और अत्याचार नहीं हुआ होता ,आज तक इतिहास को&amp;nbsp;तोड़&amp;nbsp;-मरोड़&amp;nbsp;&amp;nbsp;कर सामने रखने का&amp;nbsp;षड़यंत्र &amp;nbsp;जारी है। । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;मैंने कई बार क्रान्ति शब्द का उपयोगा, कई स्थानों पर, गर्व के साथ किया हैं ,क्रान्ति कोई नफरत और अछुत शब्द नहीं है .....आज इसे जिस रूप में&amp;nbsp;ग्रहण किया जाता है या समझा जाता है उससे भिन्न रूप में हमें इस शब्द का भावार्थ समझना आवश्यक हैं । मै एक उदाहरण दे कर इसे बताने की कोशिस करना चाहता&amp;nbsp;हूँ &amp;nbsp;–&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;नदी यदि धारा बदलकर बहने लगी- तो धारा बदलना&amp;nbsp;ओर फिर &amp;nbsp;बहना-- क्रान्तिकारि कहा जा सकता हैं ,समाज आज जिस दिशा में जा रही है यदि उस दिशा से हटाकर अन्य दिशा की ओर मोढ दिया जाए तो समाज में क्रान्तिकारि परिवर्तण हुआ कहना उचित होगा । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;हर समय परिवर्तण की आवश्यकता होती है ,दुनियॉं में स्थिर कुछ भी नहीं है , सब कुछ चलायमान है ,आज जो कुछ सही लगता है ,कल वही गलत साबित हो सकता है ,विचार में भी परिवर्तण होता रहता है ,आज से&amp;nbsp;वर्षों&amp;nbsp;&amp;nbsp;पूर्व घुसखोरी को कोई अच्छी नजर से नहीं देखते थे&amp;nbsp;वैसे&amp;nbsp;&amp;nbsp;तो आज भी नहीं देखते है ,पूर्व में घुसखोरी भी&amp;nbsp;होती&amp;nbsp;थी ,तो छीपते और डरते हुए ,आज तो यह खुले आम होने&amp;nbsp;लगी &amp;nbsp;है, अत: घुस खोरी में भी क्रान्तिकारि परिवर्तण हुआ हैं ऐसा कहा जा सकता है । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;परिवर्तण का ही नाम क्रान्ति है, परिवर्तण&amp;nbsp; कितनी गति से हो&amp;nbsp;रही&amp;nbsp;हैं ,&amp;nbsp;उस गति को ध्यान में रखते हुए हो सकता है कि कुछ नये शब्द का उपयोग किया जाए , पर भावार्थ वही है जो परिवर्तण के लिए समझा जाता हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;मार काट ,खून खराबा , ही क्रान्ति है इस तरह की विचार कतई उचित नहीं है ,जब समाज के किसी अंग में क्रान्तिकारि परिवर्तण होने&amp;nbsp;लगती&amp;nbsp;&amp;nbsp;है ,तो तीन तरह के लोग उसमें भागिदारी निबहाते है प्रथमत: जो परिवर्तण में प्रत्यक्ष अंश ग्रहण करते है ,द्वितीय वे लोग है जो परिवर्तण का विरोध करते है ,विरोध करने का भी विभिन्न कारण हो सकता है ,कुछ लोग परिवर्तण के कारण प्रभावित होते है ,जैसे यदि अर्थनीति में परिवर्तण हो रहा हो तो अर्थप्रधान लोग उसका विरोध करेंगे ,इस तरह अन्य अनेक कारण हो सकता हैं ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;तिसरी तरह के लोग पक्ष और विपक्ष दोनों से भिन्न होते है उन्हें तो किसी से कोई दिलचस्पी ही नहीं रहता हैं ,ऐसे लोग समाज के लिए अधिक खतरनाक हो&amp;nbsp;सकते हैं ,&amp;nbsp;क्योंकि &amp;nbsp;ऐसे लोग जिधर दम, उधर हम की बातों पर अधिक विश्वास करते हुए सही गलत दोनों को सामान्य मान बैठने के कारण समाज में सन्देहास्पद स्थिति तैयार कर देता है। और सन्देह उत्पन्न होने के करण ऐसे लोग मारे भी जाते है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: magenta;"&gt;परिवर्तण के लिए खून बहाना आवश्यक नहीं है ,विचार क्रान्ति से भी अनेक प्राकार के परिवर्तण सही दिशा में अग्रसर हो सकता हैं ,विचार क्रान्ति के आगे कोई भी&amp;nbsp;शक्ति&amp;nbsp;&amp;nbsp;टिक नही&amp;nbsp;सकती &amp;nbsp;,विचार शब्दों द्वारा उत्पन्न होता है। और शब्द का प्रचार लेखन से आगे बढने के कारण कलम में जो शक्ति है वह तोप तलवार में भी नहीं होने की बाते पूर्व के अनेक साहित्यकारों ने भी स्वीकार किया है ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #b45f06;"&gt;भारतवर्ष&amp;nbsp;&amp;nbsp;में क्रान्ति की आवश्यकता है या नहीं इस पर बहस हो&amp;nbsp;सकती &amp;nbsp;है ,विचार किया जा सकता है ,यदि विचार करने के पश्चात&amp;nbsp; परिवर्तण आवश्यक हो जाए तो उस परिवर्तण की रूप कैसे हो ...किस दिशा मे परिवर्तण की &amp;nbsp;रूख बदलने की आवश्यकता है ,परिवर्तन&amp;nbsp;&amp;nbsp;के समय यदि विरोध हुआ तो उस विरोध का किस तरह सामना किया जाए ,विरोध करने वालों को समझाया जाए या बल प्रयोग द्वारा दबा दिया जाए या उसे रास्ते से ही हटा दिया जाए ... इस तरह अनेक प्रश्न और उत्तर भी अनेक प्राप्त हो सकता है परन्तु एक बात साफ हैं कि परिवर्तण तो परिस्थिति का दास है परिस्थिति ही साधनों को प्रयोग करने का रास्ता बताता है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #660000;"&gt;कोई भी सभ्य समाज खून खराबी का समर्थन नहीं कर सकता ,परन्तु परिस्थिति जन्य अनेक अवसरों पर खून बहाना मजबूरी हो सकता है , यदि अधिकांश परिवर्तण शान्ति पूर्ण ढंग से हो जाए तो क्रान्ति शान्ति पूर्वक सम्पन्न हुआ ऐसा समझना उचित होगा । क्रमश:...........&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8286706898335266322?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8286706898335266322/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8286706898335266322'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8286706898335266322'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html' title='क्रान्ति कोई नफरत और अछुत शब्द नहीं है .....'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-1203882251974799534</id><published>2009-10-22T11:25:00.000-07:00</published><updated>2009-10-22T12:05:46.155-07:00</updated><title type='text'>एक साथ इतनी समस्या ---साथी  हाथ  -----</title><content type='html'>&lt;span style="background-color: #f3f3f3;"&gt;दीपावली &amp;nbsp;के बाद से लगातार मैं लैपटॉप से लड़ता&amp;nbsp; रहा और आज भी लड़&amp;nbsp; रहा हूँ&amp;nbsp; ,पहले तो बेचारा वायरस के चलते बीमार गया&amp;nbsp; गया , पता नहीं एक साथ इतनी&amp;nbsp; वायरस कहाँ&amp;nbsp; से chali &amp;nbsp;आई&amp;nbsp; ,एन टी वायरस लैपटॉप में है, फिर भी काम नहीं आया, आज कल तो हर जगह एक ही बात लागू हो रहा &amp;nbsp;हैं कि फैशन के जमाने में गारंटी की &lt;/span&gt;&lt;span style="background-color: #f3f3f3;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="background-color: #f3f3f3;"&gt;इच्छा न रखे ,अब मैं वायरस के लिए किसके साथ लड़ता&amp;nbsp; ...?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;span style="color: #3d85c6;"&gt;एक साल तक वायरस से कुछ हानी हो तो कंपनी क्षतिपूर्ति करने की बाते लिखी है पर उसके लिए कंपनी पर दावा करो ,कितनी क्षती हुई हैं उसकी जॉच कराने से लेकर उपभोक्ता फोरम ,उससे बात न बने तो वर्षों&amp;nbsp; अदालतों का चक्कर ......नुकसान जो हुआ वह कब मिलेगा उसका तो पता नहीं ----पर कानूनी दॉव पेंच के लिए वकील रखो ,दावा रकम का दस प्रतिशत फीस जमा करने के अलावा अपना खून भी जलाते रहो ............यही सब न्याय पाने का माध्यम हैं .............इससे अच्छा चुपचाप बैठे रहो ....रोते रहो ......और व्यवस्था को कोसते रहो ............ अधिक हुआ तो एक आध लेख के माध्यम से भड़ास&amp;nbsp; निकाल कर चैन से बैठना ज्यादा अच्छा &amp;nbsp;है ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;वायरस से कुछ फाईल नष्ट&amp;nbsp; हो गयी&amp;nbsp; , उसे फिर कब तक बना पाउंगा पता नहीं ,मेरे कष्ट&amp;nbsp; देखकर लड़का&amp;nbsp; भी दु:खी होकर कहने लगे कि क्या फालतू की चिजों से आप जुझ रहे है ,ब्लाग में लिख कर कभी देश में क्रान्ति आ सकती है क्या ....! ऑंखे खराब होना ,रात की नींद गायब.. &amp;nbsp;न जाने कितनी बाते से&amp;nbsp; मुझे समझाने की कोशिस करते हुए ,कुछ मद्द भी किया ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #674ea7;"&gt;नेट तो एक दम धीमी हो गई , गूगल का नया क्रोम लोड करने से सचमूच &amp;nbsp;नेट में जान आ गया , नेट खोला ही था&amp;nbsp; कि अचानक वर्चूल मेमोरी कम होने की सूचना से मैं परेशान हो गया , ये वर्चुल&amp;nbsp; मेमोरी की बातें तो मेरे सर के उपर से चला गया ,पर लड़का&amp;nbsp; को &amp;nbsp;समझमें आने से मेमोरी बढाने का भी रास्ता निकालकर मुझे एक बड़ी&amp;nbsp; समस्या से मुक्त कर दिया ....नही तो आज मै इस लेखनी को पूरा नहीं कर सकता था ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;मैने सोचा कि ब्लोग के हेडार में कुछ नए चित्र लगा दूं ,इस चक्कर में ब्लोग ही गायब हो गया ,दुबारा लोड किया तो नया सन्देश तो अंग्रेजी से हिन्दी में परिवर्तण हो जाता है &amp;nbsp;पर शीर्षक&amp;nbsp; का अनुवाद हिन्दी में आज भी नहीं हो पा रहा है ,जबकि सन्देश और शीर्षक&amp;nbsp; पूर्व में हिन्दी अनुवाद सरलता से हो जाता था ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;टेम्ल्पेट नया लग जाने से हैडर पर मेर चित्र के माथे में मेरे विचार हटाकर कुछ सामने लाना चाहता था ,पर उसे आज तक नहीं कर पाया । हैडर में अन्य चित्र कैसे लगाया जाए और सरलता से चित्रों को कैसे पोस्ट में प्रयोग किया जाए यह बता कर मुझे मद्द करने का कष्ट&amp;nbsp; करें ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #666666;"&gt;नेट पर अनेक टेम्प्लेट उपलब्ध हैं मुझे तीन भाग वाला टेम्प्लेट अधिक पसन्द हैं और हैडर कुछ चौड़ी हो तो बहुत ही अच्छा, कुछ मैंने चुना भी था पर उसे किसी भी हालत में ब्लोग में नहीं जोड सका .............मैंने एडसेन्स को भी ब्लोग में रखना उचित समझा ... पर ऐसा नहीं कर पाया ...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: purple;"&gt;पिछले समय&amp;nbsp;&lt;span style="-webkit-border-horizontal-spacing: 2px; -webkit-border-vertical-spacing: 2px; font-family: Arial; white-space: pre;"&gt;&lt;span style="-webkit-border-horizontal-spacing: 0px; -webkit-border-vertical-spacing: 0px; font-family: 'Times New Roman'; white-space: normal;"&gt;मैंने हिन्दी पर कुछ सुझाव मांगा था ,उस समय &amp;nbsp;एक नहीं अनेक हाथ मद्द के लिए उठे थे&amp;nbsp;&lt;span style="-webkit-border-horizontal-spacing: 2px; -webkit-border-vertical-spacing: 2px; font-family: Arial; white-space: pre;"&gt;   &lt;span style="-webkit-border-horizontal-spacing: 0px; -webkit-border-vertical-spacing: 0px; font-family: 'Times New Roman'; white-space: normal;"&gt;...आज भी साथी हाथ&amp;nbsp;बढाना&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="font-family: 'Kruti Dev 714'; font-size: 14pt;"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="font-family: 'Kruti Dev 714'; font-size: 14pt;"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="font-family: 'Kruti Dev 714'; font-size: 14pt;"&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-1203882251974799534?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/1203882251974799534/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_22.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1203882251974799534'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1203882251974799534'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_22.html' title='एक साथ इतनी समस्या ---साथी  हाथ  -----'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4138398823821088798</id><published>2009-10-16T23:34:00.000-07:00</published><updated>2009-10-16T23:50:07.276-07:00</updated><title type='text'>दीपवली में बचत ही धन की बरकत हैं --नहीं तो कंगाली</title><content type='html'>&lt;span style="color:#660000;"&gt;आस्थाओं का दोहन हजारों वर्षों से चली आ रही है ,हम चन्द्रमॉं –मंगल –आदी ग्रहों की बातें करते है परन्तु हजारों वर्षों से जो विज्ञापण द्वारा मानसीक जड़ता पैदा किया गया हैं , उन जड़ताओं पर कुठाराघात करने में हम भयभीत हो जाते है । पूजा -पाठ से क्या आज तक किसी की गरिबी हटी है ....? हजारों वर्षों तक पिढी दर पिढी पूजा अर्चना करने वालों को तो गरिब होने की सवाल ही पैदा नहीं होना चाहिए था ,लेकिन उनकी गरिबी क्यों नहीं हटी ----???????&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;देश में जितने प्रकार के त्यौहार आज प्रचलित है ,और नए -नए त्यौहार भी चलाकी से बाजार में बिक्री हेतु पेश किया जा रहा है .... चलाक व्यपारी अपने घर में लक्ष्मी को बॉंधकर रखने के लिए एक से एक नियम समाज में विज्ञापित किया हैं , सॉठगॉठ करके हजारों सालों से मानसीक और आर्थिक शोषण का सिलसिला जारी है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;वैश्य और तथाकथित ब्रह्मणों ने मिलकर समाज से अधिकाधिक लाभ उठाने की पुरजोर कोशिस में आज भी कामयाब हैं । यदि दिपावली में लक्ष्मी किसी के पास आती है तो ये दोनों वर्गो के पास ही स्पष्ट रूप से दिखता हैं ,आज पूजापाठ के नाम पर धर्म के ठेकेदार -और दलालों को लक्ष्मीजी वरदान देगी , बनिये तो धनतेरस के नाम से लोगों को जिस तहर से लूटा हैं वह सुधी जनों से छिपा नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc33cc;"&gt;लक्ष्मी पूजन करने के लिए जिस विधान आदी प्रचलित की गई हैं उसकी पुर्ति के लिए सिधे बनिये और तथाकथित ब्राह्मणों के पास ही रकम लेकर जाना होता है। जिसके पास रकम एकत्रित हो रहा है वे धनवान और उनके पास लक्ष्मी का वास होगा ..... या जिसके घर से लक्ष्मी बाहर जा रही हैं उसके पास लक्ष्मी रहेगी .....? हर त्यौहारों की छुपी हुई राज पैसा कमाने का होड हैं , हम समझते है कि यह धार्मिक कार्य हैं, इसे नहीं करने से हम कंगाल हो जाऐंगे , जबकि इस भय से हम लगातार कंगाल होते जा रहे है, इस बात को स्पष्ट रूप से हमें समझना होंगा । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#330000;"&gt;लक्ष्मी पूजन वही हैं जहॉं धन एकत्रित हो ,,,,फटाका फोड़कर धन की बरबादी से लक्ष्मी कहॉं से आयेगी ---? दिपावली के रात जुआ खेला जाएगा , पूजापाठ करों और प्रसाद --पकवान अधिक खाकर पेट खराब करके डाक्टरों के पास भागो ......जुआ खेलो ...शराब पिओ ओर पिलाओं ...ऐसे अनेक प्रकार के विधाओं से धन की बरबादी होती हैं ,अत: धन की बरबादी रोकना ही लक्ष्मी जी का बरकत हैं ..................&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;बिजली विभाग का एक नारा हैं कि बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन हैं ,इसलिए धन की बचत ही धन की उत्पादन हैं । सीधी सी बात भी लोगों को समझमे न आवे तो चुल्लु भर पानी में मर जाना अच्छा हैं । पूजा पाठ ,टोटका ,तांत्रिक क्रिया ,आदी से लक्ष्मी खुश नहीं होते ....लक्ष्मी चंचला हैं उसे रोकने के लिए धन की बरबादी को रोकना अतिआवश्यक हैं । &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4138398823821088798?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4138398823821088798/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_2503.html#comment-form' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4138398823821088798'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4138398823821088798'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_2503.html' title='दीपवली में बचत ही धन की बरकत हैं --नहीं तो कंगाली'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8410994495778450207</id><published>2009-10-16T11:36:00.000-07:00</published><updated>2009-10-23T22:53:59.013-07:00</updated><title type='text'>दीपावली पर पवित्र भाव से मन और समाज को प्रकाशित करने वालों को शुभकामना-पर्यावरण के दुश्मनों को अशुभकामना</title><content type='html'>&lt;span style="color: #990000;"&gt;दिपावली आज धूल.धूर्त और धूओं का त्यौहार बन कर रह गया हैं ,जो जितनी कानफोडू आवाज के साथ फटाका फोडेंगे और वायु प्रदुषण से देश के जन जीवन को बरबाद करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहेंगे- वे उतने ही बड़े दिपावली हिरो कहलाएगा ,अरबों की कमाई वाली दिपावाली में जिनके पास लक्ष्मी जाना हैं वह तो कल धनतेरस के दिन ही जा चुकी हैं ,बाकी वे लक्ष्मी पुत्र पर्यावरण और जन जीवन के बारे में सोचते हुए असली मजा क्यों किरकिरा करें ............&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ff6600;"&gt;कितने लोगों का कान का पर्दा फटेगा उसका तो गिनती नहीं है ,कई बच्चे जवान और लोग अपंग और स्वर्गवासी हो जाएँगे उसका भी सही पता भी लोगों को नहीं लगेगा ,मानसीक रूप से कमजोर लोग तो कल पागल की तरह उग्र हो जाऐगे क्योंकि उन्हें अधिक आवाज सहन नहीं होगा ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;दिपावली वर्तमान समय में द्वीपों का त्यौहार को फटाकों का त्यौहार कहें तो ज्यादा उपयुक्त होगा ,&lt;br /&gt;मैं एक बार फिर धर्म संकट में पड़ गया हूँ ... मेरे चाहने वाले और न चाहने वालों को इस पर्व के लिए शुभकामना प्रेषित करूं कि नहीं ......... यदि पवित्र भावनाओं से मन और समाज को प्रकाशित करने के लिए यह त्यौहार मनाया जाए तो सभी को मेरी शुभकामना और पर्यावरण के दुश्मनों को अशुभकामना..........&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8410994495778450207?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8410994495778450207/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_9146.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8410994495778450207'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8410994495778450207'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_9146.html' title='दीपावली पर पवित्र भाव से मन और समाज को प्रकाशित करने वालों को शुभकामना-पर्यावरण के दुश्मनों को अशुभकामना'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7129800035220449512</id><published>2009-10-16T01:47:00.000-07:00</published><updated>2009-10-16T01:47:51.093-07:00</updated><title type='text'>राजतन्त्र: ईमानदार एएसपी ने मारा मंत्री के मुंह पर इस्तीफा</title><content type='html'>&lt;a href="http://rajtantr.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html"&gt;राजतन्त्र: ईमानदार एएसपी ने मारा मंत्री के मुंह पर इस्तीफा&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7129800035220449512?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://rajtantr.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html' title='राजतन्त्र: ईमानदार एएसपी ने मारा मंत्री के मुंह पर इस्तीफा'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7129800035220449512/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7129800035220449512'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7129800035220449512'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html' title='राजतन्त्र: ईमानदार एएसपी ने मारा मंत्री के मुंह पर इस्तीफा'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-2594039678313275046</id><published>2009-10-14T21:55:00.000-07:00</published><updated>2009-10-14T22:59:50.523-07:00</updated><title type='text'>मोहन लाल गुप्ताजी के आलेख पर --देश के नैतिकवानों एक हो</title><content type='html'>&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;कल ही मोहन लाल गुप्ता जी के आलेख पढने का मौका मिला ,मुझे बहुत अच्छा लगने के साथ ही साथ यह भी सोचने के लीए &lt;/span&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;मजबूर कर दिया हैं कि क्या वास्तव में हम एक अराजकता की और एक दो कदम नहीं, परन्तु अनेक कदम बढा लिए हैं ? और उस कदम को आज पिछे लाने का कोई उपाय शेष नहीं रह गया है ..?&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;मैंने भी मेरे अनेक आलेखों के माध्यम से यही बात समाज के सामने रखने का प्रयत्न किया कि प्रतिभा ..सम्मान आदी मेरे देश की किस काम की है ....यदि उस प्रतिभा का लाभ मेरे देश को न मिले ! बड़े -बड़े धनवान लोगों से मेरे देश का क्या भला होने को हैं ...... शासन को उनके द्वारा कमाया हुआ रकम का कुछ हिस्सा जरूर मिल जाता है ,चुनाव के समय उन्हें चंदा मिल जाती हैं ,नाम मात्र के कुछ कर लाभ भी हो जाता है। बच्चों को उंची बेतन में नौकरी का लाभ प्राप्त होने के अलावा भी एक लाभ जो सुरा और सुन्दरियों पर समाप्त होकर आगे गुलामी सा नारकिया जीवन ....................&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc33cc;"&gt;मोहन लाल गुप्ता ने इतिहास से अनेक उदारण देकर यह समझाने का प्रयत्न किया कि कोई प्रतिभाशाली व्यक्ति देशभक्त होगा यह जरूरी नहीं हैं और कम प्रतिभाशाली व्यक्ति यदि देशभक्त हैं तो देश के लिए अधिक उपयोगी हो सकता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc33cc;"&gt;गुप्ता जी ! एक कदम आगे बढते हुए मैं तो यह कहना ज्यादा उपयुक्त समझता हूँ कि प्रतिभावान व्यक्ति ही इस देश के लिए अधिक खतरनाक है । अपवाद शब्द का उपयोग इसलिए कर रहा हूँ ताकि कोई दावा करें कि मुझमें प्रतिभा हैं परन्तु मैं देशभक्त हूँ ,ऐसे लोगों के लिए यह शब्द रखना जरूरी है ।&lt;br /&gt;हमें आज अधिक प्रतिभावानों की आवश्यकता नहीं है ,कलेक्टर बनने के लिए आई ए एस जैसे प्रतियोगिता से अच्छा हैं कि गुप्त रूप से पता लगाना ज्यादा उपयुक्त होगा कि कौन इमानदार और देशभक्त है , हर शहर और गॉव में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो जनसेवा में इमानदारी से हमेशा सक्रिय रहते हैं ऐसे लोगा भले कम पढा लिखा हो उन्हें प्रशिक्षण देकर जिम्मेदारी दिया जा सकता हैं आज के सफेद हाथी पालने की अपेक्षा यह रास्ता मुझे अच्छा लगता है ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;अब यह बात तो स्पष्ट हैं कि हमारे व्यवस्था में ही कहीं खामियॉं आ गई हैं, जिसके चलते समाज में जिसे सम्मान मिलना चाहिए उन्हें सम्मान नहीं मिलता और जिन्हें बहिष्कार करना चाहिए उन्हें सम्मान दिया जा रहा हैं । सबसे पहले तो मानसीक रूप से हमें तैयारी करनी हैं कि हम लेखनी द्वारा समाज को अब जगाने का काम करने के साथ ही साथ इमानदार लोगों को एकत्रित करने के लिए एक मुहिम छेड़ा जाए ,यह आज वर्तमान समय के लिए एक पवीत्र कार्य होगा ................... मैं इस प्रकार के मुहिम में तन -मन -धन से सहयोग करूंगा । देश के नैतिकवानों ------------------&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-2594039678313275046?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/2594039678313275046/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2594039678313275046'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2594039678313275046'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html' title='मोहन लाल गुप्ताजी के आलेख पर --देश के नैतिकवानों एक हो'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-35290550562262169</id><published>2009-10-12T23:56:00.000-07:00</published><updated>2009-10-13T00:10:05.274-07:00</updated><title type='text'>प्राकृतिक संशाधनों की लुट में सबको हिस्सा चाहिए ---</title><content type='html'>&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;नियम-कानूनों का हवाला देकर  प्राकृतिक संशाधनों को लूटने की छुट सरकार दे रही हैं । इस लूट में क्या सरकार  भी भागीदार नहीं है.....? हजारों एकड़ों में सेज के नाम पर  जल... जमिन और जंगलों का सफाया कर अमीरों को लूटने की खूली छुट दिया जा रहा हैं । एक पेड़  काटने पर वन विभाग जुमार्ना करती हैं ,गरिबों पर मामला दर्ज कर जेल में ढूंस देती हैं और कानूनी रूप से जनसुनवाई और अन्य बहाने हजारों एकड़  भूमि को बंजर बनने का कोई दोषी  नहीं है ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;प्राकृतिक संशाधनों का लाभ सभी को मिलना चाहिए , मैं नहीं कहता कि समान रूप से सभी को लाभ दिया जाय ,पर लाभ का हिस्सा तो सबको मिलना ही चाहिए ,यदि प्राकृतिक संशाधनों को सरकार नाश करने को तुली हुई हैं तो उस नाश का तात्कालिक लाभ से गरिबों को क्यों अलग रखा जा रहा हैं ?&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;जंगलों को काटने की खूली छुट गरिबों को मिलना चाहिए ...कोयले खदानों से कोयला निकालने की  भी छुट सबको होना चाहिए , मात्र मुठि्ठ भर लोग लाभ ले और अन्य लोग ताकते रहे-- यह कैसे सम्भव हैं ....? वन विभाग का काम मात्र यह हो कि नए नए स्थान में जंगल विकसित करें और आगे बढते जाए ...उसका उपयोग जो जैसे चाहे वैसे करते रहे इस पर कोई रोक टोक नहीं होना चहिए ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;देश के सभी खनिज सम्पदाओं को यदि निजी हाथों में दे कर कुछ लोगों के आड़  में जब सरकार में बैठे लोग उसका उपयोग कर धनी बन रहे हैं ,तो गरिब को भी धनी बनने का हक तो हैं ........1 रूपया या 2 रूपये किलो चावल और नमक मुफत में बॉट कर इस देश की गरिबी नहीं हट सकती ,इससे तो लोग अलाल और नपुंशक होते जा रहे हैं ,देश के कुछ धन पिशाचों को तो इस तरह की स्थिति वरदान साबित हो रहा हैं ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc33cc;"&gt;जब लूट लगी हैं तो सबको लूटने दो ........... लूटने के लिए कोई कानुन नहीं होना चाहिए ,जिसकी लाठी उसकी भैस वाली बात जब फिर वापस आने को हैं तो आने दो .........बंद कर दो सारी व्यवस्था ..... कानुन ..नियम ..... अराजक राज जब शुरू  हो चुकी हैं तो कब तक आग को कागज से ढंक कर रखने का नाटक किया जाएगा ...? असफल सरकार ..... नपुंशक समाज ............ अनैतिक नेताओं से अब किसको क्या उम्मिद बची हैं ...............?&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-35290550562262169?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/35290550562262169/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_1941.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/35290550562262169'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/35290550562262169'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_1941.html' title='प्राकृतिक संशाधनों की लुट में सबको हिस्सा चाहिए ---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-2423803627309662363</id><published>2009-10-12T10:17:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T10:33:37.027-07:00</updated><title type='text'>मैं घोर राष्ट्रवादी हूँ विश्वबन्धुत्व का दुश्मन --कुपमन्दुक---</title><content type='html'>मैं एक घोर राष्ट्रवादी हूँ  ....  मुझे दुनियॉ के हर चीज  वैसा नहीं दिखता जैसा वह हैं ,दिखने की.. और होने के बीच में एक सरल रेखा न चाहते हुए भी बार -बार खींचता चला जाता  हूँ   , आज तो मुझे मेरे देश के सिवाय कुछ दिखता ही नहीं है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं अप्रवासी भारतीयों को मिलने वाली सम्मान भी कोई अच्छी नजर से नहीं देख पाता .........पिछले समय दुनियॉं में तहलका मचाने वाले भारतीय मूल के अमर्त सेन जी को नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ, अर्थशास्त्र के महान विद्वान .... कल्याण कारी अर्थशास्त्र के चिन्तक ....जरा सोचने की बात हैं कि  इस प्रकार के पुरस्कार से मेरे देश को क्या मिला ? यही न कि सेन जी कभी भारतीय थे ..... और भारत में उनके जैसे विद्वानों का सम्मान न मिलने के कारण देश छोडकर विदेश चले गए...?&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;भु पू राष्ट्रपति  कलाम जी को भी अनेक बार विदेश जाने और डालरों का लोभ दिया गया, विशेष  कर अमेरिका से ............ परन्तु कलाम जी ने देश प्रेम और कर्तव्य बोध से प्रेरीत होकर देश सेवा को सर्वोपरि मानते हुए डालरों का लोभ त्याग कर ,भारत वर्ष  में ही रहना पसन्द किया ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री स्वराज पाल को इंग्लैण्ड में लार्ड पाल कहते हैं ..... उससे मुझे और मेरे देश को क्या फायदा ...? आप बड़े तोप खान है ,आरबों से खेलते  हैं ....बड़े  -बड़े महलों में रात गुजारते हैं, और वहॉं से देश के लिए घडियाली ऑंसू बहाते हैं ........... यह हैं प्रवासी भारतीय ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जरा लक्ष्मी मित्तल जी पर नजर डालना आवश्यक हैं ॥ एक   पत्रकार ने पुछा कि- वीलगेट ने अपना सारा सम्पत्ति गरीब दु:खियों में बॉंटकर समाज सेवा में व्यास्त हो गये हैं ,क्या आप भी वैसा करना चाहते हैं ? जवाब मिला कि अभी तो मुझे बहुत आगे बढना हैं ...बहुत कमाना है ....आगे सुनिए ......जब पूछा गया कि आप  भारत में रहना  पसन्द करेंगे ?  उन्होंने जबाव दिया कि भारत के लोग अमीर लोगों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखते हैं अत: यहॉं आना पसन्द नहीं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हम हैं कि ऐसे लोगों को देख कर अपने आप को गर्व महशुस करते हैं ......... धन पिशाचों पर गर्व करना छोडकर हमें अपने आप को इमानदारी पूर्वक भारतीयता के आधार पर देश को स्थापित करना होगा ,तभी हम जीने और गर्व करने लायक बन सकेंगे ............&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे अपने आप को राष्ट्रवादी  कहने में कोई झिझक नहीं है ............ लोग विश्ववादी कहते हुए गर्व करते हैं और आज मेरे जैसे लोग आपने आप को राष्ट्रवादी  कह कर अधिकांश लोगों को आलोचना करने की खुली छुट देने को तैयार हैं ........... कहिए मैं कुपमण्डुक हूँ  ........ संकुचित विचार का हूँ  ..... विश्वबन्धुत्व का दुश्मन हूँ  ..............गाली भी दिजीए ..................... पर एक बात याद रखिए  कि- इस देश को यदि आगे ले जाना हैं तो घोर राष्ट्रवाद  के रास्ते से ही जाना होगा ........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-2423803627309662363?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/2423803627309662363/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2423803627309662363'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2423803627309662363'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html' title='मैं घोर राष्ट्रवादी हूँ विश्वबन्धुत्व का दुश्मन --कुपमन्दुक---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-2499308395172240311</id><published>2009-10-11T11:16:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T13:02:58.686-07:00</updated><title type='text'>मत सम्प्रदाय हिंदू -मुस्लिम जी का जंजाल --धर्म कहाँ ---?</title><content type='html'>धर्म पर ब्लोगर बन्धुओं के बीच एक जोरदार बहस चल निकला हैं , बहुत दिनों से बड़े-छोटे सभी ब्लोगर इस बहस में भाग लेते देख मैंने भी सोचा कि इस विषय से स्वयं को अलग रखना कतई उचित नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धर्म पर एक विस्तृत पोस्ट मेरे लेखों में पूर्व से सम्मिलित हैं ,इस पोस्ट के बाद यदि जिज्ञासु रूची लेकर पूर्व लेख पढ़ने में कुछ समय निकाले तो हो सकता हैं कुछ नई बात सामने आ सकें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस विचार शुरू करने के पहले मैं विषयान्तर्गत कुछ बातें लिखना आवश्यक समझता हूँ कि- मैं एक ईश्वरीय सत्ता पर विस्वास करता हूँ ,परन्तु न मैं अपने आप को हिन्दु ,न मुस्लिम ,न इसाई ,न जैन ,और न ही अन्य कोई मतवादों से बॉंधना चाहता हूँ ,आज अपवाद को छोडकर एक भी मत मानवता के सिद्धान्त पर खरे नहीं उतरने के कारण मैं यह भी मानता हूं कि आज हिन्दु कहलाने वाले मात्र अपने आप को हिन्दु ही कहते है ,मुस्लिम भी कहने के लिए मुस्लिम है, इसाई भी नाम मात्र के इसाई है ,जैन भी वेसे ही और सिख भी वैसी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दुनियॉं में जितने भी मत हैं या सम्प्रदाय हैं जिसे मजहब भी कह सकते है ,किसी में भी कोई कमी मुझे नहीं दिखता है ,एक मुस्लिम मत कहता है कि यदि हाथ गलत कार्य में लिप्त हो तो उसे काट देना चाहिए ,यदि ऑख गलत चीजों पर आकृष्ट हो तो ऑंख फोड़ देना चाहिए ,मात्र दो पर ही विचार करें तो साफ हो जाता हैं कि मनुष्य जन्म अच्छाई के लिए मिला हैं ,गलत कार्य करने और करवाने के लिए नहीं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या मुस्लिम उक्त बातों को व्यवहारिक जीवन में लागू करते हैं ? मुस्लिम भाई यदि उक्त बातों को जीवन में नहीं उतार सके, तो वे किस बात के लिए दावा करते हैं कि मैं मुस्लिम हूं ?&lt;br /&gt;कुरान में तो कमजोरों को मदद करने की बाते लिखी हैं , ज़कार्ता की बाते है ,अपनी आय के एक अंश जरूरत मंद लोगों को बॉटने की बाते साफ लिखा हुआ हैं ,कितने मुस्लिम भाई इमान पर कायम हैं ? दु:ख तो तब अधिक होता है जब जिस देश का खाया जाता हैं, उसी देश के खिलाफ षडयंत्र रचते हुए दुश्मनों को मदद करते हुए मुस्लिम भाई पकड़े जाते है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं नहीं कहता कि मुस्लिम देश भक्त नहीं होते ,मैं तो मात्र यह कहना चाहता हूँ कि ५ बार नमाज अदा करने मात्र से कोई मुस्लिम नहीं हो जाते है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जरा हिन्दुओं पर विचार किया जाए तो पता लगता हैं कि भारत वर्ष में मुझे खोजने पर भी हिन्दु नजर नहीं आते , मंदिरों  में माथा टेकने से और पूजा पाठ में लिप्त रहकर, बड़ा सा टिका माथे में लगा लेने से कोई हिन्दु नहीं हो जाता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिन्दुओं में जाति व्यवस्था तो एक नासूर बन चुका हैं ,देश के धर्म के नाम पर ठेकेदारी चलाने वाले इस प्रथा को जड़ से खत्म क्यों नहीं करते ? इस देश में तो स्वयभू भगवानों की कमी नहीं हैं ,ऐसे भगवान देश में हो रहे मानव-मानव का नफरत देख कर मात्र बयान बाजी करने के सिवाय अन्य कुछ भी करने में क्यों हिचकते हैं ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं एक बहुत ही कटु उदाहरण देना चाहता हूँ ....महानायक अमिताभ बच्चन को दुनियॉं में अधिकांश लोग पहचानते हैं ,अभी ६७ वर्ष के उम्र में भी पर्दे पर कुछ भी करते हुए नजर आ जाते है , पैसे के लिए कुछ भी करेगा वाली बात तो बच्चन जी में आज एक दम सठीक बैठ रहा हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिन्दु मत में एक आश्रम व्यावस्था की बात लिखी हुई है ,५ वर्ष से २५ वर्ष तक व्रह्मचार्य,२६ से ५० वर्ष की उम्र तक गृहस्थाश्रम ,५१ से ७५ तक वाणप्रस्थाश्रम ,और ७६ से सन्यास आश्रम की प्रावधान हैं ,क्या बच्चन ही वाणप्रस्थ आश्रम के नियम को पालन कर रहे है ? यदि नही तो वे हिन्दु कैसे हो सकते हैं ? नियमों को पालन नहीं करेंगे ,लेकिन अपने आप को हिन्दु कहेंगें ,वाह भाई .....&lt;br /&gt;मैने बच्चन जी का मात्र उदाहरण दिया हैं  ,ऐसे तो एक ढुढों तो सौ मिल जाऐंगे ,किसका किसका नाम गिनाता रहूँ ? राजनीति में तो भरमार है ............&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैन मत में अपरिग्रह की नीति तो मुझे बहुत अच्छी लगती है ,छात्र जीवन में जैन दर्शन से मै प्रभावित भी था, लेकिन आगे चल कर जैनियों का हालत देख कर मुझे तो रोना आता हैं ....... अहिंसा ,सत्य,आस्तेय ,ब्रम्हचार्य ,अपरिग्रह नीति, मन-कर्म और वाचा से पालन करने की बातें लिखी हुई हैं ,किन्तु कितने लोग इसे पालन करते है ? जो पालन करते हैं वे जैनि हैं, जो जितेन्द्रिय हैं, वे जैनि और जो नहीं हैं वे कैसे जैनी हो सकते हैं ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसाईयों की नीति जरा सुनिये ...प्रेम से दुनियॉं जितने की बाते किया गया हैं ,प्रेम करने वालों को स्वर्ग मिलेगा ,ईसामसिह को सूली पर चढाने के बाद भी वे कहते रहे कि- हे ईश्वर इन्हें माफ कर देना ,ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं ...&lt;br /&gt;लेकिन आज बाईबिल को कितने लोग मानते है ? दुनियॉं में जहॉं -जहॉं भूखमरी ,गरिबी हैं वहॉं जाकर ये लोग सेवा के नाम पर ईसाइ बनाने में अपना प्रधान फर्ज समझते है। भारत वर्ष में तो आए दिन आदिवासी और चर्च के बीच में लड़ाई की खबरे आम बात हो गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब सोचने वाली बात यह है कि क्या बाईबिल में जरूरत मंद लोगों को ईसाइ बनाने की बाते लिखी हुई हैं ? मैंने जहॉं तक समझा और पढा हैं ...ऐसा कहीं भी लिखा नहीं मिलेगा , फिर चर्च में जाकर प्रार्थना करने मात्र से मैं ऐसे लोगों को ईसाइ कैसे मान लूँ ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिक्ख भाईयों को पंच "क" कार धारण करने की इजाजत हैं , इसका अर्थ यह हुआ कि सनातन धर्म पर यदि विपत्ति आती है , तो हमेशा रक्षा करने को तैयार रहना । कितने सिक्ख इस बात से इन्कार कर सकते है ? मैं समझता हूँ कि एक भी शायद ही मिलेगें ,क्या आज सनातन धर्म पर विपत्ति की स्थिति नहीं हैं ? चारों ओर हाहाकर मची हुई नहीं हैं ? जाति के नाम पर यहॉं मार काट होती हैं ,हरिजन स्त्रीयों की ईज्जत तो मानों खिलौना है ,गरिबी ,भूखमरी ,बेरोजगारी आदी क्या सनातन धर्म को रसातल नहीं ले जा रही है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उक्त स्थितियों को देखते हुए भी अत्याचारियों के खिलाफ म्यान से तलवार कयों नहीं निकलती ? क्या सामने विपत्ति देखकर भी चुपचाप सहने वालों को सिक्ख कहा जा सकता है ?&lt;br /&gt;तमाम मत साम्प्रदाय कभी धर्म नहीं हो सकता है । धर्म मात्र एक है ,मानवता के नाते जो भी गुण लोगों में होना चाहिए वे सभी गुण ही धर्म है । और सभी गुणी जनों को ही धार्मिक कहलाने योग्य हैं ।&lt;br /&gt;दया ,माया,क्षमा ,अपरिग्रह ,सत्य, सेवा ,त्याग ,आदी मानवोचित गुणों को धारण करते हुए ईश्वर की समर्पित भाव से आराधना और आडम्बर रहित प्रार्थना द्वारा उन्हें अनुभव करने का ही नाम धर्म कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उक्त गुणों को सिखने के लिए किसी दलाल की आवश्यकता नहीं हैं , हॉं यदि उच्च ज्ञानी और गुणी से कभी दर्शन हो जाए तो उपदेशों का पालन करने में कोई हर्ज भी नहीं है ,परन्तु आज तो विरले ही मिलेंगें ...........मत -संप्रदाय जी का जंजाल --धर्म कहाँ --?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-2499308395172240311?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/2499308395172240311/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_11.html#comment-form' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2499308395172240311'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2499308395172240311'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_11.html' title='मत सम्प्रदाय हिंदू -मुस्लिम जी का जंजाल --धर्म कहाँ ---?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8258628480621472263</id><published>2009-10-04T11:03:00.000-07:00</published><updated>2009-10-04T11:27:45.174-07:00</updated><title type='text'>अब बाबा रामदेव और राजीव दिक्षित स्काटलैंड के टापू से दुनियाँ में क्रांति करेंगे !--2</title><content type='html'>3 अक्टूबर 2009 को जब मैंने रामदेव बाबा पर कुछ लिखना चाहा तो एक बार नहीं अनेक बार सोचता रहा कि क्या मुझे ऐसा  करना चाहिए ..... देश में भ्रष्ट बाबा लोगों से तो रामदेव जी बहुत अच्छे कार्य कर रहे हैं । फिर भी लिखने का साहस किया ,क्योंकि दूध का जला छॉछ  को भी फूंक फूंक  कर पीता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत भूमि हमेशा त्याग की बुनियादी शिक्षा देता आया हैं ,यहॉं त्यागी और भोगी का परिभाषा ही अलग हैं । जो भोगी हैं वह कभी योगी नहीं बन सकते ,भौतिक साधनों के प्रति आकर्षित  योगी को पथभ्रष्ट  योगी के रूप में देखकर  कष्ट  होना स्वभाविक है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंने सोचा था कि पता नहीं इस मुद्दे पर मुझे क्या -क्या आलोचना का सामना करना पड़ेगा  ....एक दो बन्धु ने जरूर यह लिखने का प्रयास किया कि रामदेव बाबा ऐसे कार्य कर रहे हैं जिससे अनेक कार्पोरेट जगत के आउटलेट घाटे में चल रहा  है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;``समय´´ने कहा कि तथा कथित पैरोकारों को पर्दे के पीछे के ऐसे खेलते देखना सामान्य बात है । इस टिप्पनी से साफ हो जाता है कि मेरे जैसे बहुत लोग होंगे जो बाबाओं के खेल से पहले से परिचित हैं ,राजीव तनेता जी --ने तो कहा कि ऐसे लोगों के खाने के दॉंत और होते है। और दिखाने के और ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुरेश चिपलूनकर ने कहा कि-- मुझे उनके चेले से शिकायत हैं क्या ? स्पष्ट  करू ...&lt;br /&gt;भाई सुरेश ! मै जरा घुमा कर जवाब देता हूँ ... एक शराबी  को यह पता रहता हैं कि कौन सी जगह शराब  बिकाती  हैं , हम जहॉं से रोज निकलते है फिर भी हमें पता ही नहीं रहता कि यहॉ शराब  बिक सकती  हैं ,लेकिन शराबी  को उस स्थान का पता कैसे चल जाता हैं  ? आपने कभी गौर किया है    .........&lt;br /&gt;मीठी -मीठी बातें करते हुए राजीव दिक्षीत ने भारतीय जन मानस  के जिस विस्वास के साथ खिलवाड़  किया है और जिसके चलते देश को कई वर्ष ,सुधारने की क्रम से पीछे हटना पड़ा हैं  ...मैं तो यह मानकर चल रहा था कि अब देश में क्रांति आने को कोई भी नहीं रोक सकता है ,मै सच कहता हूँ -कि नौकरी भी छोडने को तत्पर हो गया  था ,  मेरे एक मित्र ने नौकरी छोड़कर आजादी बचाओ आन्दोलन के साथ हो लिए थे ,जब उनको यह पता लगा कि राजीव दिक्षीत आजादी बचाओ आंदोलन को छोड़कर हिन्द स्वराज अभियान में शामिल  हो गए और उनको भी हिन्द स्वराज अभियान में शामिल  होने के लिए प्ररित कर रहे हैं, तो वर्षों  तक इस परिणाम के कारण मानसीक सन्तुलन ही खो बैठे थेे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक नहीं सैकडों उदाहरण मेरे पास हैं ,कुछ आन्दोलन कारी साथियों ने तो बाबा रामदेव जी को उनके काली करतुतों के बारे में प्रमाण सहित बताया ,और बाबा को निवेदन भी किया कि आपके जैसे योगी को एक लोभी और बदनाम व्यक्ति को किसी भी कीमत में पनाह नहीं देना चाहिए ....बाबा नहीं माने ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाबा ने उन्हें स्वदेशी मंच का प्रधान बना दिया ..... जिस राजीव दिक्षीत को सुनने के लिए हजारों लोग स्वप्ररित होकर इकट्ठा हो जाया करते थे ,आज राजीव दिक्षीत यदि कहीं खड़े  हो जाए तो उसे सुनने वाले कोई मजबूरी में ही खडे होंगे  ....अनिच्छा से ..... घृणा और जिज्ञासा से ................... जानबुझ कर रामदेव जी ने एक अनैतिक वान को देश के जनता पर थौप  दिया हैं जैसे हमारे देश में मंत्री –अधिकारियों को थौपे जाते है। मैं अब किसका तारिफ करू ...?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक कंपनी ने दस हजार जमा करने पर एक हजार रूपया प्रति माह देता था ,अर्थात साधारण हिसाब 120 प्रतिशत ब्याज देना कोई मामूली बात तो नहीं हैं ,कई परिचित लोगों को मैंने मना किया पर बहुत लोग माने नही ,अभी कुछ दिन पहले इस कंपनी के फर्जीवाडा पकड़  में आ गया  और लोगों को मिलने  वाली प्रतिमाह दस प्रतिशत भी मिलना बंद ..... इस पर भी यदि स्काट लैंड के धरती से देश में क्रान्ति  हो जाए तो मैं  सबसे पहले उसका समर्थन ही नहीं करूंगा, बल्कि बाबा जी के  चरणों में जाकर निवेदन करूंगा कि मुझे भी देश सेवा का एक अवसर आपके सानिद्ध में प्राप्त होने पर आपकी  कृतज्ञता स्वीकार करने में गर्व की अनुभुती होगी .....मैं यह भी विस्वास दिला सकता हूँ  कि आज की भौतिक वादी युग में  नोटों से भरी हजारों ट्क भी मुझे सच्चाई की राह से डिगा नहीं सकता ..............................&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8258628480621472263?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8258628480621472263/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/2.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8258628480621472263'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8258628480621472263'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/2.html' title='अब बाबा रामदेव और राजीव दिक्षित स्काटलैंड के टापू से दुनियाँ में क्रांति करेंगे !--2'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3161786281518578265</id><published>2009-10-03T12:02:00.000-07:00</published><updated>2009-10-03T12:32:27.803-07:00</updated><title type='text'>अब बाबा रामदेव और  राजीव दिक्षीत स्काटलैंड के टापू से दुनियाँ में क्रांति करेंगे !</title><content type='html'>बाबा रामदेव ने अब भारतीय रकम को विदेशों में निवेश करने लग गए है ,हाथी के दॉंत दिखाने का कुछ और खाने का कुछ होता हैं ,स्वदेशी का नारा लगाने वाले बाबाजी अवसर देखकर अपनी साम्राज्य विस्तार में लगे हुए हैं ,उनका कहना है कि- विदेशों में भारी मांग होने के कारण उनके चेलों ने एक टापू खरीदने में विशेष सहयोग किया है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मंदी के मार से विदेश में अचल सम्पत्ति खरीदने वाले विरले ही मिलेंगे ,इस अवसर का लाभ तो एक योगी को उठाना ही चहिये , क्योंकि उनके पास बैठे हुए एक ऐसे तमाशेबाज ,एक ऐसे नटवरलाल जिनको ईश्वर ने लोगों को प्रभावित करने के लिए वाणी तो दी है ,पर ईमानदारी शायद उनके खून से गायब हो चुका है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मै नाम लूँ तो हो सकता हैं कि देश के बहुत लोगों को अच्छा नहीं लगेगा ,आज कल रामदेव जी के साथ बैठे-हाईटेक स्वदेशी प्रचारक ,देश के कर्णधार ,देश से विदेशी कंपनीयों को भगाकर ही दम लेंगे, ऐसे कहने वाले स्व उपाधी धारक राष्ट्रबंधु श्री राजीब दिक्षीत जी जिनके सलाहकार बन बैठे है .....&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैं पिछले वर्ष जब एक सम्मेलन में भाग लेने वर्धा पहूंचा तो राजीव दिक्षीत से मिलने का मन होने से उनके घर चला गया , एक साधरण जीवन जीने की संकल्प करने वाले ,गॉंधी जी को आदर्श मानकर, देश में प्रचार करने वाले ,अपने नाम से कभी कोई बैंक में खाता न रखने की बातें करने वाले त्यागी जी- के घर में जो भव्यता देखा तो मुझे एका एक विस्वास ही नहीं हुआ कि.. मैं कहीं सपना तो नहीं देख रहा हूं ....?&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;श्री कृष्ण और सुदामा के किस्से तो जग जाहिर है , गरीब सुदामा अपनी सखा श्रीकृष्ण से कभी कुछ मांगने की कल्पना तक नहीं कर पाते थे ,परन्तु जब श्री कृष्ण से मिलकर वे घर लौटे तो झोपड़ी के स्थान पर महल देखकर हैरान हो गए थे । अब राजीव भाई को कलियुग में ऐसी कौन भगवान राजा मिल गए होंगे, जिसने रातों रात उन्हें करोड़पति बना दिए हैं .... कुछ समय पहले मेरे पास कई मेल आया --- जिसमें राजीव भाई के बारे एक खुलीचिट्ठा भी था ,भावनाओं से खेलते हुए इस देश में रातों रात करोड़पति बनना बहुत आसान है ,यही बात दिक्षीत जी पर भी लागु होता है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सलहाकार बन कर बाबा राम देव को विदेश में धन निवेश करने का काम यही एक व्यक्ति के सिवाय अन्य कोई करने का हिम्मत नहीं कर सकता ..... स्कॉट लैंड स्थित एक पुरे टापू को ही बाबा रामदेव जी ने खरीद लिया है ,भारतीय भूमि उन्हें अब रास नहीं आ रहा है ,इस देश में घर- घर तक योग सिखाते हुए, राष्ट्रप्रेम ,स्वदेशी - भावना द्वारा देश में क्रान्ति लाने की बातें करने वाले बाबा ,अब विदेश से भारत का संचालन करेंगे । एक विदेशी निर्जन टापू में बैठ कर भारत में दोनों मिलकर क्रांति करेंगे ,योजना बहुत ही अच्छी है । १५.३० करोड़ रूपये में एक टापू खरीद कर आगे लाभ की सम्भवना अभी से ही शुरू है .....&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वर्षों पहले इस देश में एक महेश योगी हुए ,वे भी विदेश में रहकर न जाने क्या- क्या प्रयोग किया करते थे,आज महेश योगी को कितने लोग जानते हैं पता नहीं ...........एक समय आचार्य रजनिश भी देश छोडकर विदेश चले गए थे ,अमेरिका में रजनिशपूरम् बना कर अमेरिका का ही राष्ट्रपति बनने का सपना देखने वाले ओशो का जो हस्र हुआ, उसे देख सुन कर बाबाओं को कुछ ज्ञान लेने का समय ही कहॉं हैं ........&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;देश के महान साहित्यकार ने एक स्थान में लिखा कि... अपनी मॉं को असहाय छोड़ कर जो दूसरे मॉं की सेवा करते हैं वे कृतघ्न कहलाते हैं ....पता नहीं ...सत्य लिखने की मुझे क्या सजा मिलेगी... पर यह तो स्पष्ट हैं कि कलियुगीन बाबाओं को सजा देने वाले अभी देश में शायद ही पैदा हुए होगे ....!!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3161786281518578265?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3161786281518578265/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_03.html#comment-form' title='8 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3161786281518578265'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3161786281518578265'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post_03.html' title='अब बाबा रामदेव और  राजीव दिक्षीत स्काटलैंड के टापू से दुनियाँ में क्रांति करेंगे !'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4872460488651001493</id><published>2009-10-02T08:44:00.000-07:00</published><updated>2009-10-02T09:28:07.044-07:00</updated><title type='text'>देश में जीवन का कोई कीमत नही --बिहार में ६० की जल समाधी</title><content type='html'>यदि लोग अकाल मृत्यु में चल बसे और हम विज्ञान की दम्भ में, समय गूजारते चले जाए तो , आगे चलकर विज्ञान को नकारने का एक बहाना तो लोगों को मिल ही जाएगा ,हम चॉंद में पानी होने की बाते करते है, वहॉं मनुष्य के बसने लायक स्थिति पैदा करने लगे हैं ,लेकिन जहॉं मनुष्य के लिए प्रकृति ने सब कुछ अनुकूल वातावरण बनाकर वरदान स्वरूप हमें प्रदान किया है ,उसी वरदान को हम नकारते हुए, दूर का ढोल सुहावना लगता हैं वाली कहावत चरितार्थ करने लगे हुए है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज भी हम लोगों को भर पेट भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाए है ,उचित शिक्षा की बात तो दूर हम अक्षर ज्ञान तक बच्चों को उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं ,रास्ते में कैसे चलना चाहिए यह भी सिखाने में हम असमर्थ हैं । लोग जल के बीना बेमौत मारे जाते हैं ,पिलिया तो जल के कारण ही होता हैं , गन्दगी के कारण लाखों लोग प्रत्येक &lt;span class=""&gt;वर्ष &lt;/span&gt;मारे जाते हैं । मलेरिया ,हैजा ,डेंगू आदी तो गंदगी के कारण ही पैदा होता है ,हम आजादी के बाद बाते तो बहुत करते है ,साधनों की भी कमी नहीं है.... पर लोग साधन के अभाव में मर रहे हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जानबूझ कर लोगों को काल की मूंह में पहुंचाना एक परम्परा सी इस देश में बन गई हैं । भूखमरी से लोगों को अनेक प्रकार की बिमरी आ घेरती हैं ,खून की कमी से बच्चे ग्रसीत हैं ,किशोरावस्था में गरीब घर की लड़किओं की जो दूर्गती होती हैं उसे लिखना भी कष्ट साध्य हैं ,जिस समय लड़कियों को पौष्टिक आहार की आवश्यकता हैं ,उसी समय यदि उसे भूखमरी की सामना करना पड़ें ,तो आगे जाकर देश के लिए माता बन कर वे कैसी सन्तान उत्पत्ति करेंगी यह तो सोचने की बात हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;शासन  सब कुछ जानती हैं , माताओं के लिए अनेक प्रकार की योजनायें भी प्रारंभ किया गया हैं पर उसका लाभ उसे कितना मिल पाता है ,यह तो परिस्थिति पर निर्भर करता है ।&lt;br /&gt;गरिबी की बात तो एक और छोड़ दे, तो अमीर लोग भी आज सुरक्षित नहीं है । गुंडों के कारण रास्ते में चलना आज बहुत मुस्किल हो चुका हैं ,यदि गुंडों से बच भी  गए तो &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;भी सुरक्षित नहीं हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;कब किस गाड़ी के नीचे कौन आ जाए, उसका कोई भरोसा भी नहीं ,रास्ते में तो अमीर -गरीब -नेता -कर्मचारि..अधिकारी सभी कीड़े &lt;span class=""&gt;मकदों &lt;/span&gt;की तरह पीसे जाते है। फिर हम किस विकास और उन्नती की बाते करते हैं ,समझ से परे है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;बाजार से जो भी खाने पीने के लिए हम खरिदते हैं ,घर में यदि साफाई करके और उत्तम तरिके से उपयोग में लाया जाए ,तो भी हम नहीं कह सकते कि हमने सही आहार का सेवन किया है ,वह शरीर &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;लिए दायक ही होगा ... हो सकता हैं कि हम घर की बनी हुई भोजन से ही अन्तिम &lt;span class=""&gt;श्वाश लेने लगे ,हम &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;बाहर सुरक्षित नहीं हैं ,जंगल में चले जाए तो वहॉं भी औद्योगिकरण का जो वातावरण तैयार हो चूका है जिसके चलते जंगल भी सुरक्षित नहीं रह गया हैं ,जंगली जानवर आज इस हद तक हिंसक बन चुका कि शहरों में आकर हाथी ,भालू ,शेर आदी हमला शुरू कर  दिया हैं 1&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;बिहार के खगड़िया और दरभंगा जिले में नौका डुबने से 60 लोगों की  मौत  हो सकता हैं,और सरकार हर एक परिवार को 1लाख 50 हजार रूपये मुआवजा देती हैं तो 90 लाख रूपये  तो एक झटके में जनता का ही चला गया ना ? &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;आदमी का जान 1.5 लाख में सौदा हो गया ,कितनी सस्ती हैं आदमी का जान ! जबकि 100 जैकेट का किमत यदि 500 रूपये भी प्रति नग हो तो पचास हजार  ही होती हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जहॉं नाव चलती है यदि पहले से ही सुरक्षा की व्यवस्था की जाती तो क्या 60 लोग डुबने नहीं बच सकते थें , नाव  में प्रत्येक को सुरक्षित जैकेट पहनना आवश्यक होता हैं ,पर भारत में मनुष्य थोडे ही रहते हैं ,यहॉं तो प्राय: भेड़ बकरी ही नजर आने के कारण उनके किस्मत में हलाल या बली ही&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; लिखा है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4872460488651001493?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4872460488651001493/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/naav.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4872460488651001493'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4872460488651001493'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/naav.html' title='देश में जीवन का कोई कीमत नही --बिहार में ६० की जल समाधी'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-6173836269438512507</id><published>2009-10-01T11:54:00.000-07:00</published><updated>2009-10-01T12:10:52.801-07:00</updated><title type='text'>गाँधी जयंती पर--राम रावण की जय -----</title><content type='html'>हे गान्धीजी ! मैंने अनेक बार चाहा ताकि आपसे बहुत प्यार कर सकूँ ,आपको &lt;span class=""&gt;श्रेष्ट &lt;/span&gt;पुरूष मान कर दिल की गहरीई में बीठा सकूँ ,पर आज तक ऐसा नहीं हो सका , इसका अर्थ यह नहीं हैं कि मैं आपसे नफरत करता हूं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आपसे मानवता के खातिर नफरत कोई भी नहीं कर सकता ,विचार भिन्नता होते हुए भी नेताजी सुभाष ने ही आपको सबसे पहले महात्मा कहा था ,आज देश के अधिकांश लोगा आपको महात्मा के नाम से ही जानते है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैं आपके राम -नाम जपते जपते-- पता नहीं कब मेरे मूंह से रावण -रावण भी आना शुरू हो गया हैं ,गलती मेरा नहीं है ,मैंने तो राम -राम ही सत्य हैं की कल्पना करता हूं .... पर मुंह में राम और बगल में छुरी रखने वाले लोगों को देखते हुए , आजकल मुझे राम-राम जपने वालों से बहुत भय होने लग गया हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;रावण से मुझे भय नहीं लगता क्योंकि रावण आज सामने से वार करता हैं, और राम-नाम जपने वाले पीछे से , रावण से तो बचा जा सकता हैं , पर राम भक्तों से बचना आज कठीन हो गया है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;हे गॉंन्धी जी ! आपके टोपी का तो क्या कहने ,टोपी के साथ और खादी के साथ दिन में न जाने कितने वार बलात्कार होता है .उसे यदि आप देखते तो हो सकता था कि , आप स्वयं ही आत्महत्या कर बैठते !&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;नाथूराम गोडसे ने तो आपकी शरीर को मारा हैं ,पर आपके चाहने वालों ने तो आपकी आत्मा को ही मार डाला है । गीता में कहा गया हैं कि ..आत्मा अमर हैं ,अजर हैं ,आजन्मा हैं ...पर कलियुग में आत्मा को मानने वालों को तो पिछड़ा ,अशिक्षित ,मूरख,और न जाने कौन -कौन सी अलंकारों से अलंकृत किया जाता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल आपका जन्म दिन हैं .... मै किस मूंह से आपको जन्म दिन का बधाई दूँ ॥ यह सोच-सोच कर परेशान भी हूँ , अभी पिछले कुछ साल पहले आपने सुनिल दत्त को साक्षात्कार दिया था ,दत्त जी तो आपके कृपा से माला माल हो गए हैं ,परन्तु मेरे जैसे को क्या आप कुछ सूनने का समय दे सकेंगें ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप मुझ पर अब नराज मत होईएगा ...... मैं अब न आपसे और न रावण से नफरत करूंगा ,राम और रावण दोनों को पूरक मानते हुए चलने का दिल चाहता है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;लोहा -लोहा को काटता हैं ,जहर का दवाई भी जहर ही है ,अत: जब राम के नाम पर रावण ही अधिक हो गया, तो कोई रावण ही इसे खत्म कर सकता है ,अत: रावनम् शरणाम् गच्छामी .......&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;रावण तो अपने राज्य को स्वर्ण लंका बना दिया था ,यदि रावण जपते हुए मेरे देश भी स्वर्ण भारत बन जाए ,और इस लिए मेरे जैसे कुछ लोगों को गाली भी सहना पड़े , तो बहुत ही कम हैं .........&lt;br /&gt;रावण जी को कहना चाहूंगा कि आपके बहन को यदि कोई नाक कान काट दे ,अपमान करें ,तो कलियुग में बदला लेने के लिए किसी की पत्नी को उठाकर न ले जाए ,हॉलाकि रामायण में सीता जी को बहुत ही इज्जत के साथ लंका पुरी में रखने की बाते लिखी हुई है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                            एक&lt;/span&gt; नारा आज क्यों नहीं दिया जा सकता है कि राम -रावण की जय !.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-6173836269438512507?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/6173836269438512507/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6173836269438512507'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6173836269438512507'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='गाँधी जयंती पर--राम रावण की जय -----'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7492798398577741395</id><published>2009-09-30T23:39:00.000-07:00</published><updated>2009-10-01T06:38:57.606-07:00</updated><title type='text'>२३-०९ -२००९ को बालको में नव निर्मित बिजली सयंत्र की चिमनी धराशाई पर विस्तृत जानकारी</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsSXnIWpgrI/AAAAAAAAAFM/3_0lTTkNGdc/s1600-h/6hjkh.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387597752755126962" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 46px; CURSOR: hand; HEIGHT: 53px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsSXnIWpgrI/AAAAAAAAAFM/3_0lTTkNGdc/s320/6hjkh.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsRSMVov8xI/AAAAAAAAAFE/dXNZvrQsaFk/s1600-h/fdghkjhl.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387521426161922834" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 340px; CURSOR: hand; HEIGHT: 282px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsRSMVov8xI/AAAAAAAAAFE/dXNZvrQsaFk/s320/fdghkjhl.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;2 फरवरी 2001 का दिन कोरबा शहर के लिए एक मनहुस दिन सभी को आज भी याद हैं ,इसी दिन छत्तीसगढ विधान सभा में बालको निजीकरण के पक्ष और विपक्ष में गरमा- गरम बहस भी चल रहा था, 2001 में केंद्रीय सत्ता पर भारतीय जनता पार्टी और राज्य में कांग्रेस के तेज तर्रार नेता और छत्तीसगढ के प्रथम मुख्य मंत्रि श्री अजित जोगी जी रहे हैं ।&lt;br /&gt;बालको का निजीकरण किसी भी कीमत पर न करने का संकल्प विधान सभा में लेना था और कांग्रेस के सभी नेता एक जुटता दिखाते हुए बालको निजीकरण का विरोध ही नहीं किया बल्की यहॉं तक कहा कि हम बालको को बिजली-पानी नहीं देंगे । भारतीय जनता पार्टी की और से स्थानिय विधायक श्री बनवारी लाल अग्रवाल ,श्री ननकी राम कवंर ,विधान सभा में निजीकरण के पक्ष में भाषण दिए एवं केंद्र में बैठे भा ज पा का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा -कि बालको का निजीकरण होना ही चाहिए ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;            विनिवेश &lt;/span&gt;मंत्रि श्री अरूण शौरी , पता नहीं कौन सी जुनून में रहे हैं, कि वे चून-चून कर लाभ में चल रही कंपनीयों को मिट्टी के मौल सौदा करते जा रहे थे । उस समय यदि बाजार मूल्य से बालको का मुल्यांकण किया जाता तो अधिकांश बुद्धिजिवीओं का कहना था -कि बालको किसी भी हालत में 5000 हजार करोड़ से कम की नहीं हो सकता हैं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;                बालको&lt;/span&gt; निजीकरण के साथ ही साथ उसका एक केप्टिक बिजली संयंत्र को भी एक साथ बेच दिया गया ,मात्र बिजली संयंत्र ही 1500 हजार करोड़ से कम नहीं था ,कुल मिला कर 551 करोड़ में एक विदेशी कंपनी को बालकों बेचने का सौदा पक्का करके, कोरबा वासीयों के साथ ही साथ बालको कर्मचारियों पर थौप दिया गया था । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;         कांग्रेस&lt;/span&gt; की विधान सभा में संकल्प पास होना ,और बिजली पानी बंद कर देने का जो बातें विधान सभा में किया गया था, वह मात्र एक दिखावा साबित हुआ ,अजित जोगी तो बालको संयंत्र के भितर जाकर धरना में बैठ गए थे । केंद्र सरकार को ललकारते हुए वे कह रहे थे कि 551 करोड़ में 51 प्रतिशत हिस्सा छत्तिसगढ सरकार को दे दिया जाए ,हम बालको को अच्छी तरह चला लेंगे ,परन्तु सारी बाते केवल हवा बन कर रह गया । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;            मुख्यमंत्री&lt;/span&gt; राजधानी जाते ही बालको निजीकरण से अपनी हाथ ही खिंच लिए ,वे यहॉं के नेताओं से मिलना तक मुनासिब नही समझे ,बेइमानी का पराकाष्टा ,गद्दारी का जिता जागता उदाहरण-- साक्षात देखकर कर्मचारि और छत्तिसगढ के जनता सहम गए थे, किंम्कर्तव्य विमुढ हो कर अनिष्ट की कल्पना करके जहर की घूंट पीकर वे अपने से जो कुछ हो सकता हैं ,जैसे भी हो, विरोध करते रहे हैं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;           मजेदार&lt;/span&gt; बात जो बाद में सामने आई ,वह यह कि श्रमिक संघ के नेताओं ने दिल्ली में पहले से ही सौदा करके बालको लौटे थे ,जिसके तहत अपने बच्चों और चहेतों को नौकरी के अलावा पदोन्नती के साथ भेंट आदी की पक्की इंतेजाम करते हुए मात्र श्रमिकों को वेवकुफ बनाने के लिए ,दिखावा स्वरूप बालको के हडताल में शामिल हुए थे । जिसमें भारतीय मजदूर संघ ,इंटक और समर्थीत संगठन का नाम लेना अनुचित न होगा । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387519169789482466" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 652px; CURSOR: hand; HEIGHT: 398px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsRQI__o1eI/AAAAAAAAAE8/2f7T8DIlmDQ/s320/6+001.bmp" border="0" /&gt; एटक और उनके कुछ चहते ने इमानदारी पूर्वक 67 दिन तक ऐतिहासिक आन्दोलन करने के पश्चात एकाएक इंटक ने आन्दोलन से समर्थन वापस लेकर ऐतिहासिक आन्दोलन के पीठ में छुरा भोंकने का काम किया ,जिसे भुल पाना सम्भव नहीं है। कांग्रेस और बीजेपी दोंनों बालको निजीकरण के मामले में मिर्जाफरी किया हैं ।&lt;br /&gt;आज जो परिस्थिती बालको का है, उसे देख कर मन हाहाकार कर उठता है , बालको का पहचान एल्युमिनियम से जुड़ा हुआ था ,अनिल अग्रवाल जो एक अप्रवासी भारतीय ,इंग्लैण्ड से करोड़ों रूपये लाकर बेदान्ता समूह के नाम से ,ऐसा लगता है कि यह भारतीय कंपनी हैं ,जबकि वे विदेशी कंपनी का दलाल है -जो कि देश के साथ ईस्ट इण्डिया कंपनी से भी बढ कर गद्दारी करने की तैयारी में है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;       कुछ&lt;/span&gt; लोगों को यह कहते हुए सुना गया हैं कि अजित जोगी ने बेदान्ता समूह से बहुत लाभ पाकर चुप हो गए और जब कार दुर्घटना में चलना फिरना भी मुस्किल हो गया था, तो लोगों को यह कहते हुए सुना गया कि ..ये बला दुनियॉ से चले क्यों नहीं गये ? मनुष्य संवेदनशील प्राणी हैं ,विपत्ति में तो कोई इस तरह की सोच भी नहीं रखता ,परन्तु जोगी जी ने लोगों का मन किस हद तक दुखाया होगा, जिसके चलते लोगों के मुंह से सहानुभूती के भी शब्द निकल नहीं रहा था । ..................&lt;br /&gt;आगे चलकर उसका राज पाट खत्म हो जाता हैं, और राजधानी में जग्गी हत्याकांड में फँस कर राजनैतिक जीवन को चौपट कर बैठा ।&lt;br /&gt;अति सर्वथा वर्जते ,ऐसा शास्त्रों में लिखा है , बालको के साथ भी अत्याचार का अति हो चुका है ,जो भी इस प्रकारण में लिप्त हैं , उसका भला कभी हो नहीं सकता ।बालको के एक श्रमिक नेता का जो दुर्गति हुई ,उसे देखकर भी वर्तमान श्रमिक नेताओ को होश नही आ रहा हैं , कहते हैं कि उस समय के भापजा मंत्री प्रमोद महाजन का हिस्सा भी बालको में था ......&lt;/div&gt;&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;          एक कबाड़ बेचने वाला वह भी बालको का कबाड़ बेचकर जीवन चलाने वाला ,रातों रात बालको का मालिक कैसे बन सकता हैं ? सबसे पहले तो इस बात की जॉंच होनी चाहिए ,ऐसे व्यक्ति पाप छिपाने के लिए सामाजिक कार्य के आड़ में लोगों के ऑंखों धूल झोंकता हैं, दोचार सामूदायिक कार्य इसलिए किया जाता है ताकि स्थनीय लोग सोचे कि यह हमारा मसीहा है ,साधारण जनता ऐसे लोगों को बहुत बाद में पहचान पाते हैं ,जब तक समझ आता है ,तब तक सबकुछ लूट गया होता है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;      जबसे&lt;/span&gt; वेदान्ता समूह बालको में आया हैं, यहॉं के कर्मचारियों से लेकर स्थानिय जनता ,सभी पेरेशान है1 बालको का निजीकरण न हो इसलिए कोरबा जिला बंद का अह्वान किया गया था, ऐसा बंद स्वस्फूर्त हो कर महाबंद का रूप ले लिया था ,इसका मतलब यह हुआ कि यहॉं के जनता बालको निजीकरण के पक्ष में कभी न &lt;span class=""&gt;थे,&lt;/span&gt; और न आज है ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;           विनिवेश के नाम से विरोध को दबाने के लिए 2001 में बालको कोरबा को छावनी बना दिया गया था ,और आज जब चीन के कंपनी सेपको के सहयोगी &lt;span class=""&gt;कंपनी &lt;/span&gt;जे &lt;span class=""&gt;डी &lt;/span&gt;सी &lt;span class=""&gt;एल &lt;/span&gt;के भ्रष्टाचार के कारण ऊँची चिमनी धराशायी होकर सैकडों लोगों की जान चली गई और यहॉं किसी भी तरह की विरोध न हो सके इसलिए फौज &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;मंगा लिया गया है ,शासन प्रशासन के सहयोग से चीन के भ्रष्ट कर्मचारि अधिकारीयों को कोरबा से बाहर जाने दिया गया , जिन्हें तुरन्त ग्रिप्तार करके जेल में डाल देना था ,उन लोगों को सुरक्षित दिल्ली तक जाने देना...शासन -प्रशासन की मंशा का पर्दाफाश करने में काफि हैं ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;        घटना 23.09.2009 के दोपहर लगभग ३ बजकर ४० मिनट के लगभग होगा .29.09 09 तक 41 शव निकाला जा चुका था ,कुछ लोगों का कहना हैं कि यह संख्या सौ से अधिक है । सैकडों लोग घायल भी हुए कुछ लोगा लापता भी हैं । यदि स्थानीय समाचार पत्र विरोध न करते तो, हो सकता था कि भ्रष्टाचार में लिप्त सभी विदेशी चीन भाग गए होते ,इसके बाद किसकी जॉच और कैसी जॉच ....? &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;         हमने&lt;/span&gt; तो भोपाल गैस काण्ड देख चुके है ,आज भी गैस से त्रस्त लोग टुट- टुट कर जीवन को ढो रहे है। और भारत &lt;span class=""&gt;सरकार &lt;/span&gt;महाराष्ट्र सरकार इस प्रकरण में तमाशा देख रही है ,हजारों लोगों को मौत के घाट उतारने वाले एंडरसन का बाल तक बॉंका नहीं कर सकें । भारत में हत्या के आरोपी को फॉसी की सजा होती हैं ! परन्तु किसको होती हैं फॉसी की सजा ? भारतीयों को फॉसी हो जाती हैं, और विदेशीयों को हम फॉंसी नहीं दे सकते ,इसका अर्थ यह हुआ कि यदि कोई प्रवासी भारतीय हो जाए तो उसके लिए कानून ही बदल जाता है । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;           देश्द्रोही&lt;/span&gt; के अपराधी अफजल गूरू को कई साल बित जाने पर भी उसे सजा नहीं दिया जा सका हैं ..ऐसा क्यों हो रहा हैं ..... ? जिस चिमनी को सेपको द्वारा बनाई जा रही थी ,पूर्ण रूप से अमानक था ,लोहे की छड ,गिट्टी ,बालू , क्यूरींग ,पाईलिंग ,नींव आदी सभी अमानक निकला ,जिस चिमनी धराशायी हो चुकी है उसके बाजू में एक और चिमनी बन कर तैयार होने को हैं ,उसका भी यही हाल हैं कि कब वह गिरकर सैकडों लोगों का जान ल ेले और फिर एक बार जख्म को ताजा कर &lt;span class=""&gt;दे , &lt;/span&gt;किसीको पता नहीं है । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;        एक&lt;/span&gt; चिमनी बनाने मे पिछले वर्ष आठ लोगों का जान ले लिया था , जान लेने वाली कंपनी को ही दूसरी चिमनी बनाने के लिए ठेका दे दिया गया हैं , भ्रश्टाचार का क्या क्या बयान करू ..... जब से एल्युमिनियम के नाम से कोरबा में अनिल अग्रवाल आया है ,तब से यहॉं लंूट ,दंगा ,&lt;span class=""&gt;गुंडागदी &lt;/span&gt;डकैती , शराब खोरी ,बलात्कार, हत्या ,नशेडि,गंजैडी , दूघजटना , प्रदूशण ,अवैध धंधा , वेश्यावृति,नकली नोटों का धंधा , आदी .....ऐसी  कोई अपराध नहीं बचा हैं जो अनिल अग्रवाल के साथ यहॉं न आया हो ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;             अत&lt;/span&gt;: अनिल अग्रवाल को सबसे पहले िग्रप्तार करते हुए उनके चमचों को भी िग्रप्तार करना आवश्यक है । श्रमिक संघ वाले तो ठेकेदारों से उगाही करने में मस्त रहे हैं ,इसलिए इसबार ऐसा कोई विरोध भी देखने को नहीं मिल रहा है । एकट ,इंटक ,सीटू सभी मात्र बयान बाजी तक सीमित हैं ,सैकडों लोगों का जान चला गया और आज तक एक भी लोगों का िग्रप्तारी न होना आश्चर्य ही नही , महा आश्चर्य है।&lt;br /&gt;वन विभाग के जमीन पर अवैद्य रूप से चिमनी बनने का कार्य बालको कर रहा था ,न्यायालय के आदेश का पालन न करते हुए दादागीरि से कार्य करने का साहस स्थानिय प्रशासन के होते हुए भी किसने दिया हैं ,इस पर जॉच होना आवश्यक है।&lt;br /&gt;श्रम विभाग के पास यह भी आकड़े नहीं हैं कि चिमनी स्थल में कितने लोग कार्य कर रहे थे ,बहुत लापता लोगों का लाश नही मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में मरने वालों की संख्या कैसे पता लगेगा ?श्रम विभाग भी बालको और ठेकेदारों से मिले हुए हैं , जॉंच निष्पक्ष रूप से होना आवश्यक हैं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;                 राज्य&lt;/span&gt; शासन का जॉच तो मात्र दिखावा के सिवाय कुछ भी नहीं रहेगा,जॉच के नाम पर लिपाई -पुताई ही अधिक होने की सम्भवना के कारण सीबीआई से ही जॉच करना आवश्यक हैं ।&lt;br /&gt;पुलिस विभाग भी इस प्रकरण में अपनी दाइत्व से बच नहीं सकता ,जहॉ घटना घटी है उस स्थान से पुलिस थाना बहुत ही नजदीक है ,फिर भी अपराधीयों को पुलिस ने घटना स्थल से जाने क्यों &lt;span class=""&gt;दी ?&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;             घटना&lt;/span&gt; स्थल से लगा रिकार्ड रूम को बहुत ही सुनियोजित ढंग से जला दिया &lt;span class=""&gt;गया &lt;/span&gt;हैं ,ताकि भ्रश्टाचार से सम्बन्धित सम्पूर्ण दस्तावेज जल जाए और सबूत खत्म हो जाने से प्रकरण को दबाने में सरल हो । बालको आज रहने लायक नहीं रह गया हैं ,नया संयंत्र लगने के बाद ही परिवार सहित कर्मचारि रहने के लिए आते है। यहॉं तो एक बार बालको संयंत्र बन चूका था ,फिर एल्युमिनियम संयंत्र को यदि नया रूप दे कर उत्पादन बढया जाता तो कुछ समझमें भी आता और त्याग भी किया जा सकता था ,लेकिन आज बालको के संयंत्र तो पुरा का पुरा बंद हो चुका हैं । मात्र स्मेलटर को छोड कर सभी बंद है ,पी टी एस –प्रोफा्रईल एण्ड टयूब शॉप , &lt;span class=""&gt;सी &lt;/span&gt;डब्ल्यू एस – सेन्ट्ल &lt;span class=""&gt;वर्क &lt;/span&gt;शॉप ,पुराना सेल हाउस ,एल्युमिना प्लांट , सभी बंद पड़ा हुआ  हैं ----&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;        यहाँ&lt;/span&gt; &lt;/span&gt; के बाक्साईड को लांजीगढ उडीसा में भेज दिया जाता है । कर्मचारियों में भय का वातावरण तैयार करके व्ही आर एस लेने को वाद्य कर दिया गया ,बालको प्रशासन चाहती हैं कि एल्युमिनियम के आढ में बिजली का धंधा करें । हजारों एकड सरकारी भूमि को kabjaa karke ,हजारों पेडों का वली देकर ,चारों ओर अशान्ती का वातारण बनाकर ,पता नहीं कोरबा और देश का क्या विकास हो रहा हैं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;             विकास&lt;/span&gt; के नाम से ,विनाश का जो खेल प्रत्यक्ष दिख रहा है ,उसे देखकर भी शासन प्रशासन क्यो नहीं ? यह प्रश्न सबके मन में आज घर कर गई हैं ,लोग ऐसी नहीं कि समझती नहीं हैं ये सब समझती है ,वक्त बलवान हैं ,जरूर समय अपना हिसाब किताब मांगेगा ........... बेशर्मी का ,बेइमानी का तो हद ही हो गया हैं ,बालको प्रबंधन भ्रश्टाचार को प्राकृतिक कारण बताने की पूरी तैयारी करने में जूटी हुई है।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; जिस समय चिमनी गिरी ,उसी समय थोडीसी हवा के साथ वर्षा हो रही थी ,कोरबा में जब कभी वर्षा होती हैं तो अधिकांश समय बिजली भी कडकती रहती हैं ,यहॉं के लोगों के लिए यह सब साधारण बात हैं ,प्रबंधन का कहना हैं कि हवा ,पानी के कारण चिमनी गिरी है ,यह बात करने वाले प्रबंधन किस हद तक मानव जीवन के साथ खिलवाड कर सकती हैं ,यह बयान ही समझने में बहुत है। &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;जब कभी ऊँची  मकान निर्माण होती  हैं उसके साथ ही साथ तडित चालक भी चढाया जाता है ,यह एक सामान्य सी नियम है । यदि हवा पानी ,बिजली से उची मकान और चिमनी धराशायी होने लगे तो इस दूनियॉं में ऊँची  निर्माण ही बंद हो जाती  ,इसका अर्थ यह हुआ कि तड़ित चालक ही निर्माण कार्य के साथ आगे नहीं बढाया गया ,यदि ऐसा होता हैं तो बहुत बड़ी खामि को किसी भी हालत में क्षमा योग्य नहीं माना जा सकता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;बालको प्रकरण तो मात्र एक उदाहरण ही हैं ,इस तरह की खामियॉं देश के अन्य भागों में आज विकास के नाम से किया जा रहा जनसंहार ,चाहे यह उडिसा के कोरियाई कंपनी पोस्तो का हो ,बिहार के कर्णपूरा क्षेत्र का हो ,हिमाचल प्रदेश के पन बिजली उत्पादन में लगे कंपनी का हो ,बडे सेजों द्वारा निर्माण किया जा रहा अन्य निर्माण कार्य हो ,सभी और पर्यावरण और जनहानी.... प्राणी और अन्य तरह की विनाश ही अधिक परिलक्षित हो रहा हैं । अत: इस तरह की विनाश अविलम्ब रोकना अतिआवश्यक हैं ।&lt;br /&gt;विकास तो मानव या जीव जगत के लिए आवश्यक हैं ,विकास का अर्थ और किसके लिए विकास,यह दोनों बातों को नजर अन्दाज कर दिया जाता है ,मानव रहित और प्राणी रहित विकास से किसका भला होने वाला है ं ,यह विचार करने का भी किसी को समय नहीं मिल रहा है , शासन -प्रशासन सभी मदहोश होकर विनाश कार्य में लिप्त हैं ,एक मानसीक रोगी जिस तरह से अपनी जुनून में कुछ भी करता हैं ,और उसे रोगी मानकर चिकित्सा की व्यवस्था की जाती ,ठीक उसी प्रकार देश के शासन -प्रशासन एक मानसीक रोगी बन चुका हैं ,सही चिकित्सा यदि नहीं किया गया तो ,देश और दुनियॉं से जीवन का ही अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा ......&lt;br /&gt;भोले भाले जनता के नाम से देश नहीं चलता ,और जो भोले भाले और निरस जीवन जीने वालों पर प्रजातंत्र जैसे शासन व्यवस्था का भार देना अपने पैरों पर कुल्हाडी मारने का समान हैं ।&lt;br /&gt;प्रजातंत्र में अधिकांश जनता को हमेशा जागरूकता का परिचय देना आवश्यक हैं ,यदि जनता जागरूक न हो तो प्रजातंत्र का अर्थ ही क्या रह जाएगा&lt;br /&gt;सभी घटनाओं पर विचार करने पर एक बात साफ हो जाता हैं कि निजीकरण और सरकारी करण दोनों में विशेश अन्तर नहीं रह गया हैं । काम करने वाले सभी भारतीय होते हैं , हम यह मानकर चलते हैं कि यदि निजीकरण होगा तो लोग ज्यादा कार्य करेंगे और राश्ट्ीय कृत उद्योग में लोग अधिक कार्य नहीं करेंगे ,बात मात्र मानसीक तैयारी की हैं । अत: बालको जैसे अन्य उद्योगों का जो नीजिकरण के पश्चात कार्यकुशलता पूर्व संचालन नहीं कर पा रही हैं ,उन सभी उद्योगों को फिर से रािश्ट्यकरण कर देना समयानुसार उचित है । &lt;/div&gt;&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;निजीकरण ,सेज ,विनाश से सम्बंधित जो भी ,जैसे भी विषय मिले उस पर हमें कुछ न कुछ प्रतिक्रिया अवश्य करना चाहिए ------&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7492798398577741395?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7492798398577741395/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/2-2001-2001-kendriya-shouri-5000-1500.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7492798398577741395'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7492798398577741395'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/2-2001-2001-kendriya-shouri-5000-1500.html' title='२३-०९ -२००९ को बालको में नव निर्मित बिजली सयंत्र की चिमनी धराशाई पर विस्तृत जानकारी'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SsSXnIWpgrI/AAAAAAAAAFM/3_0lTTkNGdc/s72-c/6hjkh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3775861773872345642</id><published>2009-09-29T09:57:00.000-07:00</published><updated>2009-09-29T10:05:34.001-07:00</updated><title type='text'>ब्लोगवाणी के सिरिल जी को टिपण्णी पर एक पत्र --</title><content type='html'>सिरिल गुप्ता जी !&lt;br /&gt;          यदि  उत्तर न दू तो अच्छा नहीं लगता ,आपने तो ब्लॉग में लिख ही दिया कि ब्लागवाणी पर यह पहला आरोप नहीं  है  । इसका अर्थ यह हुआ कि कुछ लोग हो सकता है कि आरोप लगाने में ही कोई भला समझते हो ,  लेकिन ऐसे लोगों को पुछना चाहिए कि आरोप लगाने से उसका क्या भला हो रहा हैं ,यदि आरोप से उसका भला होता हो और ब्लागवाणी को विशेष  नुकसान न हो तो ,ऐसे व्यक्तियों  को आरोप लगाने के लिए उत्साहित करना भी ठीक हैं ।                     &lt;br /&gt;               आजकल नकारात्मक विचार भी सकारात्मक की ओर ले जा सकता है ,मैंने एक पोस्ट में लिखा है कि यदि मरा -मरा जपने से राम -राम हो सकता हैं ,तो आरोप लगाते लगाते स्वयं आरोप रहित हो जाने की सम्भावना अधिक हो सकती हैं ।&lt;br /&gt;            &lt;br /&gt;                 आपने धीरज खोने की बातें लिखी है ,इससे तो साफ हो जाता हैं कि समस्याओं पर आपलोगों ने बहुत अधिक ध्यान दिया हैं , तभी तो मोडरेशन के बारे में ब्लोगारों का सुझाव भी आमंत्रित किया गया हैं । मैं बहुत ही स्पष्ट  रूप से आपको बताना चाहता हूँ  कि ईमानदारी पूर्वक सबसे अच्छा जो विकल्प आपलोगों को सही लगे ,आपलोग वही करें ,मैं तो भारत वर्ष  की भेड़तंत्र पर विस्वास ही नहीं करता ,अत: आपसे निवेदन हैं कि आप सर्वमान्य पर अधिक ध्यान न देते हुए ,जो सबसे अच्छा विकल्प  आपलोगों के विचार में लगे, उसी पर आमल करें तो उत्तम होगा ।           &lt;br /&gt;  &lt;br /&gt;                    जारा ध्यान देने की बात हैं कि आप कितनी  भी अच्छी विकल्प ढूंढ ले ,क्या फिर भी आरोप से रहित रह सकेंगें ... ? मुझे लगता हैं कि सम्भव ही नहीं हैं ॥  मैंने जीवन में ऐसे कुछ कार्य जो बहुत ही इमानदारी पूर्वक किया हैं ,उसका फल भी लोगों को अच्छा ही मिला ,फिर भी आरोपों से बच नहीं सका ....             &lt;br /&gt;                      हिन्दी का विकास बहुत जरूरी हैं ,जो भी प्रयत्न और जैसी भी प्रयत्न ,आपलोगों ने शुरू  किया हैं उसका एक इतिहास बनेगा .... लोग चाहे कुछ भी कहें पर न्यु का ईंट तो दफन हो जाता ,और उस पर मंजिल खड़ी  होती हैं ,आप तो न्यु की ईंट हो ,तो दफन होने में किसकी भय हैं ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरे संदेश याद रखने की बात कहकर सिरिल जी ! आपने बडप्पन का परिचय दिया हैं ,ईश्वर आपको सही दिशा दे ,आपलोगों को नई उमंग दे ,हिन्दी की विकास के लिए आप लोग कृत संकल्पित रहें ...यही प्रार्थना करता हूं ............&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3775861773872345642?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3775861773872345642/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_29.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3775861773872345642'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3775861773872345642'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_29.html' title='ब्लोगवाणी के सिरिल जी को टिपण्णी पर एक पत्र --'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-5483408888276547110</id><published>2009-09-28T23:56:00.000-07:00</published><updated>2009-09-29T00:13:12.958-07:00</updated><title type='text'>ताकि तकनिकी मानव को समझने में भूल न हो जाए--ब्लॉगवाणी के टीम को संदेश</title><content type='html'>ब्लागवाणी टीम को विदाई दिजीए ...यह समाचार सुनते ही मुझे दु:खद आश्चर्य हुआ ,मैंने लगातार अनेक बार ब्लागवाणी पर जाने की कोशिस करता रहा ,मुझे विस्वास ही नहीं हो रहा था कि ब्लागवाणी बंद हो सकती हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मैंने&lt;/span&gt; तो किसी तकनिकी कारण से खराबी होने के कारण क्षणिक परेशानी समझते हुए कोशिस पर कोशिस किए जा रहा था ,मैंने सोचा हिन्दी समाचार पत्र सा एक स्वतंत्र ब्लागवाणी बंद हो ही नहीं सकता हैं ,और भला यह बंद क्यों ? ब्लागवाणी को कोई परेशानी तो हैं नहीं ,दिनों दिन वाणी --दिन दुगणी रात चौगुणी बढत के साथ आगे बढ रही है। भला मेरे जैसे लोग अन्दर की बाते कब समझता हैं ,जब मुझे कोई झकझोर न दे, तब तक तो मैं अपनी ही धुंध में पड़ा रहता हूं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ब्लागवाणी भी तो एक समाचार पत्र जैसे ही हैं ,समाचार पत्र में खिंचातानी तो होगी ही , पक्ष -विपक्ष में अनेक बात सामने आना हैं, और आना भी चाहिए ,कुछ बाते कुछ लोगों को अच्छी लगेगी , कुछ को उसी बात बुरी भी लग सकती हैं ,इस दुनियॉं में सभी को खुश रखना सम्भव ही नहीं हैं ।&lt;br /&gt;यदि किसी ने ब्लागवाणी पर कोई आरोप लगाया हैं ,तो उससे ब्लागवाणी को तो एक नई सोच ही मिला ना ? नई सोच तो एक दिशा देती हैं । ब्लागवाणी के टीम को विशाल हृदय का परिचय देना चाहिए,आरोप लगा हैं तो डटकर उसका मुकाबला किजीए ! आप अगर सही हैं, तो आपका बाल बॉका कोई नहीं कर सकता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब से ब्लागवाणी से जुडा हूँ , एक लगाव सा हो गया हैं, यदि आपके टीम को भी हमारे साथ कोई लगाव नहीं है, और मात्र आरोप -प्रत्यारोप के भय से इसे बंद करने तक सोचते हैं, तो कृपया हमेशा के लिए ब्लागवाणी बंद कर दे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यदि मैं चिट्ठा जगत में जाकर कुछ ब्लोगारों को नहीं पढा होता ,तो मैं विस्वास ही नहीं कर सकता था,कि ब्लागवाणी बंद कर दिया गया है । मैंने तो मेरे मूर्खता पर मन ही मन हंसा और आश्चर्य भी हुआ ,ऐसा लगता हैं कि दिमाग को और अधिक तेज करना होगा ,ताकि आज के तकनिकी मानव को समझने में काई भूल न हो जाए .....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-5483408888276547110?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/5483408888276547110/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_28.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5483408888276547110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5483408888276547110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_28.html' title='ताकि तकनिकी मानव को समझने में भूल न हो जाए--ब्लॉगवाणी के टीम को संदेश'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-512309115278460592</id><published>2009-09-27T01:42:00.000-07:00</published><updated>2009-09-27T02:42:24.079-07:00</updated><title type='text'>कम्युनिस्ट गाली बनकर रह गया ---सहयोग के लिए बहुत बहुत आभार</title><content type='html'>देश में क्रान्तिकारि परिवर्तण की आवश्यकता क्यों हैं ? क्रांति की बातें तो अनेक लोग और दल करती हैं ,परन्तु जब व्यवहारिक धरातल पर  कार्यकलापों का मुल्यांकन किया जाता हैं, तो देश में अपवाद छोडकर सभी से निराशा ही निराशा .....कम्युनिष्टों  ने तो हद ही कर दी, प.बं कम्युनिष्टों  का गढ माना जाता है ,वहॉं सिंगुर की घटना ,लालगढ की घटना और बंगाल की आर्थिक सामाजिक स्थितियों को देखते हुए हम नहीं कह सकते कि कम्युनिष्ट  गरिबों और मजदूरों का दल हैं ।                        &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;            कम्युनिष्ट शासन ,गरिबों पर गोलीयॉं चलाती हैं और उनसे जमीन छिनकर अमीरों को बॉंटती है , बंगाल में तो कम्युनिष्टों  का गुण्डागर्दी  खुलेआम चलने के साथ ही साथ यदि कोई विरोध करें तो उसे भी मौत के घाट उतार दिया जाता हैं ।                       &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                      चौथ वसूल करके दादाओं का धंधा चलता हैं ,राष्ट्रीय  रोजगार योजना हो या गरिबी भत्ता सभी में दादाओं का हिस्सा होता हैं । सरकार को सभी खबर हैं फिर भी मौन है ,कम्युनिष्टों  की ऐसा  घिनौना रूप जिसे देख और सुन कर शर्म  से सिर झुक जाती हैं ।                       &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                   उक्त घटनाओं को देखते हुए आज भी कुछ लोग  अपने आप को कम्युनिष्ट  कहते हैं, उनका तर्क हैं कि  मार्क्स और माओ दोनों के सिद्धान्त अच्छा हैं ,मै उन लोगों को पुछता हूं कि यदि सचमुच सिद्धान्त अच्छी होती तो अन्तिम भी अच्छा होना चाहिए था ,किन्तु जब अन्तिम ठीक उल्टा हो रहा है तो किस सिद्धान्त का  तारिफ किया जाए ?                                         &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                      एक गायक जिसे साधारण बोलचाल में भले ही अच्छा न लगता हो , लेकिन गाने के पश्चात लोगों का मन मोह लेता है, ऐसी स्थिति को मैं अन्तिम स्थिति कहता हूँ  । इसका अर्थ यह हुआ कि सिद्धान्त चाहे कुछ भी हो, पर उसकी  अन्तिम स्थिति यदि कुरूप हो ,घिनौना भरा हो ,नफरत योग्य हो ,तो उस सिद्धान्त का समर्थन किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                माओवादिओं के नाम से देश में जो कुछ भी हो रहा हैं ,क्या उन सभी का समर्थन करना पडेगा ? किसी की बहु बेटी को जोर-जबरदस्ती घर से उठा कर माओवादी बना देना , उनके विरोध करने पर हत्या कर देना ,घर को जला देना , स्कुलों को जला देना , बिजली खम्भों को उखाड़ कर सभी को अंधेरे में रहने को मजबुर कर देना , गरिबों के लिए उपलब्ध करवाए जा रहे अनाजों को लूट लेना , आदी ...अनेक घटनाओं का उल्लेख किया जा सकता हैं, जो की  अमानवीय और असभ्यता से परिपूर्ण है।&lt;br /&gt;                    अमीर भी अत्याचार करते  हैं और मैं  उन अमीरों को फूटी ऑखों से देखना भी पसन्द नहीं करता ,परन्तु माओवादी के नाम से गरिबों पर अत्याचार कौन सी सिद्धान्त में आता हैं ?&lt;br /&gt;                   भाई शरद कोकास ने मुझे प्रमाण पत्र दे दिया कि मैं भी मार्क्स  का ही समर्थक हूँ  , भाई शरद ! कृपया मुझे किसी वाद पर बॉधने का प्रयत्न न करें ,मैंने पूर्व पोस्ट में जो कुछ भी लिखा है ,उन सभी तथ्यों को मार्क्स  समर्थन नहीं कर सकते है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                       गुणानुपात का अर्थ यह हैं कि सुविधा, गुण के अनुपात में मिलना चाहिए ,जो अधिक गुणी है समाज उसे अधिक सुविधा दें ,शारिरीक श्रम और मानसीक श्रम में बहुत अन्तर हैं ,मैं यह भी मानता हूँ  कि दोनों श्रम एक दूसरे का पूरक भी हैं, परन्तु जब आनुपातिक रूप से मानसिक श्रम अधिक हो तो उसे आनुपातिक रूप से शारीरिक  श्रम के अपेक्षा अधिक सुविधा देना आवश्यक है ।&lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;               एक साफ्टवेयर इंजिनीयर को एसी की आवश्यकता  हो सकती है ,परन्तु एक रास्ते में फावड़ा चलाने वाले को वह उपयोगी नहीं हैं । एक साधारण शिक्षक को पाठशाला जाने के लिए साईकल  की  आवश्यकता हो सकती हैं परन्तु एक अच्छी डाक्टर को मरीज देखने के लिए और त्वरीत सेवा उपलब्ध होसके इसलिए उसे मोटर साईकल या कार या हवाई जहाज की व्यवस्था किया जाना आवश्यक हैं ।&lt;br /&gt;          प्राकृतिक संशाधनों का उपयोग मात्र धन होने पर ही उपलब्ध करवाना ठीक नहीं है। जैसे पैट्रोल   डीजल,आदी का उपयोग आवश्यकतानुसार ही करना चाहिए ।                         &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        समीर भाई ,रतन सिंह जी , राकेश झा जी को धन्यवाद १ सुमनजी !  हो सकता हैं इस पोस्ट द्वारा आपको  कुछ टिप्पनी का झलक मिल जाएगा ,काजल जी ! मानव निर्मित व्यवस्था में यदि  सडन पैदा हो गई हो तो उपचार भी जरूरी है !&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-512309115278460592?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/512309115278460592/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_27.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/512309115278460592'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/512309115278460592'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_27.html' title='कम्युनिस्ट गाली बनकर रह गया ---सहयोग के लिए बहुत बहुत आभार'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4156087600457933452</id><published>2009-09-26T02:59:00.000-07:00</published><updated>2009-09-26T03:19:58.122-07:00</updated><title type='text'>ब्लोगर बंधुओं मुझे आपका सलाह चाहिए !</title><content type='html'>ब्लोग लिखकर क्या फायदा ! समय ,स्वास्थ्य और धनहानि के सिवाय कुछ भी हॉंसिल नहीं होता ,रात-रात भर जगते हुए कुछ लिखना, जिससे समाज और देश का भला हो सकें ,परन्तु मैं यह देख कर हैरान हो जाता हूँ कि अधिकांश ब्लोगर्स स्वप्रचार में ही व्यास्त रहते हैं । कुछ पोस्ट उच्चकोटि के होते हुए भी लोग उसे पढना नहीं चाहते ,स्वप्रचार एक विज्ञापण के सिवाय कुछ भी नहीं हैं । ब्लोग लिखना आज सस्ता विज्ञापण साबित हो रहा है ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;               अब&lt;/span&gt; पढने वाले भी कितने है ...अधिक पढे जाने वाले पोस्ट लगभग 175 से 200 तक सिमीत हैं ,जितने समय और धन बरबाद हो जाती हैं वही साधन यदि समाचार पत्रों में पर्चा छपवाकर बटवा दिया जाए, तो ज्यादा उपयोगी और असरदार होने की सम्भावना अधिक हो जाने से मुझे लगता है कि ब्लोग में अधिक ध्यान देना सही प्रतित नहीं होता ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;             मै&lt;/span&gt; उक्त बातों से सम्पूर्ण सहमत भी नहीं हूँ ...हर सोच की दो पहलू होती हैं ,पहला जो तत्काल दिमाग में आता हो और दूसरी तो दिमाग सोचने के लिए तैयार ही नहीं होती ,मनोवैज्ञानिक क्या कहते है यह मुझे पता नहीं , परन्तु मैं दूसरी पहलू के लिए सभी ब्लोगर्स बन्धुओं और मेरे अनुसरणकर्ताओं से निवेदन करना चाहता हूँ कि जिस अनछुए पहलू को मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कृपया मुझे मार्गदर्शन करने का कष्ट करें ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                 देश&lt;/span&gt; में क्रान्तिकारि परिवर्तण की आवश्यकता हैं ,लेकिन जब क्रान्ति की बाते आती हैं तो कृपया मुझे कोई कम्युनिष्ट न कहे ,यह शब्द मुझें आज गाली जैसी लगती हैं । फ्रान्स में हाब्स,लॉक,रूसो जैसे तिकड़ी ने एक इतिहास रचना कर अमर हो गए ,मैं फ्रांस की क्रांति से अधिक प्रभावित हूँ&lt;br /&gt;         &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                 मुझे&lt;/span&gt; समाजवाद से लगाव तो हैं परन्तु आयात किया गया समाजवाद से कोई सरोकार नहीं हैं ,आज समाजवाद का तो आधार ही नहीं रह गया हैं । रूस ,चीन ,जैसे समाजवादी देश अमेरिका के पिछलग्गु बन गए हैं,ऐसी स्थिति में समाजवाद एक सपना साबित हुआ ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                 सभी&lt;/span&gt; को बराबर का दर्जा नहीं दिया जा सकता हैं ,प्राकृतिक नियमानुसार सभी प्राणी को जीने का अधिकार हैं ,कम्युनिस्टों ने तो मात्र विचार भिन्नता के कारण से उत्पन्न भावनाओं को कुचल देता हैं ,जब विचार ही नहीं रहेगा तो आगे बढने की साधन भी समाप्त हो जाता हैं ,इसिलिए आज कम्युनिस्ट आन्दोलन मृत प्राय: हो चुका हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                          मैंने&lt;/span&gt; विचारों से सम्बन्धीत और इन विचारों से देश में एक क्रान्तिकारि परिवर्तण कैसे हो सकें इस बात को अधिक महत्व देता हूँ ,अत: सभी बन्धुओं से विचार जानने को उत्सुक हूँ ,मात्र लिखने के लिए लिखना , किसी भी रूप से मान्य योग्य नहीं हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                           एक&lt;/span&gt; बात स्पश्ट रूप से लिखना भी आवश्यक हैं कि क्रान्ति का अर्थ परिवर्तण से हैं ,वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तण करते हुए जो धन सम्पत्ति मुठि्ठ भर लोगों में केंद्रित हो चुकी हैं उसे उचित इस तरह विकेंद्रियकरण करना जिससे कि धन सम्पदा का लाभ सभी को समुचित हो सकें और समाज में सन्तुलन की स्थिति बनी रहे ,बराबरी की कल्पना मैं नहीं करता । गुणानुपात के मूल्यांकण को आधार माना जा सकता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                    बन्धुओं&lt;/span&gt; याद रखो ....उक्त परिवर्तण का रूप भले ही कुछ बदलता हुआ व्यावहारिक भूमि पर फुलता फलता दिखें ,पर विचारानुसार लगभग परिवर्तण को कोई रोक नहीं पाएगा ,अत: परिवर्तण वेला में साथ देकर युग धर्म का निर्वाहन करना ,सभी का पुणित कर्तव्य हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4156087600457933452?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4156087600457933452/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_26.html#comment-form' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4156087600457933452'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4156087600457933452'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_26.html' title='ब्लोगर बंधुओं मुझे आपका सलाह चाहिए !'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7082065226435254884</id><published>2009-09-24T11:40:00.000-07:00</published><updated>2009-09-24T12:13:58.221-07:00</updated><title type='text'>बालको के चिमनी कांड --बहुराष्ट्रीय कंपनी का भारत में देशद्रोही के सामान हैं--</title><content type='html'>बालको में कल जो हादसा हुआ था लगभग तीस घन्टे बीत जाने पर भी लगातार लाशों का मिलना जारी है।चिमनी के मलवे में अभी अनेक लाश दबे पड़े है ,पता नहीं किन अभागों का कंकाल ही हाथ लगेगा, और यह शिनाख्त करना भी मुस्किल हो जाएगा कि किसका लाश है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                   सूत्र&lt;/span&gt; बताते हैं कि ऐसे अनेक मजदूर हैं जिसके पास कोई प्रमाण पत्र ही नहीं है ,मजदूर ठेकेदार यदि तीस प्रमाण पत्र जारी किया हैं, उसी तीस के बदले पंचास -साठ मजदूर कार्य करने चले जाते थे ,यह कैसे सम्भव होता हैं ,यह मुझे पता नहीं, पर कहते है लेबर इन्सपेक्टर के साथ सॉंठ- गाठ करके ऐसा किया जाता है ,जो जानते हैं कि चिमनी बनाते समय इस तरह की हादसा होता हैं और मौत होने पर कम मुआवजा देना पड़े , इसलिए पहले से ही तैयारी किया जाता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                 आज&lt;/span&gt; बालको प्रबंधन और जीडीसीएल पर गैर इरादा हत्या का मामला दर्ज किया गया हैं ,304 ए धारा लगाकर प्रथम सूचना थाने में दर्ज कर न्यायिक जॉंच की आदेश भी शासन ने दे दिया हैं , पर इससे क्या हासिल होगा , सभी जानते हैं ,जॉंच का समय बढता चला जाता हैं और तब तक सारे सबूत भी एक एक करके &lt;span class=""&gt;नष्ट &lt;/span&gt;हो जाने से अपराधी अन्तिम समय में न्यायिक दण्ड से बच निकलते है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                    यदि&lt;/span&gt; मुम्बई होटल ताज का घटना हो तो देश के सभी दिल थाम कर दुआ के लिए निकल पड़ते है ,हिन्दु, मुस्लिम,इसाई सभी सारे भेद भाव भुल कर सहयोग का हाथ बढाते हैं ,देश में आक्रोश का माहोल बन जाता है । आज सैकडों लोगों का जान चला गया ,लाश अभी दबे पड़े है ,लाश सड़ चुकी हैं ,बदबु आने लगी है ऐसी स्थिति में बालको प्रबंधन के सारे जिम्मेदार लोग घटना स्थल पर जाना भी मुनासिब नहीं समझे ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                   बालको&lt;/span&gt; प्रबंधन के स्थानीय प्रमुख श्री गूंजन गुप्ता जो 24 घन्टे के बाद घटना स्थल पर पहुँचने के कारण उपस्थित मजदूर भड़क गए और उसे मारने के लिए दौडाए ,उसके साथ भी अप्रिय घटना घट सकती थी ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                प्रत्यक्षदर्शीयों&lt;/span&gt; का कहना है कि लगभग तीन बज कर तीस मिनट को यहॉं ऑंधी और कड़कते हुए बिजली चमकने लगी एवं कुछ ही समय पश्चात चिमनी धराशायी हो गया ,यह भी बताया जा रहा हैं कि पहले तो चिमनी लगभग बीस मिटर जमीन के अन्दर धंश गई ,और बाद में झुकते हुए गिरी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;            प्रबंधन&lt;/span&gt; इसे एक प्राकृतिक घटना के साथ जोड़कर अपना पक्ष मजबुत बनने मे लगी हुई हैं ।यह धारणा बनाई जा रही हैं कि चिमनी तेज ऑंधी और बिजली गिरने के करण धराशायी हुई हैं । क्या तेज ऑधी और बिजली गिरने के कारण निर्माण कार्य धराशायी हो जाती हैं ? कुतुब मिनार क्यों नही गिर गई ? हजारों वर्षों तक आज भी दिल्ली में शान से खड़ी है । आज विज्ञान इतनी तरक्की कर चुकी है , फिर भी इस तरह की गिम्भर हादसा होना किसी भी तरह से प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;              कंक्रिट&lt;/span&gt; के मजबूत दीवारों से निर्मित लगभग 250 फीट की चिमनी जब गिरी तो कांक्रिट में फंसे &lt;span class=""&gt;छड़ &lt;/span&gt;को आसानी से हाथ से खिंचकर निकाला जाना आसान था जबकि साधारणत: छड को कंक्रिट से अलग करना बहुत कठीन होता हैं । एक बात और हैं कि १२०० मेगावाट के बिजली सयंत्र को मात्र ९०० करोड में चीन के कंपनी ने तैयार करने का ठेका लेता है और चिमनी में ३२ एम एम के छड़ के स्थान में २२ एम एम का छड़ लगा कर खर्च को कम किया गया ,जो गुणवत्ताहीन निर्माण की पोल खोलने के लिए प्रयाप्त हैं ।&lt;br /&gt;     &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;              एक&lt;/span&gt; बात यह भी हैं कि बालको में चीन के सिपको द्वाराएक और बिजली सयंत्र का निर्माण करते समय आठ लोगों की मृत्यु हो चुकी थी ,फिर भी दूसरी सयंत्र का ठेका सिपको को देना ,सन्देहास्पद हैं । तमाम तथ्यों पर निश्पक्ष जॉच कर दोशी का कठोर दण्ड देना आवश्यक है । यह देशद्रोही के समान अपराध हैं !&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;        देशहित&lt;/span&gt; के मुद्दों पर समस्त ब्लोगारों को एक सशक्त दस्तक देना भी समयानुकुल जरूरी है ,अन्यथा लेखनी उठाना और प्रजातांत्रिक देश के नागरिक कहना किसी तरह उचित नहीं हैं । आशा करता हूँ कि ब्लोगर बन्धु ज्वलन्त मुद्दों पर अपना प्रतिक्रिया अपनी तरिके से अवश्य दर्ज करेंगें ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7082065226435254884?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7082065226435254884/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html#comment-form' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7082065226435254884'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7082065226435254884'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html' title='बालको के चिमनी कांड --बहुराष्ट्रीय कंपनी का भारत में देशद्रोही के सामान हैं--'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3461266451183312538</id><published>2009-09-23T11:52:00.000-07:00</published><updated>2009-09-23T12:34:37.558-07:00</updated><title type='text'>गुणवत्ता विहीन बालको विद्युत सयंत्र की चिमनी गिरा-- सैकड़ो घायल ,इंजिनियर ओर  मजदूरों की  मौत --मलवे में दबे हैं लाश</title><content type='html'>कोरबा -बालको -का नाम पहले जो नहीं जानते थे ,आज के बालको हादसे के बाद भारत में ही नहीं बल्की दुनियॉ के लोग जानने लगेंगे । आज लगभग 3 बजे बालको द्वारा स्थापित 1200 मेगावाट के विद्युत सयंत्र की चिमनी का निर्माण कार्य में लगे के लिए काला दिवस साबित हुआ , मजदूरों को क्या पता था कि आज उनके जीवन का अन्तिम दिन होगा ,100 मिटर लगभग 250 फीस उंची कुतूब मिनार जैसे चिमनी बनने का ठेका सिपाको ,चीन के कंपनी को दिया गया था ,मात्र कुछ कागज के नोटों के लिए बालकों के प्रबंधन द्वारा गुणवत्ता विहीन कार्य करने मे माहीर चीन के सिपाकों कंपनी को 1200 मेगावाट विद्युत संयत्र का ठेका दिया गया ,यह कंपनी देशी कंपनी भेल से बहुत ही कम किंमत में निर्माण कार्य करता है ,जोकि मानक किंमत में कभी सम्भव ही नहीं होता ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                   बालको&lt;/span&gt; जिसका सीइओ अनिल अग्रवाल है ,कभी बालको में कबाड खरीदकर अपना जीवन यापन करता था ,एका एक करोडों का मालिक कैसे बन बैठा ,यह जॉंच का भी विषय हैं । एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के दलाल जो इंग्लैण्ड से संचालित होता हैं , भारत में प्रवेश कर वेदान्ता के नाम से व्यापार करने लगा ,आज अंग्रेज प्रत्यक्ष रूप से भारत न आकर यहॉं के पीट्ठुओं से अपना काम करवा लेता है ,यदि यहॉं के अच्छा दलाल अंग्रेजों के लिए फैदेमंद हो तो उनके कंधे पर बन्दुक रख कर भारत में लूट का साम्रज्य बनाना बहुत आसान है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                      अनिल&lt;/span&gt; अग्रवाल ने यही काम भारत में किया हैं ,किसी जमाने में मिर्जाफर ने देश के साथ जो गद्दारी किया था ,जिसका परिणाम देश के बच्चे -बच्चे आज जानते है। भारत में फिर इतिहास दोहराया जा रहा है।&lt;br /&gt;            &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                     चिमनी&lt;/span&gt; भर भरा कर गिर पड़ी ,चिमनी के ऊपर काम कर रहे मजदुर, इंजिनियर ताश के पत्तों की तरह नीचे बिखर गए ,250 फीट नीचे आते आते अधिकांश मजदूरों का जीवन लीला समाप्त हो चुका था , लाशों को पहचान पाना मुस्किल हो चुका है ,23 लाश मलबे से निकाल लिया गया है ,लगभग 40 मजदूर और इंजिनियर चिमनी के मलबे में दबे पड़े हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                        संयोग&lt;/span&gt; से हादसे की स्थान में जाने का मुझे मौका मिल गया था , गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य देखकर मैं हैरान और आश्चार्य चकित था , मजदुरों और कर्मचारियों के जीवन के साथ बालकों में जिस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा हैं, उसे दिखकर और सुनकर मन हाहाकार कर उठता हैं --&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                   मुझे&lt;/span&gt; याद हैं जब बालको का निजीकरण हो रहा था और मजदुरों ने 67 दिन का ऐतिहासिक आन्दोलन कर इसका विरोध किया ,परन्तु भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर लाभ में चल रही बालको को मिटि्ट के मौल वेदान्ता समूह को दान में देकर ,पता नहीं अंग्रेजों के एक बहुराष्ट्रिय कंपनी को क्यों अनुग्रहित किया । लगभग पॉच हजार करोड़ की राष्ट्रिय सम्पत्ति को विनिवेश के नाम पर मात्र पॉच सौ करोड़ में देकर ,भष्ट्राचार का मिशाल कायम किया गया ,शर्म की बात हैं ....गद्दारी की चरम सीमा !!!!!&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                    बालको&lt;/span&gt; का अर्थ भारत एल्युमिनिय कंपनी ,वेदान्ता समूह ने एल्युमिनियम कंपनी का ५१ प्रतिशत अधिग्रहरण करते हुए मालिक बन बैठा , बालको में एक केप्टिक विद्युत सयंत्र पहले से ही लगाहुआ होने के कारण विद्युत आपूर्ति में को कठिनाई नहीं होती थी ,वेदान्ता समूह ने देखा कि कोरबा में कोयला अधिक उत्पादन होता हैं अत: एल्युमिनियम के बहाने घुसपैठ करते हुए विद्युत संयत्र बनाने से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                     विद्युत&lt;/span&gt; संयत्र बनाने के लिए बालको का भूमि जिसे भुस्वामीओं ने एल्युमिनियम सयंत्र के लिए प्रदान किया था ,उसी भूमि में दो -दो विद्युत सयंत्र निर्माण करने का षडयंत्र यहॉं के शासन प्रशासन को उपकृत करके रचा ,हजारों एकड़ भुमि अवैध कब्जा करके ,हजारों हराभरा पेड़ों को रातों रात हत्या करते हुए जिस विकास बनाम विनाश का नंगा नाच कोरबा में शुरू किया गया, उसका मिशाल विरले ही देखने सुनने को मिलता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                     चिमनी&lt;/span&gt; प्रकरण में बालको प्रबंधन ,अनिल अग्रवाल वेदान्ता समूह के आका जो इंग्लैण्ड में बैठे हुए हैं ,चीन के सिपको ,स्थानिय प्रशासन ,छत्तिसगढ शासन सभी दोषी हैं ,रमन सरकार मात्र जॉच का आदेश दे कर अपना कर्तव्य से बच नहीं सकते । छत्तिसगढ को बंजर और प्रदूषित करने में डा.रमन सिंह अपराधी के श्रेणी आ जाते हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3461266451183312538?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3461266451183312538/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_23.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3461266451183312538'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3461266451183312538'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_23.html' title='गुणवत्ता विहीन बालको विद्युत सयंत्र की चिमनी गिरा-- सैकड़ो घायल ,इंजिनियर ओर  मजदूरों की  मौत --मलवे में दबे हैं लाश'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-5599104864053783097</id><published>2009-09-21T02:35:00.000-07:00</published><updated>2009-09-21T03:36:52.581-07:00</updated><title type='text'>सोना बिन सब सुन ----</title><content type='html'>सोना में आग लग गया हैं ,अब लगातार देश के सभी लोग देख रहे हैं किन्तु इसे बुझाने के लिए कोई सामने नहीं आ रहे हैं ,खाने पीने के सभी चीजों का तो क्या कहने ....सरकार में बैठे तिकड़ी तो इस मामले में झुठा नम्बर एक साबित हुए ,लगातार छ: साल का मेरे पास लेखा जोखा हैं ,महंगाई और शेयर बाजार पर इन तिकडियो ने कब कब झुठ बोल कर अपनी चमड़ी बचाई हैं ।&lt;br /&gt;                        &lt;br /&gt;                          अभी मोंटेक सिंह आहलुवालिया ने कहा कि छ: माह में मंदी का अन्त हो जाएगा ,यही महाशय ने एक बार कहा था कि तीन माह में महंगाई खत्म हो जायेगा ,तीन साल से अधिक होजाने के बाद भी न महंगाई खत्म हुई और न ही अन्य समस्या ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                      एक&lt;/span&gt; बात अच्छी हो गई कि लोग धीरे -धीरे ही सही लोगों का भ्रम तिकडियो से टुटने लगी हैं ,अब नाम लेना तो अच्छा नहीं लगता पर बहुत लोगों को तिकड़ी का अर्थ मालूम नहीं हैं , तिकड़ी याने मनमोहन ,मोटेंक,और चिदम्बरम देश को बरबाद करने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते है 1&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                   जमाखोरी&lt;/span&gt; ,भ्रष्ट्राचारी से ही तो अधिकांश नेताओं का पेट पलता हैं ,अभी कुछ नेताओं ने सादगी अपनाने का ढोंग रच रहे है। सौ चूहे खाकर बिल्ली चले हज को वाली कहावत चरितार्थ होने लगा हैं । नेताओं के हाथ में एक सूत्र लग गई हैं वह हैं भारतीय जनता सादगी पसन्द करती है ,आप लंगोट लगा कर या नागा साधु सा भेष बनाकर समाज सेवा में कूद जाईए ...देखिए फिर क्या मजा आता हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                  साधुओं&lt;/span&gt; के लिए रातों रात महल जैसे आश्रम तैयार हो जाता हैं, अब आप ऐश किजीए ।&lt;br /&gt;मैंने शुरू किया था सोना में आग लगने की बात पर ,एक मानसीक कमजोरी इस देश में प्राचीन काल से रही है। अब कमजोरी कहे या शौक ,धन सम्पत्ति तो इस देश कमी थी नहीं ,अनेक बार लूटते रहने के बाद भी सोना-चॉदी का अभाव इस देश में कभी नहीं रहा हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                        विवाह&lt;/span&gt; आदी के समय गरीब से गरीब भी कुछ सोना लड़की और लड़के को देना अपना फर्ज समझते हैं ,यही मानसीकता को भाप कर जमाखोरों को मजा आ गया हैं ,सोना -चॉदी ,खाद्यान्न जैसे जमाखोरी करके कित्रिम महंगाइ बाजार में लाद कर अरबों का खेल इस देश में शुरू हो चुका हैं । अब तो चाहते हुए भी अधिक सोना विवाह आदी के समय देने की रिवाज ही खत्म हो रहा हैं सोना दान करने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण यह भी हैं कि यदि नव दम्पत्ति के सामने कभी आर्थिक विपत्ति हो तो सोना उस विपत्ति से उबारने का अच्छा माध्यम हो जाता हैं ।&lt;br /&gt;         &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                        एक&lt;/span&gt; सात्विक सोच को शोषण का माध्यम बनाया गया हैं ,सरकार समाज सब चुप हैं ,यह विचार करके कि सोना खाना नहीं हैं अत: इस पर ध्यान क्यों दिया जाए । पर बात ऐसी नहीं हैं ,सोना जीवन में अनेक सुरक्षा प्रदान करता हैं ,अत: इस कित्रिम महंगाइ के विरोध में हम सभी को एकत्रित हो कर जरूर लड़ना चाहिए ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                            मैं&lt;/span&gt; तो सोचता हूँ कि सोना खरीदना बंद कर पोस्ट आफिस या बैंक की ओर नजरे दौड़ाना अच्छी बात हो सकती हैं । शेयर बाजार जैसे उतार चढाव वाली धंधा जुआरिओं को शोभा देता हैं । सभ्य मनुष्य इससे तो दूर ही रहना पसन्द करते हैं ,जिसे रात की नींद और सुख चैन खत्म करना हो ,रक्त चाप से ग्रसीत होना हो तो शेयर बाजार में चले जाए ,रातों रात करोड़पति ओर रातों रात खकपति दोनों का मजा लिया जा सकता हैं । करोड़पति बनने के जुनून परिवार को बरबाद कर देती हैं&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                              सोना&lt;/span&gt; -चॉंदी तो भारत का जीवन रेखा हैं हम चाहे कुछ भी कहे पर सोना बीन सब सून वाली बात यहा लागू होता हैं । इसलिए सोना पर अंकुश लगाते हुए कित्रिम महंगाइ को राकना अति आवश्यक हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-5599104864053783097?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/5599104864053783097/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5599104864053783097'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5599104864053783097'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html' title='सोना बिन सब सुन ----'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7661878061840048080</id><published>2009-09-20T13:57:00.000-07:00</published><updated>2009-09-20T14:33:31.697-07:00</updated><title type='text'>जब भगवान मेरे सामने रोने लगे ----</title><content type='html'>दुनियॉं को बनाने ,सवॉरने वाले सर्वशक्तीमान भगवान को कुछ भी नाम से पुकारे ,पर पुकार तो एक ही स्थान में ही जाकर रूक जाता हैं ,जैसे पिता को पिताजी कहें,पापा कहें ,कहीं -कहीं  भैया ही कहते हैं ,पिताश्री कहें ,फादर कहें या   अन्य भाषाओं में कुछ भी कह ले पर पिताजी ही प्रतिक्रिया करते हैं ।                               ईश्वर को भी अनेक नामों से पुकारने पर भी ईश्वर तक आवाज जरूर पहुंचता  हैं । लेकिन मैंने कभी ईश्वर को रोता हुआ न सुना हैं, और न देखा हैं । परन्तु मेरे साथ तो आज कल कुछ अजीब -अजीब घटना घटने लगी है ।&lt;br /&gt;                              कल ही भगवान मेरे सामने आकर रोने लग गए ,मैंने पूछा कि भगवान आप क्यों रो रहे हैं ? आपको तो कोई कष्ट  रूला नहीं सकता , पल भर में सारे दु:ख -कष्टों  को हरने वाले आप ...आज मेरे जैसे दो कौड़ी के आदमी के सामने रो रहे हैं !                                                             &lt;br /&gt;                             मैंने कहा प्रभू यह तो मुझसे देखा नहीं जाता ,और विश्वास भी नहीं हो रहा हैं कि सत्य ही आप भगवान हैं ? मैंने जेब से रूमाल निकाला और ऑंखो को पोछने लगा और कहा भगवान यदि आप भगवान नहीं  हैं, फिर भी मुझे आप के रोने से कष्ट  हो रहा हैं,क्या मैं आपका कष्ट को  दूर कर सकता हूँ ?                                                    &lt;br /&gt;                      भगवान बोले राय ! तुमको पहले मुझ पर विश्वास करना होगा कि मैं भगवान ही हूँ  ,इसके पश्चात ही मेरे दु:ख का कारण बताउंगा ।मैं तो आज बुरा फंश गया ,भगवान को मैंने कहा कि प्रभू ! मैं किसी के कहने पर कैसे विश्वास करू कि आप भगवान हैं ? आज तो नकली भगवान असली भगवान से अधिक सुन्दर और चमत्कारिक होते हैं ,भारत जैसे देश में तो आपके जैसे असली भगवान की आवश्यकता ही नहीं हैं ।                                                   &lt;br /&gt;                          यहॉं तो एक नहीं हजारों भगवान हैं ,फिर आपके कहने से मैं आपको  भगवान कैसे मानलूँ  ?   भगवान तो जैसे आगबबूला हो गए ,बोले राय मैं नराज होता हूँ , तो प्रलय हो जाता हैं--&lt;br /&gt; परन्तु तुम्हारे सामने तो रो रहा था ,अब देखो मेरे  विश्व रूप ......सचमुच भगवान ने मेरे सामने विश्वरूप दिखाया ,मैं रोमांचित हो रहा था और रूप देखकर भयभीत भी...                                           &lt;br /&gt;                              इतने में भगवान ने कहा बस आगे मेरे बारे में कुछ न लिखना.......                 &lt;br /&gt;       अब विश्वास हो गया कि नहीं ? मैं क्या कहूँ  ,एका एक भगवान के चरणों में साष्टांग  हो गया और बोला प्रभु मुझे क्षमा करना ,मैं तो अबोध हूँ , नराधाम हूँ  ,द्वापर के अर्जुन को जो रूप आपने दिखाया था आज विश्व में मैं दूसरा हूँ , जिसको विश्व रूप का दर्शन  हुआ हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                                            मैंने कहा प्रभू अब तो आप जो भी बोलेंगे वही करूंगा ,जल्दी -जल्दी बताईए कि  क्या करने से आपका रोना बंद होगा ? प्रभुबोले ...सुनो राय! अभी -अभी गणेश जी के पूजा के समय लोगों ने नदी  नालों  में इतनी कचरा  भर दिया कि सालों तक देश के लाखों कल कारखाने से निकलने वाली मैले से अधिक है। अब दुर्गा  पूजा के बाद नदियों का क्या हाल होगा वहीं सोच -सोच कर मैं रो रहा हूँ   ।                                    &lt;br /&gt;                        दूनियॉं में जितनी प्राणी हैं उनके लिए शुद्ध  जल तो क्या अशुद्ध पानी की व्यवस्था मैं कैसे कर पाउंगा, मेरे द्वारा बनाए गए सारे व्यावस्था तो  मनुष्यों  ने बिगाड़ दिया हैं ,जिसके कारण वर्षा  भी समय से नहीं दे पा रहा हूँ  ,जिस दूनियॉं को मैंने बनाया हैं उसी दुनियॉं को आखों के सामने बरबाद होते देखना पडेगा ? यह सब सोचता हुआ रो रहा हूँ  ।  तुम जरा इस लोगों को समझाना कि दशहारा में मूर्तियों का विसर्जन नदी नालों में न करे उसके लिए अन्य व्यवस्था किया जा सकता हैं ।                                          भारत वर्ष  में तो शरीर से आत्मा चले जाने के पश्चात दाह संस्कार और दफनाने का रिवाज हैं ,मूर्तियों को दोनों विधीयों से कोई एक विधी द्वारा शान्ति किया जा सकता है । यदि ऐसा नहीं किया गया तो मैं प्राणीयों के लिए शुद्ध  जल तो दूर अशुद्ध पानी   भी व्यावस्था नहीं कर पाउंगा ......इतना कहते हुए प्रभु अंतर्ध्यान  हो गए ,परन्तु रोने की आवाज आज भी हर रात को मेरे कान में गूंजता  हैं ......पता नहीं प्रभु को कब तक रोना पड़ेगा  ......................................&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7661878061840048080?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7661878061840048080/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_20.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7661878061840048080'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7661878061840048080'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_20.html' title='जब भगवान मेरे सामने रोने लगे ----'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7535351800322457428</id><published>2009-09-18T11:10:00.000-07:00</published><updated>2009-09-18T11:47:05.729-07:00</updated><title type='text'>रंजना जी ! राष्ट्रभाषा ओर राष्ट्रीयता दोनों समृद्धिशाली जरुरी हैं ---</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;      अब&lt;/span&gt; रंजना जी से भी कुछ वार्तालाप करने की चाह हैं । आपने समीर जी के बारे में लिखने पर, कुछ खास अन्दाज में मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित कर दिया , एक बात तो साफ हैं कि भारत वर्ष&lt;br /&gt;में हिन्दी के प्रति एक अलग ही मान सम्मान हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;             मैं &lt;/span&gt;समीर जी के टिप्पणी के लिए कतई नराज नहीं हूँ , ओर न ही समीर जी से असमत हूँ ,मुझे मात्र लकीर की बात पर भ्रम हो सकता हैं । यदि दूसरे से आगे बढना हो तो अपनी लकीर इतनी बढा दो, जिससे कि दूसरे की लकीर अपने आप बौना दिखने लगे,लकीर मिटाने की आवश्यकता नहीं हैं । अब इसी बात पर सारी बबाल खड़ी हो गई क्यूकि मैं लकीर मिटाने पर भी विश्वास करता हूँ ,समृद्धि के लिए लकीर मिटाने की खेल बहुत पुरानी हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;                   बड़ी  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;मछली छोटी मछली को खा जाती हैं ।&lt;br /&gt;ज्ञान और भाषा में बहुत अन्तर हैं , अनेक भाषाओँ का ज्ञाता ,ज्ञानी होगा यह आवश्यक नहीं और ज्ञानी अनेक भाषाओँ का ज्ञाता होगा यह भी जरूरी नहीं हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;                     यदि&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; मूक ज्ञानी हो तो अनेक चमत्कारिक कार्य कर सकता हैं । जिस भाषा के कारण हमेशा गुलामी का अहसास होता हो , वह कितनी ही समृद्धशाली क्यों न हो उससे दूर रहना ही हितकर हैं । अब यदि गुंडों के हाथ में ए के 47 दे दिया जाए तो उसका उपयोग क्या होगा ? मुझे यदि मौका मिले तो मैं देश के सभी को अपनी -अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा ग्रहण के लिए प्रोत्साहित करूंगा । बच्चों को तो कतई अन्य भाषा से शिक्षा देना उचित नहीं हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;                             सरलता&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; से शिक्षा पाने का अधिकार बच्चों को हैं ,हम अन्य भाषाओँ को बचपन से उन पर लादते हैं, जिससे बच्चों का नैषार्गिक विकास रूक जाता हैं । वैज्ञानिक शोध से पता चला हैं कि अन्य भाषा से शिक्षा पाने वाले बच्चों को छ: गुणी अधिक मानसीक परिश्रम करना पड़ता हैं । एक बात और हैं कि हिन्दी इस देश के किसी की मातृ भाषा भी नहीं हैं ,परन्तु आज देश के प्राय: सभी हिन्दी समझते और बोलते भी हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;          देश&lt;/span&gt; के उ।प्र, बिहार ,में तो भोजपुरी, अंगिका , मागधी , मैथली आदी बोली जाती हैं, जिसे हिन्दी भाषी सरलता से समझ जाते हैं । हिन्दी एक सम्पर्क भाषा होने के कारण, मैं इसे गर्व के साथ अपनाने का निवेदन करता हूँ ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;                      आज&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; गली -गली में जिस तरह कुकुर मुत्ते की तरह अंग्रेजी माध्यम के स्कुल खुलते जा रहे हैं और उसे चलाने वाले कोई बहुत विद्वान नहीं होते, वे तो मात्र देश के मानसीक गुलामी का फ़ायदा उठा कर शैक्षणिक व्यपार में लिप्त हैं, अत: ऐसे कुप्रयास का तो विरोध करना ही हैं , जो लकीर को मिटाने के समान होगा । इसी बात को मैं अपनी तरिके से निवेदन करना चाहता हूँ । बड़े होकर जिसे अंग्रेजी भाषी देश में जाना हो, वे अंग्रेजी सीखे ,जो चीन जाना चाहते हैं वे चाईनीज सीखे ,रूस जाने वाले रूसी सीखे ,अरब देश में अरबी सीख कर जाए, कोई मनाही नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;       आपको&lt;/span&gt;  बता दूँ कि मैं प्रतिक्रिया वादी नहीं हूँ ,दिल की गहराई से जो आवाज निकलती हैं उसे बाटंने का प्रयत्न करना चाहता हूँ ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;        राष्ट्र&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; को समृद्धिशाली बनाने के लिए ,राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीयता को समृद्धि बनाना आवश्यक हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7535351800322457428?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7535351800322457428/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_1783.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7535351800322457428'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7535351800322457428'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_1783.html' title='रंजना जी ! राष्ट्रभाषा ओर राष्ट्रीयता दोनों समृद्धिशाली जरुरी हैं ---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8476540802109319243</id><published>2009-09-18T00:16:00.000-07:00</published><updated>2009-09-18T00:49:27.451-07:00</updated><title type='text'>एक मिनट में एस.के.राय को बदल दिया---इसे कहते हैं हिन्दी का ताकत</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;परिवर्तण&lt;/span&gt; ही जीवन हैं ,दुनियॉं में हर वक्त कुछ न कुछ परिवर्तण होता ही रहता हैं ,होना भी चाहिए ,एक ही धारा में चलते -चलते थकान भी महशुस होता हैं 1 आज अंग्रेजी के बहाने मेरे अनेक मित्रों ने मुझे परिवर्तण कर दिया,अंग्रेजी एस.के.राय को हिन्दी राय बना दिया ,अब तो बहुत अच्छा लग रहा हैं ,जी.के. अवधिया जी ने भी इसमें बहुत मदद किया है ,समीर भाई का तो क्या कहने, आपने तो एक सरल तरीका ही टिप में डाल दिया 1&lt;br /&gt;बार -बार सेटिंग में जाकर अंग्रेजी को हिन्दी में करना चाहा ,हर बार असफलता ..... अंकिता को बुला लिया ,अंकिता मेरी बेटी हैं । बोली जादु कर देती हूँ ,एक स्थान में एस.के.राय हिन्दी में लिख कर कॉपी -पेस्ट कर दी ,मैं जिसके लिए घन्टों परिश्रम कर रहा था ,एक मिनट में सचमुच जादु हो गया ...........अब ``मेरे विचार´´ लगता हैं समीर जी के शब्दों में एस.के.राय के विचार हो जाएगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8476540802109319243?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8476540802109319243/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_18.html#comment-form' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8476540802109319243'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8476540802109319243'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_18.html' title='एक मिनट में एस.के.राय को बदल दिया---इसे कहते हैं हिन्दी का ताकत'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-220172625402412292</id><published>2009-09-17T14:06:00.000-07:00</published><updated>2009-09-17T14:57:46.607-07:00</updated><title type='text'>उड़न तश्तरी के समीर भाई ---आप तो मित्र हो ---</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;हिन्दी&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; दिवस के स्थान पर अंग्रेजी की अर्थी दिवस पर जो विचार ब्लोग के माध्यम से मैंने लोगों तक पहुँचाने की कोशिस किया हैं उस पर अनेक टिका टिप्पणी के पश्चात मुझे लगता हैं कि हम सभी को हिन्दी के प्रति बहुत सम्मान हैं ,हो सकता हैं कि कुछ लोग किसी मजबुरी के लिए अंग्रेजी को सम्पर्क भाषा के रूप में इस्तेमाल करते हो ,पर समयानूकुल हिन्दी का ही पक्ष मजबुती से सामने रखना चाहते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;आदरणीय&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; पी.सी.गोदियाल जी ने बहुत ही अच्छी टिप्पनी भेजी हैं, जिसे मैंने कई बार पढा ,रोचक और ज्ञानवर्धक टिप्पणी के लिए ससम्मान धन्यवाद । टिप्पणी को प्रकाशित कर दिया गया हैं । विशेष रूप से महफूज अली जी के टिप्पणी तो गागर में सागर हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;संगीता&lt;/span&gt; पुरी जी ने भी बहुत अच्छी बाते लिखी हैं ,हिन्दी सम्पन्न बने ,पर सकारात्मक सोच के साथ ,खुद बडा हो जाए तो सामने वाला छोटा होना तय हैं और अंग्रेजी ज्ञान का भण्डार हैं ,आदी ...जरा महाभारत काल को मनन करने की कोशिस करें तो सच्चाई पर चलने वाले पाण्डव के साथ क्या घटना घटती हैं और आखीर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को लड़ाई करने का उपदेश दिया ,हम सच्चाई पर चलने पर भी कौरव पक्ष आज भी सक्रिय हैं अत: न चाहते हुए भी कौरव को सबक सिखाना अति आवश्यक हैं ।आप बडा होना चाहते हैं, पर आपका कद वर्तमान परिस्थिती के कारण छोटा कर दिया जाता हैं ,अत: परिस्थिती को अनुकुल करने के पश्चात ही कद बड़ा या छोटा प्राकृतिक नियमानुसार सम्भव हैं । &lt;span class=""&gt;काशिफ &lt;/span&gt;आरिफ जी ने तो मुझे प्रमाण पत्र ही दे दिया ,हिन्दी ही उत्तम ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उडन तश्तरी और समीर जी ने प्रथम टिप्पणी न देखपाने की बाते लिखी हैं ,समीरजी !मैं कार्यक्षेत्र पर था ,आप देखिए मेरी अधिकांश आलेख रात की ही होगी ,रात में प्राय: सभी मेल और अन्य टिप्पनीयॉं देखने की कोशिस करता हूं, अत: आपको रात को ही पढ पाया ।&lt;br /&gt;आलेख में मैंने हिन्दी को राष्ट्र भाषा होने के साथ ही साथ एक अच्छा सम्पर्क भाषा होने के लिए भाषा में सर्वोच्च स्थान पर रखने की कोशिस किया हैं । जैसे देश की राष्टीय ध्वज मात्र कपड़े की टुकड़े नहीं होती ,उसी तरह हिन्दी भी मात्र भाषा नहीं ,पर देश की प्राण हैं ।&lt;br /&gt;अंग्रेज इस देश में मात्र राज करते तो शायद विशेष क्षती नहीं होती ,अंग्रेजों ने तो यहॉं के संस्कृति पर हमला किया हैं , शिक्षा पर हमला किया हैं ,जीवन के हर पहलूओं को नेस्तानाबुत किया हैं जोर जूल्म के साथ इस देश में गुरूकुल के स्थान पर कान्वेन्ट चालु किया हैं ,यहॉं जुल्म के साथ ईसाइ मत का प्रचार किया हैं । अंग्रेजी बहुत अच्छी भाषा , और भारत वर्ष की सभी भाषा तुच्छ हैं ,ऐसा प्रचार करना किसी भी तरह क्षम्य नहीं हैं ।&lt;br /&gt;यदि गान्धीजी होते तो हो सकता था कि वे अंग्रेजों को क्षमा कर देते ,पर मैं किसी भी किंमत पर उन्हें क्षमा नहीं कर सकता हूँ । मैं अंग्रेज और अंग्रेजी को अलग नहीं कर सकता ,मैं अपराध और अपराधी को भी अलग नजर से नहीं देखता , यदि दोनों भीन्न होता तो न्यायालय अपराधी को कैद की सजा क्यों देते हैं ? अपराधी के मन से अपराध को निकालकर उस अप्रत्यक्ष अपराध बोध को कैद में क्यों नहीं डाल सकते ?&lt;br /&gt;अंग्रेज दुनियॉं मे जहॉं -जहॉं गया ,वहॉं बरबादी को ही प्रोत्साहन दिया हैं, अत: अंग्रेज और अंग्रेजी क्षमायोग्य नहीं । अंग्रेजी धौस जमाने की भाषा हैं अत:, मुझे इस पर कोई सहानुभूती नहीं है।&lt;br /&gt;समीरजी विचार तो विचार हैं ,दुनियॉं में सभी पहलुओं के लिए सभी का विचार एक जैसे हो ,कोई जरूरी हैं क्या ? आपने अपना काम किया ,मैंने मेरा काम किया हैं , विचार भिन्नता के कारण आज के नेताओं जैसे हम थोड़े ही लडेंगे ? आप तो मित्र हैं , तभी तो एक दूसरे के विचारों का आदान प्रदान होता हैं । खूब लिखिए और कोशिस करूंगा जवाब भी दे सकूँ । क्षमा वगैरा की कोई आवश्यकता नहीं ....................&lt;br /&gt;प्रवीण शाह को भी धन्यवाद । एक बहुत अच्छी बात आपने लिखी हैं ,कि सबसे पहले एस.के.राय को अंग्रेजी से हटा कर हिन्दी किया जाए । मैंने भी अनेक बार कोशिस किया, पर हटता ही नहीं , यदि कोई टीप हो तो मुझे अवश्य बताने का कष्ट करें । देश में कानून की किताबे ,विज्ञान और अन्य किताबे भी अभी मिलने लगे हैं, यदि हम सभी बाजार में हिन्दी की मांग करें तो अधिकाधिक छपवाने का भी व्यवस्था करना ही पड़ेगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-220172625402412292?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/220172625402412292/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_5679.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/220172625402412292'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/220172625402412292'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_5679.html' title='उड़न तश्तरी के समीर भाई ---आप तो मित्र हो ---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3461533884418313502</id><published>2009-09-17T01:29:00.000-07:00</published><updated>2009-09-17T01:44:26.136-07:00</updated><title type='text'>उड़न तश्तरी के लाल जी को हिन्दी टिपण्णी पर सादुवाद ओर सुझाव---</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;              जब&lt;/span&gt; से मैंने ब्लोग में लिखना शुरू  किया किया हैं तब से किसी पर व्यक्तिगत रूप में  कुछ भी आक्षेप नहीं लगाया हैं ,न ऐसा मंशा कभी था और न आज है। जब राष्ट्रहित  और जनहित की बात आती हैं तो विपरीत टिप्पनी पर लिखना मजबूरी के साथ फर्ज भी हो जाता हैं ।                  &lt;br /&gt;            मैं उड़न  तस्तरी के लालजी को बताना चाहता हूँ  कि जब अंग्रेजों के साथ आजादी सम्बन्धी चर्चा चल रही थी तो डोमिनियन स्टैट के बारे में भी विकल्प के रूप बात चली ,आपको पता होगा कि गान्धी जी के डोमिनियन स्टैट पर हामी भरने के कारण  ,अधिकांश लोगों ने उसका विरोध भी किया ,नेताजी ने तो यहॉं तक कहॉं कि आजादी का अर्थ पुर्नस्वराज हैं  ,हम लेंगे तो पूरी लेंगे ,अधुरी बातों पर हमें विस्वास नहीं हैं । डोमिनियन स्टैट का अर्थ रक्षा ,विदेश - नीति सम्बन्धी सभी अधिकार अंग्रेजों के हाथ में होगी और हमें केवल आन्तरिक मामले में अधिकार प्राप्त होगा ।             &lt;br /&gt;          हमने अंग्रेजों को मीटाकर ही स्वराज हासिल कर सकें हैं ,यदि गुलामी का दर्द  आजादी के दीवानों को न होता तो शायद देश आजाद भी नहीं होता ,अंग्रेजी का मोह जब तक हमारे मानसिक पटल से साफ न हो जाए, तब तक कितने ही अच्छे शब्द  जाल से लिखते हुए लोगों को रिझा ले ,अपने पक्ष में व्होट डलवा ले , उससे देश और समाज का भला  नहीं हो सकता हैं ।               &lt;br /&gt;            लाल जी ! आज भारतवर्ष में आप सर्वे करवा लें कि कितने भारत वासी अंग्रेजी समझते  और बोल सकते हैं ? मुठि्ठ भर लोग अंग्रेजी के नशे में अपने आप को महान घोषित  कर रखा हैं । यदि चीन बगैर अंग्रेजी के तरक्की कर सकता हैं ,फ्रांस  ,रूस ,जपान,जर्मनी,क्या अंग्रेजी के बलबुते में विकास हुआ हैं ? वहॉं तो अंग्रेजी में बाते करने पर उसे जोकर की तरह देखते हैं ।               &lt;br /&gt;              अंग्रेजी जैसे भिखारी भाषा  तो दुनियॉं में हैं ही नहीं ,जहॉं आज भी पारिवारिक रिस्तों के लिए सम्बोधन शब्दों  का अभाव हैं । दुनियॉ के सभी भाषाओँ  से उधार लेकर अंग्रेजी काम चलाता हैं ,अत: हिन्दी अंग्रेजी से सम्पन्न भाषा  हैं, इसे समृद्ध बनाने के लिए लकीर को छोटी करने की आवश्यकता नहीं हैं ,जो छोटी हैं उसे बडी साबित करने की मुझे आवश्यकता नहीं हैं ,मैं तो हिन्दी जैसे समृद्ध भाषा  को शडयंत्र पूर्वक छोटी करने का जो प्रयास करता हैं  उस पर आवाज उठाता रहूंगा ,जरूरत हैं मानसिक समृद्धि की ,जरूरत हैं राष्ट्रवाद  पर चलते हुए विश्व की सोच रखने की ,हम अपने घर में विदेशीपन को पनाह देकर ,राष्ट्र और राष्ट्रिय  भाषा की समृद्धि कभी नहीं  कर सकते हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3461533884418313502?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3461533884418313502/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_17.html#comment-form' title='7 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3461533884418313502'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3461533884418313502'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_17.html' title='उड़न तश्तरी के लाल जी को हिन्दी टिपण्णी पर सादुवाद ओर सुझाव---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7793929212245178964</id><published>2009-09-16T12:24:00.000-07:00</published><updated>2009-09-16T12:36:39.625-07:00</updated><title type='text'>भूल जाइए हिन्दी दिवस ---</title><content type='html'>मैंने अंग्रेजी दिवस मनाते हुए आज तक न देखा और न सुना हैं ,हर वर्ष  धुमधाम से हिन्दी दिवस मनाने का एक परम्परा इस देश में चल निकला हैं । मेरे मित्र ने अभी हिन्दी दिवस के दिन फोन पर सम्पर्क किया और कहा कि फ्रेन्ड हिन्दी डे मनाना है होटल .....में 10 ए एम को आना जरूरी हैं । मैंने दोस्त को कहा कि  भाई मैं तो आज का दिन अंग्रेजी की अर्थि दिवस के  रूप में मनाना चाहता हूँ , क्या ऐसा नहीं हो सकता ?                             &lt;br /&gt;          हिन्दी दिवस में अग्रेजी की अर्थि दिवस मनाने  से एक खास समाचार जनता तक पहुँचेगी कि जब तक अंग्रेजी का अर्थि इस देश से न निकले तब तक हिन्दी का भला हो ही नहीं सकता हैं ।                                  एक ही बील में सॉंप और चूहा कैसे रह सकता हैं ? अब अंग्रेजी सॉंप हैं या चूहा यह तो हम सबको मिलकर सोचना होगा । हमारे देश में तो दोनों का पूजा होता हैं ,एक ओर नाग देवता, दूसरी ओर गणेश जी के वाहन । मुझे तो बस भावना से आगे हिन्दी का विकास चाहिए ।             &lt;br /&gt;              स्वामी विवेकान्द ने तो सम्पर्क भाषा  के रूप में हिन्दी को ही विशेष  स्थान दिया था ,यदि राष्ट्रभाषा  के रूप में आज भी हिन्दी उपेक्षित हैं तो उसका एक मात्र कारण हैं कि हम अंग्रेजी का गुलाम बन चूके हैं ।&lt;br /&gt;               जिस तरह घर के प्रियजन के मौत होने के पश्चात यथाशीघ्र शव  को परम्परानुसार क्रिया कर्म किया जाता हैं ,क्योंकि सभी को भय रहता हैं कि यदि सडन लग जाए तो रहना मुस्किल हो जाएगा । ठीक उसी प्रकार जिस दिन इस देश से अंग्रेज सत्ता की  मौत हो चूकी  थी  उसी दिन से अंग्रेजी और अंग्रेजीयत की  शव  को दफन कफन कर देना चाहिए था । पर ऐसा नहीं हुआ ,अत: उस शव  के सडन से दुर्गन्ध तो आना ही हैं ।                         &lt;br /&gt;                 जितनी जल्दी हो सके अंग्रेजी की अर्थि उठाकर दफन कर दिया जाए ,नही तो बदबू से तमाम प्रकार के रोगों से हम मरते रहेंगे ।&lt;br /&gt;               प्रथमत: धनादेश पर हिन्दी में ही हस्ताक्षर करना शुरू  किया जा सकता हैं । अक्षरों को हिन्दी में लिखना और वाक्यों में लिखना अपने आप में कान्तिकारी कदम हो सकता हैं । मैंने यह किया हैं ,अच्छा लगता हैं, आप भी यदि सचमुच हिन्दी का भला चाहते हैं तो अवश्य शुरू  किजीए ।                यदि असुद्ध होने लगे तो भय की क्या बात हैं ? शुद्ध असुद्ध तो हमने तय किया हैं ,जब मरा -मरा जपते हुए रत्नाकर दस्यु वािल्मकी बनकर रामायण की रचना कर सकते हैं तो क्या असुद्ध लिखते लिखते &lt;span class=""&gt;शुद्ध &lt;/span&gt; नहीं हो जाएगा ?&lt;br /&gt;               बंगला भाषी  होने पर भी मैंने हिन्दी में लिखना शुरू  किया हैं ,असुद्ध लिखता हूँ  ,पहले और आज के लेखन में मैंने स्वयं बहुत अन्तर देख रहा हूँ  ,उन अंग्रेजों के औलादों से तो मैं ठीक कर रहा हूं न ?? छोटी छोटी शुरूआत समुद्र भी बनेगा ...अवश्य बनेगा....इसलिए हिन्दी दिवस भूल जाइए ..अंग्रेजी का अर्थि दिवस प्रारंभ....तो देर किस बात की ...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7793929212245178964?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7793929212245178964/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_16.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7793929212245178964'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7793929212245178964'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_16.html' title='भूल जाइए हिन्दी दिवस ---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-449393952286480101</id><published>2009-09-15T12:29:00.000-07:00</published><updated>2009-09-15T12:55:01.100-07:00</updated><title type='text'>देश के हरामखोरों को चैन से सोने नहीं दूंगा</title><content type='html'>इस देश से प्रजातंत्र और लोकतंत्र तो गुप्त सम्राज्य के पतन होने के साथ -साथ समाप्त हो चुका हैं 1&lt;br /&gt;ओर पीछे चले तो सम्राट अशोक याद आता हैं ,इतिहास के जानकार दोनों पर विशेष शोध करके वस्तुस्थिति से जनता को जानकारी दे सकते हैं ,भारत वर्ष के महान लोकतंत्र हजारों वर्ष पुरानी हैं, हमें इस पर गर्व होना चाहिए ।&lt;br /&gt;भारत वर्ष में प्रजातंत्र के नाम से जो शोषण तंत्र का जाल चारों ओर बिछाया गया हैं ,उसका परिणाम भी सभी के सामने हैं । देश में आज कोई भी सुरक्षित नहीं रह गया हैं । जीवन का एक -एक पल भारी पड़ जाता हैं ,विकास के नाम से ,प्रगतिशील के नाम से जो ढॉंचे खड़े किए गए हैं आज सभी एक छलवा के सिवाय अन्य कुछ भी संज्ञा देना उचित नहीं लगता ।&lt;br /&gt;देश की बागडोर ऐसे -ऐसे जोकरों के हाथ में हैं ,जिस पर टिप्पनि करना भी अपने आप को छोटा साबित करने के समान हैं ।&lt;br /&gt;नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजादी के पश्चात कम से कम बीस वर्षों तक कल्याण- कारी तनाशाही लागू करने की योजना बहुत पूर्व देश के सामने रख चुके थे ,नेताजी जानते थे कि हजारों सालों से गुलाम प्रजा एका एक देश को नहीं चला सकते , प्रजातंत्र की सबसे बडी बाधा अशिक्षा, गरिबी, असमानता, बेरोजगारी, अन्धविस्वास ,ऊँच -नीच की भावना ,जाति-प्रथा आदी हैं ,अत: जब तक इन समस्याओं से हम योजना बद्ध तरीके से समाधान न कर ले तब तक लोकतंत्र सफल नहीं हो सकती1&lt;br /&gt;यहॉं के स्वार्थी और अंग्रेजों के तलुए चाटने वाले कुछ नेताओं ने नेताजी के बात नहीं मने ,एक षडयंत्र के तहत उन्हें जीते जी मृत घोषित करके ,देश के भाग्य विधाता बन बैठे ।वर्तमान हालात को देखकर चुप रहना बहुत मुस्किल हो गया तो लिखना शुरू किया , कवि -लेखक ,साहित्य कार बनने का कभी सपना न था और न हैं ,अब तो देश के हरामखोरों को चैन से सोने नहीं दुंगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-449393952286480101?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/449393952286480101/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_15.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/449393952286480101'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/449393952286480101'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_15.html' title='देश के हरामखोरों को चैन से सोने नहीं दूंगा'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8273122788945424713</id><published>2009-09-14T11:08:00.000-07:00</published><updated>2009-09-14T11:32:12.810-07:00</updated><title type='text'>अमेरिका असभ्य,बर्बर,कंगाल--कौन कहता हैं विकसित हैं --</title><content type='html'>कौन कहता हैं कि अमेरिका विकसित देश हैं ,सभ्य हैं ,धनी हैं ? इतिहास गवांह हैं कि अमेरिका एक असभ्य ,बर्बर ,कंगाल के सिवाय कुछ भी नहीं है ,जिस देश की बुनियाद 30 लाख रेड- इंडियानों की खुन से रंगा हो ,जो वंश ड्रेकुला  से सम्बन्ध रखता हो ,जो स्थानिय लोगों को बेरहमी से कत्ल कर उनके धन सम्पत्ति को लूट कर आज अपने आप को विकसित घोषित  करता हो ,उसे क्या इतिहास के जानकार विकसित और सभ्य कहलाएगा ?                     &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;            आज&lt;/span&gt; नहीं  तो कल अमेरिका के वास्तविक हकदार जगेगा  और अपना हक  छीन कर लूटेरों का भगाने का काम जरूर करेगा ,हम ऊपरी चकाचौध को ही सत्य मानने का भ्रम कर  बैठे हैं ,आज भी क्या अमेरिका कंगाल नहीं हैं ?&lt;br /&gt;             दुनियॉ का एक भी ऐसा देश आज नजर नहीं आता जहॉं सैकडों बैंक दिवालिया हो चुके हो ,देश के बीमा कंपनीयॉं बरबाद हो गई हो , आटो क्षेत्र का दम निकल गया हो , लाखों लोग बेरोगार होकर नारकिय जीवन जीने को मजबुर हो , जहॉं का अर्थव्यावस्था ही खत्म हो चुका हैं, वह देश क्या विकसित कहलाने योग्य हैं ?&lt;br /&gt;                          कंगालो को आज भी हम धनी कहलाने में नहीं चुकते ,जिसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं बचा हैं और उनके नीति को मानने वाले देश भी बरबादी के कगार पर खडी हैं, फिर भी हम अमेरिका के पिछलग्गु बने हुए हैं ।                                         &lt;br /&gt;                     भारत वर्ष  में ऐसे अनेक लोग होंगे जिसका नाम धनीराम हैं ,लेकिन रहते हैं  झोपड़ी में । नाम सोनाधर पर सोने की एक अंगुठी भी नसीब नहीं ,अमेरिका का भी यही हाल है। यदि अमेरिका से विदेशी डाक्टर ,विदेशी वैज्ञानिक , शोध  में लगे विदेशी विद्वान आदी स्वदेश चले आए तो अमेरिका के पास अपना कहलाने लायक क्या बचेगा ?&lt;br /&gt;                      35 से 40 प्रतिशत इंजिनीयर ,लगभग 30 प्रतिशत  वैज्ञानिक , 30  प्रतिशत शोध के विद्वान , 40 प्रतिशत लगभग डाक्टर ,सभी भारत वर्ष  के हैं । यदि ये लोग स्वदेश लौट  आए तो अमेरिका का क्या होगा ? हम कह सकते हैं कि देश की जनसंख्या बढ जाने के कारण अनेक समस्या पैदा होगी ,जबकि हमारे पास आज भी इतने संसाधन हैं कि उनका सही उपयोग हो तो आज 1 अरब से अधिक जनसंख्या होने पर भी हम जिस तरह जीवन यापन कर रहे हैं यदि इतनी जनसंख्या ओर हो जाए अर्थात 2 अरब भी हो जाए तो हमें को असुविधा नहीं होने वाली हैं ।                                        &lt;br /&gt;              हमें मात्र ईमानदारी से संसाधनों का सन्तुलित और सही उपयोग करना होगा ,फिर भी आज हम अमेरिका से किसी भी तरह १९ नहीं हैं , एक कमजोरी जो हमें बारबार गर्त में ले जाती हैं वह हैं अमेरिका के सामने कंगाल जैसे हाथ फैलाना । १९७१ का बंगलादेश युद्ध मुझे याद आता हैं जब अमेरिका ने हमारे खिलाफ पाकीस्थान को सहयोग के लिए सातवीं बेडे को भेज दिया था । रूस ने उस समय  हमारे साथ दोस्ती ईमानदारी से  निभाई और  अमेरिका को धमकाते हुए अपनी नोवीं बेडे को हमारे सहयोग के लिए भेज दिया  था । हमारे मुर्खराज लोगों ने रूस को भुला कर अमेरिका जैस धूर्त  लम्पट ,&lt;br /&gt;लूटेरों के साथ दोस्ती करने बार बार दौड़ता  है।                         &lt;br /&gt;                  जब जब भारत ने अमेरिका से दोस्ती का हाथ बढाया तब तब अमेरिका ने लात मारा फिर भी यहॉं के नेताओं को शर्म नहीं आती ,अमेरिका का लात आशिर्वाद मानकर ,चरणामृत  समझकर नेताओं ने सर पर लगाया ,कारगील के लड़ाई में भी अमेरिका ने पाकीस्थान का साथ दिया , पाकिस्थान को अमेरिका ने  जब जब अर्थिक और युद्ध सामग्री दी तब तब वह भारत के खिलाफ प्रयोग किया अमेरिका को मना करने पर भी हमारा निवेदन कभी नहीं सुना, ऐसे गद्दारों के साथ आज भी कुछ अमेरिकी गुलाम जो सत्ता में बैठे हुए हैं ,वे इस देश को बरबाद करके ही दम लेगें ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8273122788945424713?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8273122788945424713/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_14.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8273122788945424713'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8273122788945424713'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_14.html' title='अमेरिका असभ्य,बर्बर,कंगाल--कौन कहता हैं विकसित हैं --'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3888745988148577059</id><published>2009-09-10T13:03:00.000-07:00</published><updated>2009-09-10T13:28:12.230-07:00</updated><title type='text'>तमिलों को नंगा करके -आंखों में पट्टी बाँध कर -गोलिओं से भुना जा रहा हैं</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; ईमेल ने मुझे पेरशान कर रखा हैं ,मैं सोचने को मजबूर हो गया कि आज 21वीं सदी में जो कुछ भी हो रहा हैं वह तो प्राचीन पाषण काल में भी नहीं होता था ,ईमेल श्री लंका में तमिलों पर हो रही फौजी अत्याचार से सम्बन्ध रखता हैं ,एक व्ही डी ओ क्लिप भी साथ में भेजा गया , मानवतावादी संगठनों द्वारा प्रजातंत्र की रक्षा के लिए एक साथ श्रीलंका में चल रही अमानवीय कुकृत्य पर पर्दा उठाकर दूनियॉं को झकझोर कर रख दिया ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;क्या&lt;/span&gt; आज यह विस्वास योग्य हैं कि श्रीलंका तमिलों को पकड़ कर लिट्टे के नाम से उसे नंगा करके ऑंखों में पट्टी बॉंध कर खुलेआम गोलियों से भूल डाले ? आज श्रीलंका में वह सब कुछ हो रहा हैं ,जो मानवता के नाम से कलंक हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;एक&lt;/span&gt; समाचार कल ही मैंने पढा हैं जिसमें अमेरिका के युद्ध सामिग्र बनाने वाले सभी कंपनीयॉं कम से कम 5 गुणा मुनाफा कमाया हैं जहॉं अमेरिका में बैंक, बीमा ,साप्टवेयर कंपनियॉं ,आटो उद्योग सभी मंदी के कारण बंद हो चुकी हैं, वही युद्ध सामिग्र बनाने वाली कंपनियॉं लाभ कैसे कमा सकती हैं ? उत्तर सरल है कि अमेरिका पक्ष -विपक्ष सभी को हथियार प्रदान कर उपकृत करती हैं और भारी मुनाफा कमाने में लगी हुई हैं ,अमेरिका यदि छोटे बड़े सभी देशो और संगठनों को हथियार न दे तो दुनियॉं में शान्ति स्थापित होने में देर नहीं लगेगी ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;अमेरिका&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;में बने हथियारों से एक विश्व युद्ध सा चल निकला हैं , प्रजा पर प्राणाघात प्रहार किसी भी किंमत पर सहमती योग्य हो ही नहीं सकता ,चाहे यह प्रहार कोई भी ,किसी भी नाम से ही क्यों न करें । मनुष्य जब जान दे नहीं सकता तो उसे किसी का जान लेने का अधिकार भी नहीं हैं । मनुष्य में देश के सरकार ,फौज ,हथियारों द्वारा लड़ने वाले लोग सभी आ जाते है। लडाई शुरू होने से पहले ही उसके तह तक जा कर उसे खत्म करना चाहिए ,आज तो उल्टा हो रहा हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;छोटी&lt;/span&gt; -छोटी लड़ाई की परीक्षा ली जाती हैं ,और इन्तेजार किया जाता हैं ताकि लड़ाई आप ही आप खत्म हो जाए , परन्तु ऐसा नहीं होता ,कभी कभी यदि आप ही आप लड़ाई खत्म भी हो जाए तो, आगे और अधिक उग्र रूप से वह चालू भी हो जाने के कारण उसे सम्भालना मुस्किल हो जाता हैं । एक तो दुनियॉं से हथियारों का व्यापार बंद होना चाहिए ,जो शायद ही हो ,कारण अमेरिका का बुनियाद ही हथियार हैं । दुनियॉ के बारे में उसे सोचने का समय ही नहीं हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मानवता&lt;/span&gt; पर अत्याचार कदापी सहन योग्य नहीं हैं ,चाहे श्री लंका हो ,इराक हो ,ईरान हो , तालिवान ,पाकिस्थान या भारत हो । मानवता के खिलाफ जो भी कार्य करें उसके खिलाफ शान्ति पूर्वक ढंग से विरोध तो सुधी जनों को अवश्य ही करनी चाहिए ,अन्यथा मानव केवल दो हाथ पैर के पशु के सिवाय कुछ भी कहलाने लायक नहीं हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3888745988148577059?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3888745988148577059/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_10.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3888745988148577059'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3888745988148577059'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_10.html' title='तमिलों को नंगा करके -आंखों में पट्टी बाँध कर -गोलिओं से भुना जा रहा हैं'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4349472971293027096</id><published>2009-09-06T17:19:00.000-07:00</published><updated>2009-09-06T17:34:54.819-07:00</updated><title type='text'>उन लोगों को शर्म नहीं आती --बेशर्म ,बेहया ,अमानुष --</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;         करोड़ों &lt;/span&gt;,अरबों की सम्पत्ति छोड़कर  धीरूभाई अम्बानी इस दुनियॉं को छोड़  चले गए ,वे जीते जी  शायद  ही कभी सोचे होंगे कि उनके चले जाने के तुरंत बाद दोनों भाई सम्पित्त के लिए लड़ने  लगेंगे, मामूली पेट्रोल  पम्प में काम करने वाले धीरूभाईजी  अम्बानी ने अकूत धन सम्पत्ति का जो साम्राज्य खड़े  करके चले गए ,मेरे जैसे लोग यह सोच-सोच कर पेरेशान हैं कि जादू सा क्या धन- सम्पत्ति आकाश से टपका होगा ? कई पीढी तक लगातार प्रयत्न करने के पश्चात भी कुबेर सा सम्पत्ति बनाना असम्भव होता हैं ,फिर जीवन के द्वितीय सोपान में ही  इतनी सम्पत्ति कहॉं से टपक गया हैं ?&lt;br /&gt;           इस देश में किस तरह धन बनाया जाता हैं यह तो एक साधारण सा आदमी भी  आज समझने लगे हैं ।लेकिन लूट के माल जिस तरह बटवॉंरे के समय लूटेरे लड़ते  हैं और बाद में इसी लड़ाई  का परिणाम जेल तक का सफर बनकर अंत होता हैं  ,ठीक इसी तरह ही अम्बानीभाई  के साथ हुआ हैं ,इससे अधिक कहना अच्छा नहीं लगता  ।        &lt;br /&gt;          धन सम्पत्ति बनाने के लिए न्याय ,अन्याय, नीति ,अनीति का ख्याल तो रखना ही - चाहिए , आखिर धन सम्तत्ति इकट्ठा करने की हमारे धर्मशात्र अकुंश लगाती हैं । धर्म के ठेकेदार इस देश के कुबेरों को इस बात के लिए क्यों नसिहत नहीं देते, यह समझ से परे नहीं हैं । देश की सारी धन सम्पत्ति मुठि्ठ भर लोगों के हाथों में केंद्रित    हो जाने के परिणाम  स्वरूप आज समाज के हर अंग में विकृती परिलक्षित हो रहा हैं । &lt;br /&gt;           मनुष्य  मात्र धन सम्पत्ति का अम्बार लगाने का मशीन नहीं हैं ,इस दुनियॉं में उनके लिए अन्य  अनेक कार्य हैं, जिसे समयानुकूल सभी को करना ही चाहिए ,हमारे गुरुजनों  ने चार - आश्रम व्यावस्था की परिकल्पना भी इसी उद्देश्य  की प्राप्ति के लिए किया था,परन्तु आज हम अपने पूज्यजनों का कहना मानना तोहिन समझते हैं । अपरिग्रह नीति का अपमान करने में ऐसे लोगों को मजा आता हैं । देश जाए भाड़ में ,देश के लोग कंगाल हो जाए , मर जाए ,आत्महत्या कर ले , गरिबी से सड़  गल कर मर जाए, अनपढ गंवार  हो कर गुलामी की जीवन ढोते रहे ,पर ऐसे धन पिशाचों को तो केवल चिटियों की भांती एकत्रित करने में ही मजा आता है, भले ही उसका  कोई काम न आवे । &lt;br /&gt;          धन इकट्ठा करना भी एक मानसीक रोग हैं और हम इन रोगीयों का तारिफ करते नहीं थकते । मनसीक रोगीयों का ईलाज होना चाहिए था, परन्तु हम उन्हें खुले आम छुट दे रहे हैं । क्या पागलों की तरह इन रोगीयों को ईलाज के लिए मानसीक चिकित्सालय में नहीं भेजना चाहिए ? अभी हाल ही में आन्ध्रप्रदेश की मुख्यमंत्री दुर्घटना  में मारे गए ,माधव राव सिंधिया,प्रमोद महाजन आदी के पास भी तो करोड़ों की धन सम्पत्ति थी ,आज उस धन सम्पत्ति का उपयोग क्या हो रहा हैं ,यह सभी लोग देख सकते हैं । इस लिए साध्य और साधन का जो बाते धर्म ग्रन्थों में उल्लेख किया गया हैं वह कोई मजाक में नहीं लिखा गया हैं । हमें उन पर आमल करना चाहिए था ,पर कर रहे हैं उसके ठीक उल्टा , जिस पेड़  के डाली में बैठे हैं ,कालिदास उसी पेड़  के डाली को काटने लगे थे ,हम कालिदास को पकड़  कर राज कन्या से शादी  कर देते हैं । आज भी हम वही सब कर रहे हैं जो हजारों वर्ष  पूर्व सबक के लिए हमें  विद्वानों ने बार बार चेताया करते थे , हम चेतने में भी अपमानित महशुस करते हैं ......मैं तो बस यही कहना चाहता हूँ  कि बहूत हो चूका हैं .........उन लोगों को शर्म  नहीं आती बेशर्म, बेहया- अमानुश ..........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4349472971293027096?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4349472971293027096/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_2634.html#comment-form' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4349472971293027096'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4349472971293027096'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_2634.html' title='उन लोगों को शर्म नहीं आती --बेशर्म ,बेहया ,अमानुष --'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-9181923119068578714</id><published>2009-09-03T11:52:00.000-07:00</published><updated>2009-09-03T12:15:11.884-07:00</updated><title type='text'>प्रकृति बचाओ या मौत के लिए तैयार हो जाओ</title><content type='html'>विष कन्याओं की  किस्सा तो अनेक स्थानों में उल्लेख मिलता हैं ,परन्तु आज विश्व के प्राय: प्रत्येक स्थान में विष मानव पैदा हो रहा हैं ,गुप्तचरी के किस्से कहानीओं से आगे सचमुच मनुष्य  आज विष  खाने पीने का  आदी हो चुका हैं । जैसे -जैसे जल-जमीन और जंगलों से मनुष्य   का नाता टुटता जा रहा हैं वैसे -वैसे मानव ही नहीं पशु भी जहरीला बनता जा रहा हैं । जहॉं देखो जहर का ही खेल  हैं । प्रात: काल से सोने तक हम आज जहर पर ही निर्भर होते जा रहे हैं ,समय  ऐसा आएगा जब हम जहर के वगैर जीवन की कल्पना करना  भी भुल जायेंगे , हम भुल जायेंगे  कि इस धरती पर कभी  आक्सिजन करके  कोई जीवन वायु हुआ करता था । आक्सीजन के सिलेण्डर पीठ में लटका कर हमें  जीना होगा और दूसरी  पीढी के लोग तो इसकी  आदी हो चुकी  होगी , उन्हें ये सब सामान्य लगने लगेगा । कही भी आज पर्यावरण का   जिस ढंग से विनाश किया जा रहा हैं उसे सुनकर और देख कर रोंगटे  खडी हो जाती हैं । आश्चर्य तो तब और अधिक होता हैं कि पर्यावरण विभाग जैसे संस्थान ही मिली भगत करके पर्यावरण का ही दुश्मन बन बैठे हैं, यदि इस विभाग को बंद कर दिया जाए तो कुछ समय तक पर्यावरण दूषित  होने से बच सकती हैं ,आज इस विभाग को बंद कर देने की अतिआवश्यकता हैं । कोयला दोहन करने का तो एक जुनून सा पैदा हो गया हैं ,कोयला नही तो जीवन नहीं का एक नया नारा ही बना लिया गया हैं । आज भूगर्भ से जिस तरह खनिजों का अति दोहन हो रहा हैं जिसके चलते जल -जंगल -जमीन सीमित हो कर मानव ही नहीं सम्पूर्ण जीव जगत के लिए चुनौती बन गया हैं । प्राणी इस जगत में रह पाएगा कि नहीं यह विचारनीय प्रश्न हैं । विकास का जो परिभाशा हमें बताया जा  रहा हैं वह परिभाषा  ही गलत अवधारनाओं पर आधारित होने के कारण आज विनाश ही विनाश देखते हुए सुधी जन वेचैन हैं ,लिख लिखकर लोग थक गए हैं ,समझा बुझाने का कोई असर ही नहीं होता हैं, आज रक्षक ही भक्षक बन कर प्राणी जगत का विनाश करने को तूले हुए हैं ,दुर्योधन जैसे लोग आज समझने को तैयार ही नहीं ,अपनी स्वार्थ के आगे सब बौना साबित हो रहा हैं ,ऐसे घनघोर स्थिति से कैसे निजात पाया जाए यह  हम सभी को तुरंत सोचना होगा ,आज हंसी मजाक का समय बीत चुका हैं, जब संकट प्राणी जगत पर आ ही गया हैं तो सबसे पहले इस संकट को खत्म करके फिर अन्य सभी कार्य किया जा सकता हैं । इस वर्ष वर्षा  की कमी के कारण सुखे की स्थिति पैदा होने के पीछे मानव निर्मित षडयंत्र  ही हैं । प्रकृति तो दयामयी हैं ,प्राणों का प्राण हैं ,प्रकुति माया हैं ,प्रकृति छाया हैं ,प्रकृति क्षमा हैं ,प्रकृति मॉं हैं ,सुख का भण्डार हैं ,फिर आज मॉं की गोद खाली क्यों हैं ? प्रकृति विनाश लीला दिखाने को मजबूर क्यों हैं ? किसने किया प्रकृति को मजबूर ? आज जवाब चाहिए ...समाधान चाहिए ,चाहे कुछ भी किंमत चुकाना पड़े  प्रकृति के दुश्मनों का नाश आज करना ही होगा ...कौन आज प्रकृति को बचाएगा ? कौन आज सामने आएगा ? अगली पीढी को बचाने के लिए आज हमे त्याग करना ही होगा .....करो या मरो का नारा फिर से देने का समय आ चुका हैं । प्रकृति बचाओ या मौत के लिए तैयार हो जाओ । ....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-9181923119068578714?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/9181923119068578714/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_4482.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/9181923119068578714'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/9181923119068578714'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_4482.html' title='प्रकृति बचाओ या मौत के लिए तैयार हो जाओ'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3841530104929110027</id><published>2009-09-03T03:32:00.000-07:00</published><updated>2009-09-03T03:48:56.225-07:00</updated><title type='text'>हेलीकाप्टर दुर्घटना गैर इरादा हत्या हैं --पाँचों मृतात्मा को ईश्वर शान्ति प्रदान करें</title><content type='html'>आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर और हेलीकॉप्टर में सवार चालक दलसहित 4 अन्य लोगों का अकाल मृत्यु को किसी भी तरह सामान्य नहीं कहा जा सकता हैं । आधुनिक और नकनीकी ज्ञान पर दम्भ करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि जब धुंध के कारण आकाश मार्ग सुरक्षित नहीं होता तो हेलीकॉप्टर को उड़ान के लिए आदेश देने वाले वे कौन लोग थे जो बीना सोचे समझे उड़ान भरने के लिए हामी भर देते हैं ? क्या ऐसे लोगों को वक्श देना चाहिए ? कल रात को मुख्यमंत्री कार्यलय यह कहने लगे कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई हैं और आज दोपहर तक अथक प्रयन्त करके सभी का शव बरामद कर लिया गया । मात्र बदली के कारण यदि इस तरह की दुर्घटना हुई हैं तो हम आज भी कितने अनाड़ी और दम्भी हैं कि नकनीकी अकाल मृत्यु को रोक नहीं पा रहे हैं । अत्यन्त दु:ख के साथ लिखना पड़ रहा हैं कि जंगल में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना होने पर उसे खोजने के लिए हमें अमेरीका से मदद मांगना पड़ता हैं । मांगने का आदत जो पड़ा हुआ हैं । एक समय देश के लोगों को अमेरीका द्वारा दिया गया लाल गेहूं बॉटा गया था ,ऐसी गेहूं जिसे अमेरिका में जानवर भी नहीं खाता ,राजीव गान्धी एक बार अमेरिका से सुपरकम्प्युटर मांगने गए थे और अमेरिका ने इंकार कर दिया ,उस समय राजीव गान्धी को बहुत दु:ख हुआ था , देश के वैज्ञानिकों ने अपने ही संशाधनों से अमेरिका से भी अच्छी सुपर कम्प्युटर तैयार कर दिया जो विश्व में चुनौती से कम नहीं हैं । खैर जो भी हो हम जब अरबों रूपये रक्षा साधनों पर खर्च कर सकते हैं तो आपात काल के लिए भी हमें सम्पूर्ण तैयारी करना अति आवश्यक हैं ।इस तरह की घटना को दुर्घटना नहीं कहा जा सकता हैं यह गैर इरादा हत्या से कम नहीं हैं 1 मैं मृतात्मा की शान्ती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3841530104929110027?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3841530104929110027/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_03.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3841530104929110027'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3841530104929110027'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_03.html' title='हेलीकाप्टर दुर्घटना गैर इरादा हत्या हैं --पाँचों मृतात्मा को ईश्वर शान्ति प्रदान करें'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-3827931656327054512</id><published>2009-09-02T20:51:00.000-07:00</published><updated>2009-09-02T21:16:46.691-07:00</updated><title type='text'>आन्ध्रप्रदेश के ५ सथिओं साथ  मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी हेलीकाप्टर सहित लापता -खोज जारी</title><content type='html'>आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी हेलीकॉप्टर से दौरे पर जा रहे थे ,सुबह हैदराबाद से चित्तूर जाने के  कल सुबह 9.30 के बीच गॉव वालों ने हेलीकॉप्टर को देखा था और अचानक 9.35 के बाद हेलीकॉप्टर से सम्पर्क टुटने के बाद आभी 12 घन्टे तक कोई सूराग नहीं मिल पाया हैं । मिडिया ने खबर दी हैं कि सी एम कार्यालय से जानकारी मिली हैं कि सीएम सुरक्षित है । परन्तु सवाल उठता हैं कि हेलिकॉप्टर में जब इ एल टी सिस्टम लगी हुई हैं तो वह खामौश क्यों हैं ?  इ एल टी  अर्थात एमरजेंसी लोकेशन ट्रांसमिटर जो खतरे को भापते हुए जोर जोर से आवाज करने लगती हैं । यदि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई हैं ,तो उससे आवाज आना चाहिए था, पर वह चूप हैं जो एक बहुत बड़ा  सवाल बनकर उभर रहा हैं । शाम  ढलते ही खोज में निकली 7 हेलीकॉप्टर, खोज करना बंद कर दिया हैं कयोंकि रात को हेलीकॉप्टर खोज का काम नहीं कर सकता हैं । सेना सतर्क हो चूकी हैं और अब तक का सबसे बड़ा  खोजी आपरेशन का कार्य शुरू  भी कर दिया गया हैं ,सेना द्वारा सूखोई 30 को भी इस खोज मे लगा कर बहुत अच्छा किया हैं, यह वही सुखोई हैं जो रूस ने हाल ही में हमने ख़रीदा  हैं, एक उच्च तकनीकी  और रडार से लैस हवाई विमान द्वारा जंगलों में खोज कार्य में जूट चूकी हैं , इसरो भी मदद  कर रही है । आगे किसी तरह की भी चूक न हो इसलिए अमेरिका से भी मदद  मांगा गया हैं । कुल मिला कर  देश में एक आपातकाल सा माहौल निर्मित हो चुका हैं । आलाकमान भी सक्रिय हो गया , श्रीमती सोनिया गान्धी ने भी आपात कालीन बैठक बुलाई हैं । केन्द्रीय  गृह मंत्री ,प्रधान मंत्री सभी सी एम के लापता होने के कारण चिन्तीत हैं । मिडिया भी अपना जिम्मेदारी  बखूबी निभा रही हैं । ऐसा लगता हैं कि बहुत ही जल्दी कामयाबी हाथ जरूर लगेगी ।ऐसी नाजुक समय में हम सभी को ईश्वर से  प्रार्थना करना चाहिए ताकी बहुत बड़े  खतरे से हम उबर सके । सबसे चिन्तनीय बात यह हैं कि जहॉं हेलीकॉप्टर से सम्पर्क कट चूकी हैं, वहॉं नक्सलीयों का गढ हैं और जंगलों से घिरा हुआ हैं , जंगल भी  बीहड हैं अत: मुझे तो ऐसा लग रहा हैं कि नक्शली ,सी एम का अपहरण न कर लिया हो ! यदि नक्शली ऐसा करता  हैं तो निश्चित  ही फिरौती के नाम पर खूंखार साथियों को जेल से छुडाने जैसी मांग भी रख सकता हैं । अभी तो हम सी एम और उनके साथ गए 5 लोगों को सही सलामत होने का प्रार्थना ही कर सकतें हैं । मुझे एक बात से  आश्चर्य होता हैं कि इलेक्ट्रानिक मिडिया अभी तक मुख्यमंत्री के साथ गए 5 लोगों का नाम भी नहीं बताया हैं । आश्चर्य तो बस्तर में हुए हेलीकॉप्टर दुर्घटना  का होता हैं जिसमें अनेक साथियों के साथ एक एस पी भी शहीद  हो गए थे , उस समय महिनों बाद ही हेलीकॉंप्टर का मलवा मिल पाया था , मुझे शायद  दोनों  घटनाओं को एक करके नहीं देखना चाहिए ,परन्तु कभी -कभी कुछ घटनाओं को भूलाया नहीं  जा सकता । कुछ नाजुक घटनाओं पर सभी का रवैया सहानुभूति पूर्वक होना चहिए ,ऐसी घटनाओं को बड़े  छोटे का भेद भाव भुल कर सेवा भाव से सभी को क्षमतानुसार आगे आकर अपनी हिस्सेदारी का निर्वाहन करना चाहिए । हम सब ईश्वर से प्रार्थना करें कि राजशेखर रेड्डी और हेलीकॉप्टर में सवार अन्य 5 साथि सुरक्षित रहे, उनके परिवार को इस दुख के समय  में ईश्वर मदद  करें1&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-3827931656327054512?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/3827931656327054512/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_02.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3827931656327054512'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/3827931656327054512'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post_02.html' title='आन्ध्रप्रदेश के ५ सथिओं साथ  मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी हेलीकाप्टर सहित लापता -खोज जारी'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-8948837687067160382</id><published>2009-09-02T11:18:00.000-07:00</published><updated>2009-09-02T20:45:36.090-07:00</updated><title type='text'>आंध्र प्रदेश के ५ साथियों के साथ मुख्य मंत्री राजशेखेर रेड्डी हेलीकॉप्टर सहित  लापता-खोज जारी</title><content type='html'>आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी हेलीकॉप्टर से दौरे पर जा रहे थे ,कल सुबह हैदराबाद से चित्तूर जाने के समय 9.15 से 9.30 के बीच गॉव वालों ने हेलीकॉप्टर को देखा था और अचानक 9.35 के बाद हेलीकॉप्टर से सम्पर्क टुटने के बाद अभी 24 घन्टे तक कोई सूराग नहीं मिल पाया हैं । मिडिया ने खबर दी हैं कि सीएम कार्यालय से जानकारी मिली हैं कि सीएम सुरक्षित है । परन्तु सवाल उठता हैं कि हेलिकॉप्टर में जब इ एल टी सिस्टम लगी हुई हैं तो वह खामोश क्यों है ? इ एल टी अर्थात एमरजेंसी लोकेशन ट्रांसमिटर जो खतरे को भापते हुए जोर जोर से आवाज करने लगती हैं । यदि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई हैं ,तो उससे आवाज आना चाहिए था, पर वह चूप हैं, जो एक बहुत बड़ा सवाल बनकर उभर रहा हैं ।शाम ढलते ही खोज में निकली 7 हेलीकॉप्टर, खोज करना बंद कर दिया हैं कयोंकि रात को हेलीकॉप्टर खोज का काम नहीं कर सकता । सेना सतर्क हो चूकी हैं, और अब तक का सबसे बड़ा खोजी आपरेशन का कार्य शुरू भी कर दिया गया हैं ,सेना द्वारा सूखोई 30 को भी इस खोज मे लगा कर बहुत अच्छा किया हैं, यह वही सुखोई हैं जो रूस ने हाल ही में हमें दिया हैं, एक उच्च तकनीकी और रडार से लैस हवाई विमान द्वारा जंगलों में खोज कार्य में जूट चूकी हैं , इसरो भी मदद कर रही है । आगे किसी तरह की भी चूक न हो इसलिए अमेरिका से भी मदद मांगा गया हैं । कुल मिला कर देश में एक आपातकाल सा माहौल निर्मित हो चुका हैं । आलाकमान भी सक्रिय हो गया , श्रीमती सोनिया गान्धी ने भी आपात कालीन बैठक बुलाई हैं । केंद्रीय गृह मंत्री ,प्रधान मंत्री सभी सी एम के लापता होने के कारण चिन्तीत हैं । मिडिया भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं । ऐसा लगता हैं कि बहुत ही जल्दी कामयाबी हाथ जरूर लगेगी ।ऐसी नाजुक समय में हम सभी को ईश्वर से प्रार्थना करना चाहिए ताकी बहुत बड़े खतरे से हम उबर सके । सबसे चिन्तनीय बात यह हैं कि जहॉं हेलीकॉप्टर से सम्पर्क कट चूकी हैं, वहॉं नक्सलीयों का गढ हैं और जंगलों से घिरा हुआ हैं , जंगल भी बीहड़ हैं अत: मुझे तो ऐसा लग रहा हैं कि नक्शली ,सी एम का अपहरण न कर लिया हो ! यदि नक्शली ऐसा करते हैं तो निश्चित ही फिरौती के नाम पर खूंखार साथियों को जेल से छुड़ाने जैसे मांग भी रख सकता हैं । अभी तो हम सी एम और उनके साथ गए ५ लोगों को सही सलामत होने का प्रार्थना ही कर सकतें हैं । मुझे एक बात से आश्चर्य होता हैं कि इलेक्ट्रानिक मिडिया अभी तक मुख्यमंत्री के साथ गए ५ लोगों का नाम भी नहीं बताया हैं । आश्चर्य तो बस्तर में हुए हेलीकॉप्टर दुर्घटना का होता हैं जिसमें अनेक साथियों के साथ एक एस पी भी शहीद हो गए थे , उस समय महिनों बाद ही हेलीकॉंप्टर का मलवा मिल पाया था , मुझे शायद दोनों घटनाओं को एक करके नहीं देखना चाहिए ,परन्तु कभी -कभी कुछ घटनाओं को भूलाया नहीं जा सकता । कुछ नाजुक घटनाओं पर सभी का रवैया सहानुभूति पूर्वक होना चहिए ,ऐसी घटनाओं को बड़े छोटे का भेद भाव भुल कर सेवा भाव से सभी को क्षमतानुसार आगे आकर अपनी हिस्सेदारी का निर्वाहन करना चाहिए । हम सब ईश्वर से प्रार्थना करें कि राजशेखर रेड्डी और हेलीकॉप्टर में सवार अन्य ५ साथि सुरक्षित रहे,उनके परिवार को इस दुख के समय ईश्वर मदद करें ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8948837687067160382?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8948837687067160382/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8948837687067160382'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8948837687067160382'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='आंध्र प्रदेश के ५ साथियों के साथ मुख्य मंत्री राजशेखेर रेड्डी हेलीकॉप्टर सहित  लापता-खोज जारी'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-6717415238562129544</id><published>2009-08-20T08:29:00.000-07:00</published><updated>2009-08-20T09:01:15.993-07:00</updated><title type='text'>हमने जसवंत सिंह जैसे तोपखान को नहीं वक्शा..तुम किस खेत की मूली हो---</title><content type='html'>श्री जसवंत सिंह जी एक वरिष्ठतम भारतीय जनता पार्टी के नेता थे , एक दिन पहले वे थे के स्थान पर हैं के अधिकारी रहे ,बीजेपी राज में भी आतंकवादीयों को कन्धार तक छोडने गये थे ,तब पार्टी ने आलोचनाओं पर ध्यान न देते हुए सिंह साहब को बचा लिए और बार-बार उन्हें बचाते रहे हैं, लेकिन इस बार जिन्ना के मामले में जसवंत सिंह जी को पार्टी ने जिन्दा दफन करके मातम मना रहे हैं । देश का बटवारा तो हो चुका हैं और अनेक इतिहासकारों ने बटवारे के लिए श्री जवाहर लाल नेहरू के साथ गॉंन्धी जी को भी दोषी ठहराये हैं । कहते हैं कि नेहरू जी ने प्रधान मंत्री पद के लिए देश और कांग्रेस का भी बटवारा करने में परहेज नहीं रखते थे ,नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द रेडियो ,रेंगुन से देश का बटवारा न करने के लिए अनेक बार आह्वान करने के पश्चात भी उस समय सत्ता लोलुपों ने नेताजी को नकारा था ,और आगे भी उन्हें नकारते रहे, यहॉं तक कि नेताजी के जीवित रहने के बाद भी उन्हें मृतक घोषित करने का ऐतिहासिक भूल किया गया, जोकि रहस्य के घेरे से उबारने में सालों लग सकता हैं । इतिहास को तोड़ -मरोड़ कर रखने का एक परम्परा इस देश में लगातार जारी हैं ,आज के इतिहास से तो मेरे जैसे लोगों का विस्वास भी उठ चूका हैं ,इतिहास जो जैसे चाहे वैसे लिखा सकता हैं इतिहासकार आज कलम के सौदागार बन गए हैं ,कहीं कहीं तो दबाव से भी इतिहास लिखाने का प्रकरण सामने आया हैं अब यदि जसवंत सिंह जी को इतिहास के बारे में कुछ ज्ञान हो और इस दुनियॉं छोड़ने के पहले कुछ सच्चाई लोगों के सामने रखकर जाना चाहते हैं तो लोगों को हायतौवा मचाने की क्या आवश्यकता हैं ? जब इस देश में लिखने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिला हुआ हैं तो एक पार्टी मौलिक अधिकार का इस तरह हनन करने में लगे हुए हैं जो वास्तविक रूप से असहनीय हैं एवं मौलिक अधिकार का गला घोटने के समान हैं । पिछले समय बीजेपी ने सुश्री उमा भारती को भी कुछ इसी तरह के वातावरण में पार्टी से निष्काषित कर दिया था , आज बेजेपी के पास क्या बचा हैं ? प्रमोद महाजन नहीं रहे ,अटलजी भी जाने के राह पर ,लाल कृष्ण आडवानी जी भी कितने दिन के मेहमान हैं ?तेज तर्रार स्वाध्वी उमा भारती भी नहीं रही ,भाई ! खाली मैदान में गोल मारकर क्या हॉसिल कर लोगे ? मेरे जानकारी के अनुसार मुहम्मद अली जिन्ना भारत के बटवारे के लिए जितनी जिम्मेदार नहीं थे, उससे अधिक जिम्मेदार तो हमारे देश के प्रतिष्ठित नेता ही रहे हैं ,जो नेता देश के बटवारे के लिए अधिक जिम्मेदार हैं उन्हें तो षडयंत्र पूर्वक सम्मानीत किया गया हैं , यहॉं तक कि कालपात्र में भी देश के इतिहास को स्वार्थपूर्ण ठंग से दफना दिया गया था ,जनता पार्टी के राज में हमने यह भी देखा और सुना है । अब जिन्ना जी के बारे में कौन क्या लिख रहे हैं उसके चलते दबाव बनाना पार्टी से निकाल कर दुसरों पर यह भयादोहन करना कि यदि पार्टी के धारनानुसार नहीं लिखा गया तो निकाल दिए जाओगे ,देखा हैं ! हमने अच्छे अच्छे तोप खानों को नहीं बक्शा हैं तो तुम किस खेत की मूली हों ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-6717415238562129544?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/6717415238562129544/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/08/blog-post_20.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6717415238562129544'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6717415238562129544'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/08/blog-post_20.html' title='हमने जसवंत सिंह जैसे तोपखान को नहीं वक्शा..तुम किस खेत की मूली हो---'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4839461435565353107</id><published>2009-08-06T00:15:00.000-07:00</published><updated>2009-08-06T09:20:18.479-07:00</updated><title type='text'>भाई के लिए दुआ मांगने आई थी मन्दिर में, युवती को नंगी कर पुजारिओं ने पीटा</title><content type='html'>दलित जीवन हाय तेरी यही कहानी ,मंदिरों में लुटती आस्मत ,नंगी तेरी जवानी । आए दिन दलितों पर अमानुषिक अत्याचार का सिलसिला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा हैं ,इस आवाज को उठाते हुए दक्षीण के प्रेरियर रामास्वामी  नायकर ,महाराष्ट्र के ज्योतिबा फुले ,छत्तिसगढ से गुरू घासीदास,कबीर दास ,बंगाल के महाप्रभु चैतन्य,हरिचॉंद गुरूचॉद ,आधुनिक समय के बाबा साहेब अम्बेडकर के साथ ही साथ न जाने कितने महापुरुषों ने छुआछुत ,जाति-पाति पर आन्दोलन और इस पर आवाज उठाते रहे है ,आज भी जाति-पाति, छुआ छुत मिटने का नाम नहीं ले रहा हैं । पिछले समय एक दलित शिक्षिका को होली के दिन अपने बच्चे और पिता के साथ ही साथ गॉंव वालों के सामने कुछ नरपिशाच के द्वारा  नंगी कर सारे शरीर में रंग मला गया ,और इसके बाद भी कई घटना घट चुकी हैं अभी रक्षा बन्धन के दिन उत्तराखंड के राजधानी देहरादून के नजदीक स्थित प्रसिद्ध हनोल मंदिर में राखी पूजा कर भाई के कलाई में उस राखी को बॉध कर प्रेम और रक्षा का वचन जैसे अटूट बन्धन के लिए ईश्वर से मंदिर में आशिर्वाद मांगने गई थी ,ऐसी पवीत्र भावना के आगे जालिम से जालिम भी पिधल जाते हैं ,किन्तु इस युवती को मंदिर के पूजारीयों ने निर्वत्र कर मारा -पिटा ,मात्र इसलिए कि वह दलित हैं । लोग तमाशा देखते रहे ,भगवान के मंदिर में इस कु कृत के लिए आग क्यों नहीं लग गई  ? बज्र क्यों नहीं गिरा ? भगवान के सामने एक पवीत्र युवती का अपमान भगवान कैसे सहन करती है ? क्या भगवान नाम के व्यापार के आगे भगवान भी आज लचार हो चुके हैं ? ऐसी ओछे मानसीकता के पूजारीओं को पूजा अर्चना करने का हक किसने दिया ? अविलम्ब पूजारी के पद से हटाकर उसे दंडित करना अति आवश्यक हैं । देश के लोग आज भी उंच -नीच की भावना से हटने को तैयार नहीं है । मानव-मानव में इस तरह की नफरत !!!!!!!!!! कदापी सहन नहीं हो सकता । यदि वक्त रहते समाज देश के लोग न जागे तो यह एक महामारी के रूप में सामने आ रहा हैं इसका परिणाम भी भयावह होगा । यदि दलित लोग एक अलग राज्य की कल्पना करने लगे तो क्या स्थिति होगी कल्पना करने पर भी रोंगटें खडी हो जाती हैं । बाबा साहेब अम्बेडकर ने तो दलितों के लिए अलग राज्य की मांग की थी । यदि दलितों पर हो रहे अत्याचार से आक्रोशित समाज भी बाबा साहेब जैसे मांग करने लगे तो आज हम क्या जवाब देंगे ? मुझे तो लगता हैं कि इस देश से हजारों साल तक अब आरक्षण की समस्या का समाधान नहीं हो सकता । जब कुछ ओछे मानसीक सम्पन्न लोग अपने को ऊँचा समझने को मान सम्मान समझते है और जन्मजात ऊँचा समझने में उन्हें सन्तोस मिलता हैं तो दलित समाज चाहे करोड़पति हो जाए फिर भी आरक्षण को खत्म करना कयों चाहेगा ? जब तक ऊँच नीच की भावना इस समाज में रहेगा तब तक आरक्षण भी खत्म नहीं हो सकता ,चाहे हम चित्कार करते रहे,माथा फोंड़ डाले ,मानव समाज यदि सम्मान से जीने लायक न रहे तो इस देश में प्रजातंत्र भी आगे चल कर एक सपना ही बन कर रह जाएगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4839461435565353107?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4839461435565353107/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/08/blog-post.html#comment-form' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4839461435565353107'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4839461435565353107'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='भाई के लिए दुआ मांगने आई थी मन्दिर में, युवती को नंगी कर पुजारिओं ने पीटा'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7270862610565297275</id><published>2009-07-27T02:04:00.000-07:00</published><updated>2009-07-27T02:11:46.928-07:00</updated><title type='text'>पढ़ा गया सूचि में भी गलती हो सकती हैं ?कृपया लिखे</title><content type='html'>अभी 15 मिनट पहले ब्लागवाणी पर राष्ट्रपिता -राष्ट्रमाता  ,फिर राष्ट्रपति  -राष्ट्रपत्नी  क्यों नही ? पोस्ट  किया था 10 मिनट में ही 3 साथियों ने इसे पढा एवं नेट बंद करने के पहले ब्लागवानी को देखने पर पता चला कि-- पढा गया के स्थान पर 0 था , क्या तकनीति खराबी के करण ऐसा होता हैं ..या अन्य कारण से भी इस तरह की गलती हो सकती हैं ? कृपया विषय  सम्बन्धीत सुधी पाठक मुझे बताने का कष्ट करे  ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7270862610565297275?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7270862610565297275/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_3612.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7270862610565297275'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7270862610565297275'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_3612.html' title='पढ़ा गया सूचि में भी गलती हो सकती हैं ?कृपया लिखे'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-2352311041321365939</id><published>2009-07-27T00:51:00.000-07:00</published><updated>2009-07-27T01:10:08.327-07:00</updated><title type='text'>राष्ट्रपिता-राष्ट्रमाता ,फ़िर राष्ट्रपति -राष्ट्रपत्नी क्यों नहीं--?</title><content type='html'>कुछ लोगों को राष्ट्रपत्नी ....शब्द कोष  में ढुढने पर भी नहीं मिल रहा हैं अब शब्दों पर किसी का वश तो चलता नहीं कि हर शब्द ,कोष  में ही मिल जाए ,यदि यह शब्द नई हो तो भारतवर्ष के परिवेश में इसे समझा जा सकता हैं ,देश में राष्ट्रपिता  कहने से गर्व होता हैं ,राष्ट्रचाचा  भी शान हैं ,यहॉं राष्ट्रमाता भी हुए हैं ,राष्ट्रपति  तो जगजाहिर हैं, अब यदि राष्ट्रपत्नी  हो गए तो हर्ज क्या हैं ,जिस तरह पत्नी , पति का जान देकर भी  सेवा करती हैं ,बच्चों का  देखभाल ही नहीं करती बल्कि एक अच्छी नागरिक बनाकर देश को तोफा के रूप में सौप देती हैं ,सति सावित्री ,अनुसुया,तिलोत्तमा ,सीता, अरूंधुती,आदी न जाने कितनी विदुषी  पित्नयॉं अपनी  शक्ति से देश और समाज को राह दिखाई हैं ,एक क्रांतिकारि साथी को पुछा गया कि तुम्हारा शादी हो गया हैं ? तो उत्तर मिला हॉं .....पुछा गया किसके साथ उत्तर ? उत्तर  मिला - इस देश के साथ ,अब एक क्रांतिकारी यदि देश को पत्नी  के रूप में स्वीकार कर सकता हैं, तो किसी को भी राष्ट्रपत्नी  बनने पर गर्व होना चाहिए,अभी तो अगिनत रिस्ते बनने बचे  हुए  हैं ,शिक्षक -शिक्षिका,अध्यक्ष -अध्यक्षा ,पिता -माता इसी तरह राष्ट्रपिता  -राष्ट्रमाता  ,अब राष्ट्रपति  और राष्ट्रपत्नी  यह तो साधारण सी बात हैं ,हम सब रिस्तों के डोर से बन्धते चले तो देखिए फिर देश में सभी रिस्ते ही रिस्ते नजर आ आयेंगे ............. अब इसे किसी भी रूप कोई इस्तेमाल किया  सकता हैं .....सुवरण को खोजत फिरे...कवि ,व्याभिचारी ,चोर ....मैं तो शब्द को कवि के रूप में देखना समझना ज्यादा पसन्द करता हूँ  ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-2352311041321365939?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/2352311041321365939/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_27.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2352311041321365939'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2352311041321365939'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_27.html' title='राष्ट्रपिता-राष्ट्रमाता ,फ़िर राष्ट्रपति -राष्ट्रपत्नी क्यों नहीं--?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-1501051910483640243</id><published>2009-07-25T08:48:00.000-07:00</published><updated>2009-07-25T09:14:05.641-07:00</updated><title type='text'>भूतपूर्व राष्ट्रपति कलाम जी का चीरहरण कर एक विमान कंपनी ने अपमान किया -यदि यही हाल राष्ट्रपत्नी का हो तो !!</title><content type='html'>जब सामान्य जन पर अत्याचार होता है ,तो नेताओं को जश्न मनाने का सुनहरा अवसर प्राप्त होने के कारण जनता का सहानुभूती प्राप्त हो ,इस हेतु मुआवजा बॉंटे जाते हैं , एक करोड़ बॉंटने के लिए 3 करोड़ रूपये सरकारी खर्च हो जाता है ,अब राष्ट्रपति पर अत्याचार हुआ वह भी एक भु.पू राष्ट्रपति पर एक अमेरिकी विमान कंपनी ने श्री ए.पी.जे अब्दुल कलाम का चीर हरन करके वापस कर दिया ,हम हल्ला इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे राष्ट्रपति थे ,अब प्रश्न यह उठता हैं कि राष्ट्रपति के साथ तो हमेशा अंग रक्षक हुआ करता हैं, यदि वे नहीं चाहते कि उनके चीर हरण हो तो क्या मजाल कि एक आदना सा विमान कंपनी राष्ट्रपति का अपमान कर सकें । भु पू हुआ तो क्या हुआ ...ए पी जे अब्दुल कलाम के लिए दूनियॉ के सभी हिस्तयॉं मान-सम्मान रखते हैं ,यदि चीर हरण पर एपीजे अब्दुल कलाम जी को अपमान नहीं हुआ तो हम किसके लिए अपमान पर चिल्हाते हैं ,विचारनीय प्रश्न हैं । यदि कलाम जी को अपमान का अहसास होता तो वे उस हवाई जहाज पर सफर ही न करते ....यदि बहुत आवश्यक होता तो अन्य विमान की व्यावस्था किया जा सकता था , पिछले कुल समय से विमान कंपनीयों ने चुन -चुन कर हमारे शिर्ष्य नेताओं और मंत्रीयों का चिर हरन करने में लगे हुए हैं ,भुपू रक्षामंत्री ,भुपू अर्थमत्री सभी का चिर हरण हुआ ,ये मंत्रीयों को जब नंगा करके जॉंच किया जाता हैं तो ये चुपचाप सब कुछ करने देते है जैसे धारा 377 में होता हैं, और जब देश में लौट आते हैं ,तो यहॉं आकर भी चुप चाप दुबके रहते हैं यदि कोई मिडीया ने मान अपमान की बात करने लगे तो कोई प्रतिक्रिता भी नहीं होता हैं ,अब फिर हम उन बेशर्म लोगों के लिए लड़ते रहे ,लिखते रहें ,हमे खा पीकर कोई काम नहीं हैं क्या ?एक राष्ट्रपति ने न्याय व्यावस्था पर बहुत चिल्हाये ,क्या न्याय व्यावस्था में सुधार हुआ हैं ? क्या देश सोने की चिडियॉं बन सका हैं ? राष्ट्रपति बनने पर हमें क्या मिल गया ? एक वैज्ञानिक के नाते देश को मिशाईल मिला ,देश को साहस मिला ,दुनियॉं में नाम हुआ ,परन्तु एक राष्ट्रपति याने रबर स्टाम्प बनके कलाम जी ने तो कुछ भी नहीं कर पाए । अनेक विद्वानों का तो मत हैं कि इसतरह की पद समाप्त कर देना चाहिए ,क्योंकि जनता का जितना धन राष्ट्रपति के शान ओ शौकत में खर्च हो जाता हैं वह इस देश के सेहत के लिए उचित नहीं हैं । एक राष्ट्रपति को सारी सुविधा देने के पश्चात भी यदि देश के शान को बरकरार न रख सके, तो मेरे मत में तो उन पर जनता के अदालत में खड़े करके न्याय सुनाना चाहिए ,स्वयं दोषी को कोई सहानुभूति दिखाने की आवश्यकता ही क्या हैं ? क्या देश ने उनके लिए कोई कमी किया है?उन्हें देने में कोई कंजूसी किया है ? यदि नही तो कलाम जी ! आपका अपमान मात्र अपना अपमान नहीं , यह देश के साथ आज भी जुड़ी हुई हैं ,अत: हमेशा इस बात को याद रखने पर ही आपका कल्याण हैं .........कल यदि हमारे राष्ट्रपत्नी पर इस तरह की घटना घटे तो !!!!!!!!!!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-1501051910483640243?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/1501051910483640243/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_25.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1501051910483640243'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1501051910483640243'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_25.html' title='भूतपूर्व राष्ट्रपति कलाम जी का चीरहरण कर एक विमान कंपनी ने अपमान किया -यदि यही हाल राष्ट्रपत्नी का हो तो !!'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-1672762403108902057</id><published>2009-07-23T20:34:00.000-07:00</published><updated>2009-07-23T21:40:52.228-07:00</updated><title type='text'>शिक्षिका को नंगी करके रंग रगड़ा गया -न्याय न मिलने पर मांग रही हैं इच्छा मृत्यु -2</title><content type='html'>&lt;p&gt;जशपुर नगर के केंदपानी स्थित जिस पाठशाला में सुनीता पढाती थी वहॉं जातिवाद आज भी चरम सीमा पर हैं,अत: छुआछुत मानने वाले यह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों को एक नीच जाति के शिक्षिका पढाए , गॉंव के स्कुलों में मध्यान्ह भोजन की व्यावस्था सरकार द्वारा किया जाता हैं ,यदि सुनिता द्वारा बच्चों के भोजन को छु दिया जाता तो गॉंव के कुछ लोग उस भोजन को खाने नहीं देते थे  छींटाकशी ,अपमान सभी सहन करते हुए सुनिता ने शिक्षण कार्य जारी रखा ,चूंकि सुनिता को गॉंव से भगाने की  षडयंत्र  कुछ लोगों ने रचा था, जिसके तरह दिनांक 11 मार्च 2009 ,पवीत्र होली के दिन बौखलाये हुए कुछ लोग सुनिता बंजुआ के घर में घुस कर उसे बाहर निकाले और उसे सेरेआम पिता और अबोध बालक समेत समस्त गॉंव वालों के समक्ष नंगे करते हुए सारे शरीर  पर होली का रंग मलते हुए मौत का डर दिखाकर घंटों खड़ा  करके ठहाकें लगाते रहे । इसके बाद जो  कुछ हुआ इसकी जानकारी पूर्व लेख में दिया जा चुका है । चूंकि त्यौहारों के दिन शराब  पीना आम बात हो गई हैं और गॉंव में तो सामान्य सी  बात हैं, अत: होली के दिन सुनिता ने भी नशा की होगी ,इसी नशे का बहाना बना कर उन्ही लोगों ने एक शिक्षिका को सरेआम निर्वत्र कर मानव समाज को कलंकित कर दिया । इस मुद्दे को समाचार पत्रों द्वारा उठाया तो गया ,परन्तु प्रिंट मिडीया का कहीं नामोनिशाना नहीं मिलता । दिनांक 23 जुलाई 2009 को पुलिस ने गॉंव के कुछ लोगों को गि्रफ्तार किया ,परन्तु अब गॉंव के ही कुछ लोग शिक्षिका पर चरित्रहीन होने और शराबी होने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्यावाही को गलत साबित करने के लिए प्रशासन से मिलना शुरू  किया हैं । बात शराबी  होना ,चरित्रहीन होना आदी का नहीं हैं ,एक स्त्री को निर्वत्र कर उस पर रंग रगड़ते  हुए, नंगे खड़े  करना और फिर गांव से चले जाने को मजबूर करना....किसी भी किंमत पर स्वीकार्य नहीं हैं ।कल लिखा गया पोस्ट  को मैंने रेजिश्ट्री करने हेतु तैयार रखा था ,परन्तु लेख चूँकि  आग में घी का काम करता ,यह सोच कर पत्र को रेजिश्ट्री  नहीं किया ,कुछ साथी शासन -प्रशासन पर दबाव बनने लगे है, ताकि सुनीता को न्याय मिल सकें ,लकिन मैं  वर्तमान अराजक देश में यह आशा नहीं कर सकता कि आगे भी इसी तरह की घटना नहीं घटेगी !!!!ब्लोगार्स साथियों की  सक्रियता और प्रतिक्रिया के कारण भी इस प्रकरण में नया मोढ लेना शुरू  कर दिया है, महिनों भर चुप बैठी शासन  -प्रशासन अब कुछ तो कर रही है ,हो सकता है यही `कुछ´अन्य संगठनों और महिला आयोग को भी सक्रिय कर दें ,मानवअधिकार के समर्थक भी आगे आए ...परन्तु हमें तो बर्बरता पर संघर्ष  करते रहना है ।   &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-1672762403108902057?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/1672762403108902057/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/2.html#comment-form' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1672762403108902057'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/1672762403108902057'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/2.html' title='शिक्षिका को नंगी करके रंग रगड़ा गया -न्याय न मिलने पर मांग रही हैं इच्छा मृत्यु -2'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7339834169646099032</id><published>2009-07-22T10:22:00.000-07:00</published><updated>2009-07-22T10:58:00.154-07:00</updated><title type='text'>शिक्षिका को नंगी कर सरेआम अंग-अंग में रंग रगड़ा गया --न्याय न मिलने से माँगा इच्छा मृत्यु</title><content type='html'>एक शिक्षिका को सरेआम निर्वत्र कर अंग -अंग पर रंग रगड़ते हुए ,घर से बेघरबार होने को मजबूर सुनीता का दोष मात्र इतनी ही हैं कि वह एक शुद्र हैं !!!! ३० वर्षीया शिक्षा कर्मी जशपुर से लगा गांव केंदपानी संकूल, कस्तुरा में पदस्थ हुई ,अपनी 3 वर्षीय पुत्र और बूढे पिता के जिम्मेदारी लिए हुए एक परित्यक्ता की कहानी पर उसके मौत के बाद शानदार फिल्म बनने की इन्तेजार में आज भी न्याय नहीं मिला ,पुलिस और प्रशासन दोनों मौन ,घटना घटित हुए आज पॉंच माह बित चुका हैं ,नारी स्वतंत्रता&lt;br /&gt;और समानता की दुहाई देने वाले समस्त संगठन भी मौन ...पुलिस जॉंच के नाम पर मात्र खाना पूर्ति कर प्रकरण को दबाने में लगे हुए हैं ,तात्कालिक थाना प्रभारी श्री भगत को लिखित शिकायत के साथ ही साथ पीड़िता श्रीमती सुनीता बंजुआ ने जिलाधीश डी.डी.सिंह को भी उचित कार्यावाही की गुहार लगाई थी ,परन्तु आज तक समस्त नारी जगत की अपमान पर सभी मौन हैं ,मजबूर होकर न्याय पाने की आश छोडकर शिक्षिका ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व विभागीय शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के समक्ष गुहार लगाई कि पल -पल पर अपमानित होकर जीने से अच्छा मुझे ईच्छा मृत्यु दी जाए और चूंकि एक अबोध बालक की जिम्मेदारी और बूढे पिता के भार भी सामने हैं, अत: मौत के बाद दोनों की सुरक्षा सरकार करें । आज सुनीता ग्राम कस्तूरा में जान बचाने की डर से निर्वासित जीवन बिता रही हैं ,मानवता की दुहाई देना बहुत अच्छा लगता हैं पर जब किसी पर अत्याचार होता हैं, ओर समय पर न्याय न मिलने के कारण आक्रोशित नारी भवानी की रूप लेकर वही कार्य करती हैं जो एक समय फूलन देवी ने किया था । आज यदि कोई नक्शली सुनीता बंजुआ से मिलकर यह कहने लगे कि अपमान का बदला लेने के लिए हथियार उठाओ तुम्हें इस नपुंशक समाज ,शासन -प्रशासन से न्याय नहीं मिल सकता हैं अत: शासन प्रशासन और जिन्होंने भी तुम्हारा अपमान किया है उसे गोलियों से भून डालों ...ईच्छा मृत्यु से तो अच्छा बदला लेकर मौत को गले लगाओं .....? सोचिए आगे क्या हो सकता है !!!! जब मैं सुनीता के बारे में लिख रहा हुं तो उन पर हो रही अन्याय के खिलाफ भी मुझे आवाज उठाना चहिए ,पर आज के माहौल में मैं कितना मजबूर हूँ कि .... अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर मुझे भी हो सकता हैं नक्शली होने का आरोप लगा कर असानी से अनिश्चित काल तक जेल में ठूंस दिया जाए , पर इच्छा मृत्यु चाहने से अच्छा और चुपके से मौत को गले लगाने से भला यह हैं कि ,छत्तीसगढ के राजधानी रायपुर में धरना देकर बैठ जाना ,मैं बचन देता हूँ कि सुनीता के साथ मै भी तब तक धरने में बैठा रहूंगा जब तक उन्हें न्याय न मिल जाए । समाज जिसे शुद्र कहकर अपमान करता हैं ,21 वीं सदी के दम्भ भरने वाले लोग कुत्तें को तो गोद में उठा कर चुमने से नहीं चुकते और मानव समाज को घृणा करते हैं , ऐसे ओछे लोग मनुष्य नहीं ...हैवान हैं...समाज के दुश्मन हैं , अत: इन लोगों के कारण अपने आप को अपमानित महशूस करने की आवश्यकता नहीं हैं ,नंगे ये समाज हैं, अपमान ये समाज के ठेकेदार हुए,धर्म के नाम पर उंच नीच ,भेद -भाव का जो खेल खेला जा रहा है उसका अन्त होना ही हैं, देर हो सकता हैं पर अन्धेर नहीं हो सकता । जो समाज ,जो देश मानवता की रक्षा न सकें वह समाज नपूंशक हैं ......इस समाज से नंगे पन के अलावा और क्या आशा किया जा सकता है ??? इसका एक प्रति श्रीमती सुनीता को रेजिष्ट्री पोस्ट द्वारा भेज दिया गया हैं , आगे जो भी होगा उस पर क्या हमारे ब्लोगर भाई -बहनें कुछ विचार और व्यावहारिक कदम उठाने हेतु आगे नहीं आ सकतें ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7339834169646099032?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7339834169646099032/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_22.html#comment-form' title='16 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7339834169646099032'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7339834169646099032'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_22.html' title='शिक्षिका को नंगी कर सरेआम अंग-अंग में रंग रगड़ा गया --न्याय न मिलने से माँगा इच्छा मृत्यु'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>16</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-2536292105725296146</id><published>2009-07-07T11:26:00.000-07:00</published><updated>2009-07-07T11:53:50.842-07:00</updated><title type='text'>समलैंगिगता पर -अंधा बांटे कुत्ता खाय</title><content type='html'>समलैंगिकता पर लिखने के लिए बहुत दिनों से अपने आप को तैयार कर रहा था ,तैयारी इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि मैंने एक माह के अन्तराल में लिंगानुभूति पर कुछ ज्यादा ही लिख दिया  था ,मुझे भय लग रहा था कि कुछ लोग मुझे आयटम गर्ल जैसे आयटम ब्लोगर न समझ बैठे । हॉलाकि अभी भय कुछ कम हो गया ,फिर भी भय तो समलैंगिकों से बना हुआ है। कुछ दिन पूर्व ऐसे बहादूरों ने महानगर में बहुत बड़ी रैली निकाली ,नगाडों  के थाप में ,ऐसे नाच रहे थे जैसे बंगाल जीतने की खूशी में अंग्रेजों के चहेते लार्ड क्लाईव ने रैली निकाली थी,कुछ इतिहासकारों ने लिखा था कि देखने वाले यदि उस रैली पर एक -एक पत्थर फेंका होता तो रैली वाले कुत्तों की मौत मरते । इस देश में तो कुत्तों की मौत पर लिखने में भी डर लगता है। क्योंकि कुत्ते प्रेमीयों की  कमी नहीं हैं । कुत्ते प्रेमीयों के लिए इस वर्ष  बहुत गर्व का  हैं ,क्योंकि वे अब सीना ताने कह सकते है कि मेरे कुत्ता या कुतिया समलैंगिक नहीं है ,बात तो सही लगता हैं ,मैंने  आज तक कुत्ते को किसी कुत्ते पर चढते नहीं देखा हैं  , कुतिया के साथ तो झुंड के झुंड   देखा जा सकता हैं । प्रकृति ने प्राणी को समलैंगिक नहीं बनाया ,विपरीत लिंगी में ही यौन सम्बन्ध हेतु उचित नियम बना हुआ है। अब देश के न्यायालयों पर मेरे जैसे लोग क्या टिप्पनी करें ,जो स्वयं ही लचार हैं ,पंगु हैं ,दुबीधा में समय गुजार रहे हैं उनके लिए टिप्पनी करना अच्छी बात नहीं है,जिस न्याय रूपी देवी के ऑंखों में पट्टी बन्धा हो ,उससे न्याय की कितनी आशा की जा सकती है यह तो सब समझने की बात हैं ,और सभी अन्दर की बात है। गंन्धारी ने तो पति के लिए ऑंखों में पट्टी बॉध ली थी ,हमारे न्याय देवी पता नहीं किसे अपना पति मानते हुए ऑंखों में आज भी पट्टी बॉंध रखी है। अंग्रेजों ने आजादी के पहले काले कोर्ट और न्याय देवी की आखों में पट्टी बंधने  का दू:साहस किया था परन्तु आज भी कानून अन्धा हैं । अन्धा कानून से न्याय किसे मिलेगा ?अभी तो बलात्कार पर ३७६ धारा लगता हैं ,कल किसी बच्चों को उठाकर सामुहिक समलैंगिक का शिकार बनाया जाएगा ,बच्चे रोते -रोते घर में मॉं -बाप को शिकायत करने पर भी हम किसी पर कुछ भी करने लायक नहीं रहेंगे  ,अराजकता की चरम सीमा ही कलियुग का अंत कहा गया हैं ,मुझे लगता है कि इस देश का अन्तिम समय आ चुका है। देश के हिजड़ों ने पुरुषों  का लिंग काट कर अपने साथ मिला लिया करता हैं, ताकि दल भारी हो सके , अब समलैंगिकों को मजा आ जाएगा ,वे भी देश में अपना जुगाड़  लगाने शुरू  कर देंगे । समलैंगिकता पर उपन्यास लिखा जाएगा , फिल्मों की बाढ आ जाएगी  , प्रचार -प्रसार पर विशेष  ध्यान दिया जाएगा ,शासकिय बजट में विशेष  पैकेज का प्रावधान होगा । समलैंगिकों को समाज में महिमा मंडित करने के लिए नेता ,अभिनेता ,सरकारी साधु -सन्त सभी कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेंगे । इसी को कहते हैं कि अन्धा बॉंटे और कुत्ता खाय ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-2536292105725296146?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/2536292105725296146/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_07.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2536292105725296146'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/2536292105725296146'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post_07.html' title='समलैंगिगता पर -अंधा बांटे कुत्ता खाय'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-6658450388121414129</id><published>2009-07-01T07:38:00.000-07:00</published><updated>2009-07-01T08:23:31.178-07:00</updated><title type='text'>क्या भारत कूड़े-डब्बे के सिवाय कुछ हैं ?</title><content type='html'>आज का भारत कूड़े -डब्बे के सिवाय कुछ रह गया है क्या ? मैकाले के शिक्षा पद्धति से लेकर अमेरिका का हर कूड़ा यही तो फेंका जाता हैं , विकसित देशों के नजर में भारत एक कूड़े दानी के सिवाय कुछ भी नहीं । अभी परमाणु सौदे में अमेरिका के जहरीले परमाणु कचड़ा भारत में डाल दिया जाएगा । सैकडों वर्षों तक, उस कचड़े से रेडिओ धर्मी का प्रभाव भारत के लोगों को ही तो झेलना पड़ेगा ,एक समय देश के जमीन को ज्यादा उपजाऊ बनाने के लिए हालैंड से सूआरों के गोबर मंगाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी,देशी गाय की गोबर से बने खाद उपजाऊ नहीं ,पर सुअर के गोबर देश के लोगों को ज्यादा उपजाऊ लगता हैं । इस देश के बहू ज्यादा उपजाऊ नहीं है,अत: विदेशी बहू से राज कराना इस देश को अधिक भाता है। मुझे तो कभी-कभी ऐसा लगता है कि मैं देशी बनाम विदेशी हो गया हूँ । देशी संस्कृति कहीं ढूढने पर भी अपवाद स्वरूप भले मिल जाए ,परन्तु विदेशी भाषा खास करके अंगेजों के औलाद आज भी यही राज जमाए हुए हैं । इसे मैं कचडा कहूं या कुछ और, यह तो सुधी पाठक ही कह सकते है, परन्तु यहॉं भारतीयता ---देश प्रेम --स्वदेशी आदी तो गाली के सिवाय कुछ भी नहीं लगता , अब आगे खाने -पीने से लेकर शादी - विवाह तक सभी विदशी तर्ज पर हो रहा हैं तो इन सभी चीजों में जब मेरा भारत वर्ष ढूढता हूँ तो कही दिखाई नहीं देता हैं । कचड़े की ढेरों मे मेरा भारत कही खो गया है। भाई साहब ! बंगलादेश में नजरूल इस्लाम ,बंगलादेश में रविन्द्र नाथ ठाकुर ,बंकिम चन्द चटर्जी, क्रान्तिकारी सूर्य सेन , सबसे छोटी उम्र के शहीद खूदीराम बोस ,काकोरी प्रकरण ,ढाका के नागवंशी कान्तिकारी सुश्री लीला नाग जो आजीवन नेताजी सुभास चन्द्र बोस के साथ भारत में रहकर ही कार्य सम्पादन किया था । जो ऐतिहासिक भूल हमारे नेताओं ने किया है उसका सजा आज बंगाल के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मैं इस बात से कदापि सहमत नहीं हूँ कि चाहे बंगाल के लोग हो या चाहे भारत के लोग या विदेश के अन्य -लोग, भारत में किसी भी प्रकार के &lt;span class=""&gt;षडयंत्र &lt;/span&gt;में लिप्त हो, और हम मौन रह कर सहन करते रहे, क्या देश में रह कर देशी लोग आतंकवादी कार्य को अन्जाम नहीं दे रहे है ?आज पाकिस्थानी आतंकवादी ,कश्मीरी आंतकवादी ,देशी आतंक वादी और न जाने कितने प्रकार के लोग देश को खोखला बनाने मे लगे हुए है। विदेशी ताकत तो देश में जहर बेचने का धंधा ही बना लिया है ताकि देश के लोग धीमी जहर पी पी कर चलता फिरता मूर्दा बना रहे ,और वे भी मूर्दो पर राज करके अरबों -खराबों से खेल सकें । बंगलादेशी पर मैंने लिखकर कोई बड़ा अपराध तो नहीं कर दिया हैं ? हमने अभी तमिलों को शरण दिया हैं ,नेपालीयों को तो हमने गोद में ही ले लिया हैं ,फिर बंगलादेशिओं पर इतनी आक्रोश क्यों है ? मेरे नजर में यह एक षडयंत्रकारी प्रचार के सिवाय कुछ भी नहीं है। आज इस लेखनी के माध्यम से भविष्यवाणी कहना चाहता हूँ कि निकट भविष्य में बंगलादेश भारत का ही अंग बन जाएगा -----मुझे एक भाई साहब ने बहुत ही भावूक कहा है, वास्तव में मैं भावूक हूँ , भावूक ही दूसरों का भाव समझ सकता हैं ,दूसरों का दू:ख -दर्द तो भावूक व्यक्ति ही समझ सकता है। और मुझे भावूक होने में कोई दोष नहीं दिखता । भाषा और वर्तनी सम्बन्धी दोष लेखनी में होने की बात भाई साब ने कही हैं ,मैं मात्र भाव को लेखनी के माध्यम से पहूंचाने का प्रयत्न करता हूँ ,यदि भाषा गत दोष दिखता हो तो कृपया स्वयं सुधारकर पढने का कष्ट करें ,मुझ पर बहुत उपकार होगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-6658450388121414129?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/6658450388121414129/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6658450388121414129'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/6658450388121414129'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='क्या भारत कूड़े-डब्बे के सिवाय कुछ हैं ?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' 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थे । इस देश में आज कोई नहीं कहता कि सिन्धीयों को भगाओ ....पंजाबीयों को भगाओ ......परन्तु पाकिस्थान से स्वतंत्र हुए बंगलादेश के बंगालियों को भगाना चाहिए ,देश दो भागों में बॉंट दिया गया और मैं  किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूँ  ,मुझे किसी का नाम लेने में भय भी नहीं लगता, कई बार ले चुका हूँ  ,जब -जब उनका नाम लेता हूँ , तब -तब अपने आप पर घृणा होने लगता और अपने आप को कोसता रहता हूँ , ये नाम मेरे जूबान में नहीं आना चाहिए था ......मेरे भारत वर्ष को दो टुकड़े  में बॉट कर राज करने वाले कौन लोग हैं ? क्यों नहीं बंगलादेशीयों को अपना देश चुनने का अधिकार दिया गया ? बंगला देश में  तिरंगा झंडा फहराया गया था , एक भी बंगलादेशी पाकिस्थान में रहना नहीं चाहते थे ,वे सभी भारत को ही अपना देश मानते रहे । देश के गद्दारों ने षडयंत्र  पूर्वक बंगलादेश को तस्तरी में करके पाकिस्थान को भेंट चढा दिया था ,मात्र इस लिए ...कि बंगाल ने बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर को संसद में जाने के लिए जिताया था ? उन्होंने कहॉं भी कि मुझे मेरे लोगों ने धोखा दिया है। महाराष्ट्र  में उन्हें पराजय का मूंह देखना पड़ा  था । श्री जोगेन मंडल  ने अपना स्तीफा सौप कर बाबा साहेब को कहा था बाबा आप मात्र हॉं कर दिजीए बाकी बंगाल के एक एक नागरिक आपकों व्होट देगा, और यही हुआ भी । जब देश में एक वर्ग ऐसा था कि किसी भी किंमत पर साहेब को संसद में जाने से रोकना चाहते थे और उस समय यदि कोई भारी बहुमत से बाबा साहेब को जिता कर संसद में भेजे तो विरोधी वर्ग का क्या हाल हुआ होगा ......सोचने और कल्पना करने का विषय  हैं । बंगाल के लोगों को कायर कहो , डरपोक कहो , गालियां दो क्योंकि एक वर्ग के न चाहते  हुए भी बाबा साहेब संसद में पहंचे थे ,जिन्होंने उन्हें मद्द किया उन्हें सबक तो सिखाना ही हैं इसलिए इतिहाकारों ने लिखा कि तस्तरि में करके नेताओं ने बंगलादेश को पाकिस्थान के जिन्ना को भेंट प्रदान किया था ।आजादी का मुल्य तो देश के सभी वर्गो ने चुकाया हैं परन्तु बंगाल के लोग आज भी चूका रहे है। उनके सामने मजबूरी है कि वे आज  भी यह मानने को राजी नहीं हैं कि भारत और बंगलादेश दोनों भीन्न -भीन्न देश है। दो कदम दूर मॉं रहती है और दो कदम में मौसी ...बच्चा क्या करें  ? उसे मॉं भी चाहिए और मौसी भी । दिन में बंगलादेश के मौसी के पास चला जाता है और शाम  तक वहॉं से लौट आता है। यह हालत जैसे हिन्दुओं का है ,वैसे ही मुस्लिमों का । हम किसी देश का नाम बदलकर बंगलादेश रख सकते है हो सकता है कि आगे चलकर कोई दूसरा नाम भी रख ले परन्तु क्या हजारों वर्षों  का इतिहास मन मस्तिष्क  से हम भूला सकेंगें ?  हमने सुरक्षा  के लिए प्रहरी लगा दिया ,पर वे भी तो मनुष्य  ही है ,जब देखता हैं कि सुबह शाम  आना और जाना लगा हुआ है तो आय का भी एक साधन को कौन छोड़ना चाहेगा ? यही तो सब हो रहा है। मैं मानता हूं कि मिलने मिलाने की इस खेल में कुछ हानी हमें उठानी पड़  रही है परन्तु इस हानी के लिए आज के इस पिढी दोशी नहीं हैं यदि इस दोष  को दूर करना हो, तो दोनों देश को एक करना ही पड़ेगा  । ऐतिहासिक भूल को इतिहास की चश्मे से ही देखना होगा, न की क्षणिक आवेग में जो चाहे वो कह दिया ,लिख दिया, और भावनात्मक रूप से किसी को भागने और भगाने की कार्यवाही करने लगे । यह तो समस्या का समाधान नहीं है। देश को वाटने  का जो समस्या हमारे पूर्वजों ने हम पर थौपा हैं ,उस समस्या का समाधान करना हमारा प्राश्चित  हैं और हमें इसे सहर्ष  स्वीकार करना ही पड़ेगा  ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-8217712320762475447?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/8217712320762475447/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_26.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8217712320762475447'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/8217712320762475447'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_26.html' title='बंगलादेशी होना अपराध हैं -- इसलिए मार डालो'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4615590523986519948</id><published>2009-06-24T11:42:00.000-07:00</published><updated>2009-06-24T11:52:16.273-07:00</updated><title type='text'>ताकि लेखनी का धार बरकरार रहें</title><content type='html'>बन्धु ! मैंने अनेक बार आपके द्वारा लिखा गया आलेख को खोजने का प्रयत्न किया ,जिसमें आपने लिखा था कि कुछ ही लोगों द्वारा यदि ब्लागों को पढा जाए तो उसका महत्व क्या हैं ?मैने मात्र शीर्षक  को देख कर अनुमान लगा रहा हूँ  कि आप ब्लाग लिखने से परहेज करना चाहते है , कभी -कभी मैं  आपके जैसे ही सोचने लगता हूँ  , जबसे मुझे यह पता लगा कि गूगल ने हिन्दी में लिखने वालों को कोई भी पारिश्रमिक नहीं देता ,एवं दिल्ली के मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि लगभग  तीन वर्षों  से पूर्व के नियमानुसार लेखन पर भी बकाया नहीं दिया हैं ,परन्तु विदेश में हिन्दी को यदि अंग्रेजी में लिखा जाए तो लेखकों को भुगतान किया जाता है। यदि यह सच हैं तो भारत में लिखने वालों के लिए कोई अच्छी खबर नहीं है। यदि बहुत ही स्पष्ट  रूप से कहूँ  तो यह एक आर्थिक और बौद्धिक शोषण ही हैं । हम लिखते रहे और उस लेखन से अरबों कमाने के बाद भी एक अंश तक देने में यदि गूगल नकारा साबित होता हैं तो हमें कुछ करना ही चाहिए । आज नेट में लगातार लिखते रहने से बहुत बड़ा  रकम खर्च करना होता है और घर से अधिक समय तक रकम लगाना वर्तमान समय में बुद्धिमानी नहीं कहा जा सकता है ,स्थायी लेखन के लिए निश्चित  रूप से कुछ न कुछ लाभ लेना अनूचित नहीं है। मात्र नकद प्राप्ति से मेरा अभिप्राय नहीं हैं , अन्य तरीके से भी लाभ पहूंचाया जा सकता है। अभी मल्टीफैल्क्स भी लाभ के मुद्दे पर लम्बी लड़ाई के पश्चात फिर से शुरू हो सका है। अत: यदि हम सभी एक मत से गूगल को हमारी भावना से अवगत करवाते हैं तो उसे निश्चित  रूप से रास्ता निकालना ही पड़ेगा  ,चूँकि  जब विदशों में लाभ देने की व्यावस्था हैं और भारत में भी कुछ समय पूर्व यह लाभ मिलता रहा है, अचानक इसे बन्द करना सही  नहीं कहा जा सकता है।  मैंने जो कही हैं  यदि उचित लगे तो एक मंच बनाकर आगे की कुछ रणनीति बनाई जा सकती है। पुराने साथी इस मुद्दे को अच्छी तरह समझ सकते हैं और उन्हें आगे आकर शालिनता से सबको नियम आदी बताकर सहयोग करना चहिए । दुनियॉ के तमाम समस्याओं पर लिखते हुए यदि इस पर लिखने और कुछ करने के लिए हमें संकोच हो तो लेखनी का धार खत्म होने में देर नहीं लगेगी ,जबकि हमें इसे बरकरार रखना है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-4615590523986519948?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/4615590523986519948/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_24.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4615590523986519948'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/4615590523986519948'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_24.html' title='ताकि लेखनी का धार बरकरार रहें'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-7343410054413141712</id><published>2009-06-22T13:04:00.000-07:00</published><updated>2009-06-22T13:23:58.588-07:00</updated><title type='text'>यौन शिक्षा ओर प्रगतिशीलता</title><content type='html'>यौन शिक्षा पर एक समय गरमा गरम चर्चा चलता था ,भारत सरकार में बैठे कुछ लोगों को लगा कि यदि यौन शिक्षा दिया जाए तो हो सकता हैं कि देश में एड्स जैसे बिमारी से छुटकरा मिलने  के साथ ही ,बच्चों को भी यौन शिक्षा  से लाभ मिलेगा । लेकिन कुछ सिरफिरे लोगों के कारण सरकार के लिए इस उच्चकोटी के शिक्षा पद्धति को लागू करने में पीछे हटना पड़ा ,अब देखना यह हैं कि ये सिरफिरे लोग कौन हैं और क्यों सरकार को पीछे हटना पड़ा  । आज कल यदि लिक से हट कर कुछ कहा जाए तो उसे पिछड़ा  , पोंगापंथी , सिरफिरे ,और न जाने कितने ही प्रकार के नामों से उसका सम्बोधन होता हैं बताना असम्भव हैं । मै आज कुछ जोखिम लेना चाहता हूँ  , हो सकता हैं कि कुछ लोग मुझे भी अलंकार से सम्बोधित करें ,एक घटना से शुरू करता हूँ  .....मेरे एक परिचित इंग्लॅण्ड  में चले गये थे ,डालर का लालच आज भी लोगों को विदेश जाने में आकर्षित  करता हैं ,परिचित भी आकर्षित  हुए और कमाई भी छप्पर फाड़   के हुई,दो बच्चों के पिता ने जब देखा कि लड़की  बड़ी  हो रही हैं और  घर मेंलड़कों  का जमघट शुरू हो गया हैं तो चिन्तीत हो उठे ,मुझे एक दिन बोलने लगे कि   जवान लड़की  को मेरे और पित्न के  सामने ही एक लड़का  चुमने लगा ,मैंने कहा इसमें क्या दोष  हैं वहॉं तो यही  रिवाज हैं ,हमारे देश में जैसे नमस्कार करना ,प्रणाम करना रिवाज हैं उसी तरह कुछ देश में चुमना रिवाज हैं इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं हैं ,जैसा देश वैसा भेष  बनाना जरूरी है। परिचित ने जवाब नहीं दिया ,मैंने सोचा मेरे उदाहरण कुछ धारदार नहीं हैं अत: इससे अच्छा उदाहरण देकर समझाना आवश्यक हैं मैंने कहा भाई –आपने हिप्पीओं के बारे सूना हैं ? उसने कहा अधिक नहीं ,मैं अब हिप्पीवाद पर कुछ कहने के मूड में हो गया ...भाई साहब ! हेप्पी से हिप्पी बना है ,जब जेब गरम रहता है तो लोगों को हेप्पी सुझता है याने मनोरंजन ,नाईट क्लबों में जाना,पीना,जुआ खेलना ,नीला –काला फिल्म देखना ,ये सब गरम जेब का कमाल है ,जब जेब गरम हैं तो दिल भी गरम होने लगता है इसलिए उस खेल को करने के लिए भी रास्ता चाहिए और रास्ता निकाला भी .. एक समय शरीर को ऐसे पेंन्टों से रंगा गया ताकि पास से भी पता न लगे कि शरीर में कुछ भी नहीं है अर्थात सम्पूर्ण नंगे ... रास्ते में देखने वाले देखेंगे कि कपड़े  पहने दो युवा बात कर रहे हैं परन्तु खूलेआम सेक्स में मस्त .... इसे ही तो प्रगतिशील कहलाता हैं ,मैने कहा कि भाई साहब आप कहा खो गए है ...? मैं आपसे बात कर रहा हूं और आप हैं कि हूं –हॉं भी नहीं करते ....अब भाई साहब कहने लगे यार मुझे तो समझ में कुछ भी नहीं आ रहा हैं । मैंने सोचा सारा कहानी ही गुड गोबर हो गया हैं ,सारी रात रामायण सुनने के बाद ...राम- सीता कौन ? उत्तर मिला भाई -बहन । अब हाल का एक खबर सुनाना जरूरी हो गया है 11साल का लड़का  इंग्लैंण्ड में बाप बन गया हैं माता 14 साल की , लड़का  कहता है कि इस लड़की  के अलावा और लडकीयों के साथ मेरा सम्बन्ध  है , परन्तु जो बच्चा हुआ वह मेरा ही हैं लड़की  कहती है कि यह सच है। अब नन्हें माता पिता मिलकर शिशु  का पालन पोषण  करेगा । समस्या खड़ी  हो गई एक लड़का  और सामने आ गया ...कहने लगे कि जो बच्चा हैं उसका असली पिता मै हं , कारण मैंने इस लड़की  से कई बार यौन सम्पर्क किया है। अब असली और नकली पिता होने का सच्चाई पता लगाने केलिए डी एन ए का जॉंच होगा । भाई साहब  ! विदेश में रहना होगा तो ये सब सामान्य बात है , आपको भी आदत डालना होगा ...लड़की  मम्मी से बोलेगी कि मुझे आज नाईट क्लब जाना है और वही से डेटिंग भी जाना होगा ...आगे क्या होगा इस पर भाई साब सोचने का भी आवश्यकता नहीं हैं । मोबाईल  से सम्पर्क टूट गया .....बहुत दिनों बाद एकाएक परिचित का मोबाईल से सम्पर्क होने पर मैने पूछा भाई साब कैसे हैं ? मै तो इंग्लैंण्ड छोड़  दिया ...अब भारत आ गया हूँ  ,डालर का मोह छोड़  चूका हूं ...कहने लगे कि आपने मेरी ऑंखे खोल दी ..यदि आप उस दिन सारी बाते नहीं बतायी  होती  तो मै बरबाद हो गया होता ,मैं मेरे देश में ही खूश रहूंगा ,इतनी प्रगतिशील मुझे नहीं बनना हैं ...भाई साब बहुत बहुत धन्यवाद । यौन शिक्षा से जो विकृति पैदा होता हैं उसका एक मिशाल मैंने समाज के सामने रखा ,कुछ अच्छाई भी हो सकती है। जैसे एक लड़की  मॉं से निरोध की मांग करेगी ,आज भी भारत में  इस विषय  पर कोई चर्चा नहीं होने  पर  भी शादी के बाद वर-वधु बच्चे पैदा कर परवरिश करने लगते हैं ,उसे कोई शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती हैं । चिडिओं को मैथुन क्रिया के लिए कहॉं शिक्षा दी जाती हैं , कई बार तो मच्छरों को जोड़ी  में चिपके होने पर समझमें नहीं आता था ,बाद में पता लगा कि मच्छर भी इस तरह यौन सुख का आनंद लेता है। तितलियॉं भी.....जानवर भी ...किट पतंगें भी यौन सुख लेता हैं और बच्चे पैदा करके वंश बृद्धि करता है। अब प्रश्न यह हैं कि हम देश के छोटे - छोटे बच्चों को यौन शिक्षा देकर क्या सिखाना चाहते हैं ? निरोध ,गर्भ निरोधक गोली बेचने का एक अलग धंधा इस देश में चल निकलेगा ,आगे जाकर पढाई लिखाई छोड़कर यौन शिक्षा पर ही ध्यान केंद्रित हो जाएगा ,जब मम्मी पूछेगी कि आज कक्षा में क्या पढाई हुई तो उत्तर मिलेगा कि अमूल शिक्षक ने मुझे यौन शिक्षा का प्रेक्टीकल नॉलेज दिया हैं .....यही तो प्रगतिशिलता की  निशानी हैं और धारा 376 -377 देश से छुमंतर हो जाएगा ......तो शुरू की जाए प्रगतिशिल बनने का एक नया दौर ..?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-7343410054413141712?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/7343410054413141712/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_22.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7343410054413141712'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/7343410054413141712'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_22.html' title='यौन शिक्षा ओर प्रगतिशीलता'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-5791797057767923115</id><published>2009-06-21T10:13:00.000-07:00</published><updated>2009-06-21T10:28:25.815-07:00</updated><title type='text'>डॉक्टर मुझे खुजली हो गया हैं</title><content type='html'>ड्रागिस्टों की कमी नहीं हैं ,दुनियॉं भर से  यदि ऑंकडे  इकट्ठे किए जाए तो चौकाने वाली तत्थ्य सामने आ सकती  हैं । ड्रग  एक प्रकार के हो तो कुछ बात सामने लाने में सरल हो जाए ,परन्तु देश -दुनियॉं में तो इसका सम्राज्य बन गया हैं ,पिछले वर्ष  पान पराग पान मसाले के बारे में खबरें छपी कि ..निर्माता रसिक भाई का दाउद इब्राहिम के साथ सम्बन्ध हैं और पान पराग में उसका बडा शेयर  भी है। देश में रसिक भाई को गिरप्तार कर लिया गया ,बाद में छोड़  भी दिया गया,  आज भी पान पराग धड़ल्ले  से बिक्री हो रही हैं । बताया जाता हैं कि इसमें ड्रग  मिला हुआ हैं ,एक बार किसी को पान पराग का लत लग जाए तो एका एक छुटता नहीं हैं । बाजार में ऐसी कोई चीज नहीं बची हैं जिस पर दावे  के साथ कहा जा सके कि यह जहर मुक्त हैं । ड्रगिस्ट  की भॉंति मैं भी एक ब्लोगिस्ट बनता जा रहा हूँ  ,पिछले बार मैंने लिखा था कि मेरे साथ हर रोज बलात्कार हो रहा  हैं ,मुझे न्याय चाहिए ,कुछ मित्रों ने मुझे न्याय मिलने का रास्ता भी बताया था अत: उन मित्रों को मैं फिर से एक निवेदन करना चाहता हूँ  कि मुझ पर कुछ न विपत्ति हमेशा आता हैं ,क्या करूं जब मेरा किस्मत ही फूटा हुआ हैं तो किसको दोश दूँ  ?विपत्ति में अपनों का ही साथ याद आता हैं । मुझे खूजली हो गया हैं ,अनेक डाक्टरों को दिखाया ,दवाईयॉं ली  , पर खूजली हैं कि दिनों दिन बढता ही जा रहा हैं । कल ही डाक्टर साहब के पास गया था ,उन्होंने कहॉं कि.कल ही तुमने बताया ...तुम पर बलात्कार हो गया हैं... आज खुजली कैसे ? मैंने कहा...डाक्टर साहब क्या बलात्कार होने पर खूजली नहीं होता ? उन्होंने कहा कि बिल्कूल नहीं , मैंने पूछा सर...मैं तो कुछ भी समझ नहीं पा रहा हूँ  ,उन्होंने कहॉं तुम्हारा खूजली कहॉं -कहॉं होता है? पुरे शरीर  में..  पुरे शरीर  में खूजली होने का मतलब तुम्हारा खून ही खराब हो गया हैं .....कहीं तुम्हें एड्स तो नहीं हो गया है ? तुम ड्ग्स तो नहीं लेते ? तुम नान वेज लेते हो ? मैंने कहॉं कि डाक्टर साहब घर में कभी कभी खा लेता हूं अरे भाई नानवेज का मतलब भी नहीं समझते ...? मैंने कहा...पहले कभी -कभी मांस भी ले लेता था ,जब से बर्ड फ्लू  और स्वाईन फ्लू  जैसे महामारी फैल गया हैं तब से नान वेज छोड़ दिया हैं । अब तो डाक्टर साहब कुछ नराज हो कर बोले नानवेज  से मेरा मतलब वो नहीं हैं । मैंने पूछा कि फिर क्या बात हैं ,स्कुल -कालेजों में तो यही पढाया जाता है।मुझे बहुत पास बुलाकर बोले कि हम लोग नान वेज का मतलब सेक्स से लेते हैं  ,मैंने कहा कि इतनी सी बात और मुझे समझ में नहीं आरहा था ,इसका मतलब हैं कि मुझे कोई कठिन रोग जरूर हो गया है। मैंने कहा डाक्टर  !मेरा ईलाज अच्छा से किजीए नही तो मैं मर जाउंगा । आयुर्वेद डाक्टर होने के कारण  सबसे पहले मैं रोग के तह तक जाना चाहता  हूँ, खान पान रहन सहन आदी ही रोग का जड़  हैं, तुम यदि खाने में शुद्ध शकाहारी भोजन लो तो 90 प्रतिशत रोग भोजन से ही खत्म हो जाता हैं । खूजली भी नहीं होगा ....मैंने कहा कि डाक्टर साहब ! खूजली तो कई प्रकार के होते हैं ,कुछ लोगों को राजनीति करने की  खूजली ,कुछ को सेक्स की खूजली ,कुछ तो बकर करने की ,आज लिखने का भी खूजली ही तो हैं । डाक्टर ने पर्ची में लिखा कि दुनियॉं में अनेक प्रकार की खूजली विद्यमान हैं सबका ईलाज भी भीन्न -भीन्न होने के कारण तुम्हारा खूजली उत्तम कोटी के खूजली में गिने जाने के करण तुम इसे खूजाते रहो ...यही तुम्हारा ईलाज है.............&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-5791797057767923115?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/5791797057767923115/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_21.html#comment-form' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5791797057767923115'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5791797057767923115'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_21.html' title='डॉक्टर मुझे खुजली हो गया हैं'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-90445016594551753</id><published>2009-06-20T11:40:00.000-07:00</published><updated>2009-06-20T11:57:57.992-07:00</updated><title type='text'>बलात्कारी को फाँसी--जनता का आदालत</title><content type='html'>बलात्कार पर शायद कुछ ज्यादा ही लिखना पड़ेगा  ,इस विषय में  मैंने भारतीय दृष्टिकोण रखने का प्रयत्न किया था ,चूंकि मैं  सबसे पहले भारतीय हूँ  अत: इस समस्या को भारतीय चश्मे से ही देखना पसन्द करूंगा ,मेरे कुछ बन्धुओं ने टिप्पनी किया कि पश्चिम  के लोग भारत वर्ष  को सपेरों का देश मानते हैं और हम भी पश्चिम  को कुछ भी कहने का आजादी रखते हैं ....बात पूर्व और पश्चिम  का नहीं हैं, बलात्कार का स्वरूप पश्चिम  में और पूर्व में भीन्न होगा ,समाज और परिवेश ही इसे भीन्न रूप में&lt;br /&gt;परिभाषित करता हैं । दूनियॉं में कुछ ऐसे समाज भी हैं जहॉं गर्भवती लड़की  की ही विवाह मान्य हैं ,लेकिन भारत वर्ष  में ऐसा सोच भी नहीं सकते हैं । समाज ने जिस दंग से मान्यता दिया या कानून बनाया है,  उसके विपरीत कार्य करना ही बलात्कार कहना अधिक उचित होगा ।अब भारीतीय समाज ने नारी को बहुत ऊँचा  स्थान प्रदान किया हैं ,जहॉं नारी का पूजा होता हैं वहॉं देवता का वास होने जैसे पवीत्र धारना दुनियॉं में कहीं खोजने पर भी नहीं मिल सकता हैं कम बेशी देश के हर कोने में अपवाद को छोडकर यही भावना काम करती हैं । अब पश्चिम  में नारी को तो भोग का ही वस्तु माना जाता हैं ,वहॉं जो भी प्रत्यक्ष देखने और सुनने को मिलता हैं उससे यह धारना बनाना कोई अपराध नहीं है। भारत में विवाह को जन्म जन्मान्तर का साथ माना जाता हैं और पश्चिम  में विवाह मात्र एक करार हैं जो जब चाहे तब इसे तोड़  दे और अलग हो जाए ,उनके बच्चें अनाथालयों में पलते हैं । टी वी और नेट ने दूनियॉं को छोटा बना दिया हैं अत: कोई भी धारना बनाने के लिए आज वहॉं जाना अति आवश्यक नहीं है।बलात्कार को बहुत हल्के  से लेने का कोई मायने ही नहीं होता ,समस्या तो समस्या हैं ,उसका समाधान ढुढना समाज के जागरूक लोगों का कर्तव्य हैं। मेरा तो केवल यह मानना हैं कि हम जिस ढंग किसी नारी बलात्कार का प्रचार और विरोध करने के लिए आगे आते हैं उसी तरह से हमें सभी समस्याओं पर मुक्त विरोध करना चाहिए । जिस देश में आर्थिक तंगी के करण छोटी छोटी लड़किओं  को दरिन्दों के हाथ बेच दिया जाता हैं और उसे अन्धी गली में धकेल कर पुरूष  अपनी  यौन संतुष्टि  का साधन बना डाला हैं ,देश के सभी जिम्मेदार लोगों को यह पता हैं-- कहॉं कहॉं यह सब होता हैं , आजादी के 67 साल होनेको  हैं, क्यों नहीं देश के गरिबी हटी ? सबसे बडा बलात्कार तो देश के गरिबी हैं जो सामूहिक बलात्कार के श्रेणी में आता हैं । यदि देश के गरिबी हट जाए तो बलात्कार की घटना  पल भर में छुमन्तर हो जायगा । अब मैंने  अगर लिखा कि मुझ पर हर रोज बलात्कार हो रहा हैं ,मुझे कौन न्याय देगा ? मेरे एक साथी ने लिखा कि मुझे न्याय नहीं मिलेगा ,यदि मिडिया मेहरबान हो जाए तो मुझे न्याय मिल सकता हैं । मैं अब मिडिया के पास जा रहा हूँ  ताकि मुझे न्याय मिल सके । हे.....मिडिया भगवान मुझे विस्वास हैं कि आप मेरे फरियाद को सूनेंगे , इस देश के भाग्य विधाता आप ही हैं ,मैंने आपके उस प्रयास को देखा हैं जब आपने प्रिंस को पताल से निकाल कर जीवन दान दिया था ,मैंने पाकिस्थान के प्रेमी को भारत में मिलाने का एक मिसाल भी देखा हैं । मैंने तेजपाल के तेज को देखने का प्रयास किया हैं, मैं अगर लिखने बैठू तो सारा रात बित जाए ,फिर भी अधुरा ही रह जाएगा , इसलिए हे भगवान ! अब आप ही मेरे तारन हार हैं ,जिस तरह से कृष्ण  जी ने द्रुपदि के चीर हरण से निजात  दिलाया था उसी तरह मेरे साथ हो रही बलात्कार से मुझे मुक्ति दिलाने का कृपा करें और बलात्कारियों को फॉंसी के फन्दे पर लटकाने की व्यवस्था करें !!!!!!!!!!!!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-90445016594551753?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/90445016594551753/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_20.html#comment-form' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/90445016594551753'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/90445016594551753'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_20.html' title='बलात्कारी को फाँसी--जनता का आदालत'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-5226742976656482176</id><published>2009-06-19T12:23:00.000-07:00</published><updated>2009-06-19T12:43:30.975-07:00</updated><title type='text'>मेरे साथ रोज बलात्कार होता हैं ,क्या मुझे न्याय मिलेगा ?</title><content type='html'>आज कल बलात्कार पर बहुत कुछ लिखा जा रहा  हैं ,कुछ लोगों ने किसी लड़की को उठा कर ले गये और लड़की ने  चिल्हाई   ,लोग जमा हो गए ,एक आध लड़के  पकड़  में आ जाने पर बलात्कार के रूप में हल्ला हो गया ,यदि लड़की  नहीं चिल्हाई तो बलात्कार नहीं हुआ । अब मजेदार बात यह हैं कि किसी की पत्नी भी यदि रात को वो ..करते वक्त चिल्लाई ,तो हो सकता है पति बेचारा बलात्कार के आरोप में जेल जा पहुचे  । कुछ लोगों ने बलात्कार के लिए छोटी कपड़े  पहनने को विशेष  कारण बताया हैं अर्थात  लड़कियां  यदि छोटी कपड़े  पहने तो उस पर बलात्कार होने का जोखिम अधिक हो सकता हैं । मैं कभी बस्तर में रहता था , उस वक्त वहॉं कपड़े  पहनने का रिवाज भी नहीं था , लड़के  - लड़कियां  को बीन कपडे देखना आम बात था, लेकिन अपबाद को छोड़कर आदिवासियों में बलात्कार की आरोपी सुनने को नहीं मिलता था । वहॉं तो घोटूल प्रथा भी हैं जहॉं रात को अविवाहित लड़के  -लडकियॉं नाचते गाते वही सो भी जाते हैं फिर भी बलात्कार नहीं होता हैं । हत्या करना आम बात हो सकता हैं परन्तु बस्तर में बलात्कार आम बात नहीं है , यह भारतीय संस्कृति हैं । पश्चिम  में ठंड अधिक होने के कारण काम वासना की ईच्छा  भी ठंडे पड जाने से वहॉं की लड़कियां  औरतों को समाज ने बीना कपड़े  ही रहने को प्रोत्साहित किया करता हैं ताकि पुरुष  में वासना की ईच्छा देख- देख कर ही उत्पन्न हो सके । तमाम प्रकार की दवाईयॉं लेकर भी यौन संतुष्टि  नहीं हो पाता हैं ,भारत में तो ऐसा नहीं हैं , भारत वर्ष  में प्राचीन काल में भी बलात्कार का प्रमाण मिलता हैं किन्तु आज जैसे विकृत रूप वहॉं वर्णन नहीं मिलता ,इसका अर्थ यह हुआ  कि कपड़े  छोटे हो या बड़े  बलात्कार का सम्बन्ध कपडों  से नहीं वल्कि परिवेष पर निर्भर होता हैं यदि युवा या युवतीयॉं परिश्रम में व्यास्त हैं तो उन्हें यौन सम्बन्ध पर सोचने तक का समय नहीं मिल पाता हैं । खाली दिमाग शैतान का घर होने के  कारण बेरोजगार लोगों में यौन  संतुष्टि को मनोरंजन के साधन के रूप में देखने का आदत सा पड़  गया हैं । मूल संस्कृति तो संयम साधना पर बल देती हैं ,हम मूल संस्कृति से दूर  होते जा रहे हैं , जिसके कारण अनेक प्रकार के विकृतियों में बलात्कार भी एक विकृति के रूप में समाज का अंग बनता जा रहा हैं ,बलात्कार एक विकृत मानसिकता है। यदि मानसिकता को बदलने की कोशिस किया जाए तो इस समस्या  से छुटकारा पाया जा सकता हैं ,आज दिन रात टी वी में जिस तरह से नारी दर्शन  कराया जाता हैं और चलचित्र में नायिकाओं को नंगी रूप से पेश किया जाता हैं उससे युवाओं का क्या कहना बुजुर्गों  को भी लगता हैं कि इस ढलती उम्र में बहती गंगा में हाथ धो लिया जाए । परिवेष  ही मनुष्य  को अच्छी या बूरी बनाती हैं अत: परिवेश बनने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर हैं यदि बलात्कार जैसे कोई भी घटना हो तो उन जिम्मेदार लोगों पर  भी आरोप लगना आवश्यक हैं । अब बलात्कार मात्र किसी लड़की  का ही नहीं होता ,लडकों पर भी बलात्कार होता है। आज तो सभी ओर बलात् कार्य कराने का आदत सा हो गया हैं यदि मैं किसी को  घूस नहीं देना चाहता हूँ तो मुझे घूस देने के लिए मजबूर कर दिया जाता हैं । मैं मिलावट की वस्तुओं को खाना पसन्द नहीं करता तो मुझे मजबूरन मिलावट खाना पड़ता  हैं ,मेरे साथ तो रोज बलात्कार  होता हैं क्या मुझे न्याय मिल पाएगा ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8691068126047016839-5226742976656482176?l=sadhankumarray.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/feeds/5226742976656482176/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_19.html#comment-form' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5226742976656482176'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8691068126047016839/posts/default/5226742976656482176'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sadhankumarray.blogspot.com/2009/06/blog-post_19.html' title='मेरे साथ रोज बलात्कार होता हैं ,क्या मुझे न्याय मिलेगा ?'/><author><name>एस.के.राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13130055447332682963</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://2.bp.blogspot.com/_H8c9Z77uuq0/SrRuNM57o8I/AAAAAAAAAC0/6XsvByJn9Z4/S220/16052009596.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8691068126047016839.post-4716994095792836781</id><published>2009-06-14T11:16:00.000-07:00</published><updated>2009-06-14T11:39:23.997-07:00</updated><title type='text'>मंदी भगवान को जीवित रखना जरुरी हैं</title><content type='html'>मंदी और मंदी जहॉ जाऊ थोडी सी व्यापार -व्यावसाय की बात निकलते ही मंदी का जिक्र आम बात हो चुकी हैं । क्या करें.. भाई मंदी का जमाना आ गया हैं ,कमाई धमाई पहले जैसा नहीं रहा,जमाना बहुत बदल गया हैं आदी ....सुनते -सुनते काम पक गया हैं ,बेचारा मैं करू तो क्या करू ,सही कहूँ तो मुस्किल ,और गलत कहना सीखा नहीं –बीच में फंस गया । यदि कहूँ मंदी नहीं हैं तो बड़े उद्योगपति बन्धु नराज हो जाते हैं क्योंकि मंदी के नाम से उन्हें कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का एक अच्छा अवसर मिल गया हैं ,ट्रेड युनियनों और श्रमिक कानून के चलते अनेक मजदूरों को नौकरी से निकालना बहुत कठीन काम था ,आज आसान हो गया हैं । अब तो जितनी जोर से चिल्हाया जाए कि मंदी हैं उताना ही जोर शोर से मंदी पैजेक का फैदा भी उद्योग पतियों को मिल रहा हैं ,पैकेज का जो बदरवॉंट होता हैं वह भी जग जाहिर हैं .........एक दिन मेरे एक दोस्त को पूछा कि भाई सत्य बताना ...क्या वास्तव में तुम्हें लगता हैं कि मंदी हैं ? दोस्त ने इधर -उधर देखते हुए कहने लगे कि देखो मंदी के नाम से हम आज चॉंदी नहीं सोने काट रहे हैं ......मैंने कहा यार चॉंदी -सोना काटना क्या वला हैं ? दोस्त ने कहॉं कि तू बहुत बुद्दू हैं ,देखता नहीं मैंने पिछले माह ही मारूती 800 बेचकर सेंट्रो ले लिया हैं ,यदि कमाई नहीं होता तो क्या मैं सेंट्रो ले सकता था ? तू तो जानता हैं अभी 6 माह पहले ही नया मकान बना लिया था । मैंने कहा यार रियल मार्केट वाले बरबाद हो रहे हैं और तू कहता हैं कि मकान बना लिया, वह भी लाभ के रकम से .....बड़ा अजीब बात हैं ,मुझे सचमूच कुछ भी समझ में नहीं आता, बिजनेस करता तब तो समझ आता ना ? दोस्त ने कहॉं अम्बानी बन्धओं ने आपनी -अपनी पित्नयों को एक से एक तौफा इसी मंदी के दौर में दिया हैं वह तो देख रहा हैं कि नहीं ? अनिल अम्बानी का हवेली और मुकेश भाई ने जहाज का तौफा अभी -अभी तो दिया हैं .....अब लक्ष्मी मित्तल को लो अपने लड़के के लिए दूनियॉ के सबसे महंगी महल खरीदने का चर्चा हैं । मैंने कहा भाई कुछ समझ में नहीं आता कि सभी अर्थशास्त्री और विद्वान जब एक मत हैं क
